सावन के महीने का वृक्षों के बिना कोई वज़ूद नहीं

सावन के महीने का वृक्षों के बिना कोई वज़ूद नहीं
सावन के महीने का वृक्षों के बिना कोई वज़ूद नहीं

सावन | जलवायु परिवर्तन के कारण हमारे क्षेत्र का मौसम भी बदल रहा है। अपने आसपास के इलाकों को हरा-भरा बनाने का दायित्व हमारा ही है। इसके लिए कोई दूसरा नहीं आयेगा। खासतौर पर जिस रफ्तार से ईंटों का जंगल बढ़ रहा है उसी गति से जंगल खत्म होते जा रहे हैं। इतना ही नहीं बल्कि सघन बस्तियों में बचे हुए पेड़ अपना वज़ूद बचाये रखने के लिए जूझ रहे हैं।

हम सब का फ़र्ज़ है कि बरसात के मौसम में वृक्षारोपण के काम में अपना योगदान कुछ इस तरह से दे सकते है- पौधरोपण के लिए 2×2 फुट के आकार के गढ्ढे करने में योगदान दीजिए । इन गड्ढों में गोबर का सड़ा या कैंचुए की खाद डालें ।

पांच फुट या अधिक ऊंचाई के नीम, पीपल, बरगद, पिलखन, गूलर, शीशम, जामुन, बेल, इमली, आदि की पौध वृक्षारोपण के लिए देकर आप कुदरत के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित कर सकते हैं। इन पौधों की एक साल की अनुमानित मजदूरी देकर आप अपना हक अदा कर सकते हैं। इनकी सिंचाई की व्यवस्था कर सकते हैं या इसके लिए जरूरी धनराशि में हिस्सा देकर मदद कर सकते हैं। अपने घर के आसपास पार्क या बगीचे की देखभाल के लिए स्वयं का समय, खाद, पानी, और श्रमदान दे सकते है।

इस संबंध में होने वाली कार्यशालाओं के लिए प्रचार सामग्री, बैनर, आदि सामग्री तैयार कराने में सहयोग कर सकते हैं।
पौध को पहुंचाने के लिए अपना वाहन देकर सहायता कर सकते हैं। यदि आप सोसायटी में रहते हैं तो सोसायटी के निवासियों में वृक्षारोपण के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं। अपनी सोसायटी को खुबसूरत बनाने के लिए चंदा एकत्र करके एक जैसे गमले लाकर उनमें पौधे लगाए और सभी की बालकनी में रखवाएं।

एक पहल तो कीजिए। आपको हार्दिक अनुभूति और सुखद आनंद मिलेगा।