धारा 377 को अपराध की श्रेणी से हटाने की मांग : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

Section 377: Supreme Court gives Centre a week to respond to hotelier’s plea to decriminalise gay sex

नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने समलैंगिक संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर किए जाने संबंधी याचिका पर केंद्र सरकार से एक हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश एएम खानविलकर और न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने होटल व्यवसायी केशव सूरी की याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी करके एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा तथा इस याचिका को भी संविधान पीठ के समक्ष पहले से लंबित इसी तरह की याचिकाओं के साथ नत्थी करने का आदेश दिया।

सूरी ने दो समलैंगिकों के संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने की मांग पर शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 377 को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की थी जो कि समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखता है।

धारा 377 को अपराध की श्रेणी से हटाने की मांग को लेकर शीर्ष अदालत में कई याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं लेकिन अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया।

गौरतलब है कि साल 2009 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने धारा 377 को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया था, लेकिन बाद में इस आदेश को शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था।