सेंसेक्स 179 अंक टूटा, निफ्टी 82 अंक लुढ़का

Sensex hits 3 week low, Nifty slips below 10600 on rupee woes

मुंबई। अधिकतर विदेशी बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के बीच अधिकतर समूहों में हुई बिकवाली के दबाव में बीएसई का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 179.47 अंक की गिरावट के साथ पांच जून के बाद के निचले स्तर 35,037.64 अंक पर और एनएसई का निफ्टी 82.30 अंक की गिरावट के साथ 10,589.10 अंक पर बंद हुआ।

कमजोर निवेश धारणा के बीच सेंसेक्स की शुरूआत गिरावट के साथ 25,207.19 अंक से हुई। कारोबार के दौरान यह 35,282.40 अंक के दिवस के उच्चतम स्तर तक पहुंचा।

कारोबार के उत्तरार्द्ध में भारतीय मुद्रा की गिरावट और डेरेवेटिक वायदा कारोबार के आखिरी दिन होने के कारण निवेशकों के बिकवाल बने रहने से यह 35,000 अंक के मनोवैज्ञानिक स्तर से लुढ़कता हुआ 34,937.15 अंक के दिवस के निचले स्तर तक गया।

आखिरकार यह गत दिवस की तुलना में 0.51 फीसदी कमजोर पड़कर 35,037.64 अंक पर बंद हुआ। सेंसेक्स की 10 कंपनियां हरे निशान में और शेष 20 लाल निशान में रहीं।

निफ्टी का ग्राफ भी सेंसेक्स की तरह रहा और यह गिरावट के साथ 10,660.80 अंक पर खुला। कारोबार के दौरान 10,674.20 अंके दिवस के उच्चतम और 10,557.70 अंक के दिवस के निचले स्तर से होता हुआ यह गत दिवस की तुलना में 0.77 प्रतिशत कमजोर पड़कर 10,589.10 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी की 36 कंपनियां गिरावट में और शेष 14 तेजी में रहीं।

विश्लेषकों के मुताबिक भारत कच्चे तेल की अपनी जरूरत का करीब 80 फीसदी आयात करता है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में आये उछाल से चालू खाता घाटा और व्यापार घाटा दोनों में तेजी आयेगी।

देश का व्यापार घाटा मई में चार माह के उच्चतम स्तर पर पहुंचा था और इसकी मुख्य वजह तेल आयात बिल में 50 फीसदी की बढोतरी थी। कच्चे तेल के दाम बढ़ने से परिवहन के साथ साथ मालढुलाई का व्यय बढ़ जाता है जिससे महंगाई बढ़ती है।

भारतीय मुद्रा भी इस बीच शुरूआती कारोबार में 69 रुपये प्रति डॉलर के अब तक निचले स्तर पर आ गयी और 10 साल के बांड के यील्ड में तेजी आयी है। कुल मिलाकर निवेशकों के लिये कारोबारी धारणा नकारात्मक रही है।

रिजर्व बैंक की द्विवार्षिक वित्तीय रिपोर्ट में बैंकिंग क्षेत्र को लेकर व्यक्त की गयी चिंताओं का असर भी बैंकिंग समूह के सूचकांक पर देखा गया है।

वैश्विक स्तर पर अमरीका की संरक्षणवादी नीति को लेकर निवेशक हतोत्साहित हैं और आयात शुल्क पर उसके सख्त रवैये के प्रति अमरीकी ऑटो कंपनियों ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है।

बीएसई में कुल 2,763 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ जिनमें 144 कंपनियों के शेयरों के भाव अपरिवर्तित रहे जबकि 1,821 में गिरावट और 798 में तेजी रही।

दिग्गज कंपनियों की अपेक्षा छोटी और मंझाेली कंपनियों को अधिक बिकवाल झेलनी पड़ी। बीएसई का मिडकैप 1.62 प्रतिशत यानी 250.14 अंक की गिरावट में 15,175.81 अंक पर और स्मॉलकैप 1.50 प्रतिशत यानी 239.82 अंक की गिरावट में 15,730.39 अंक पर बंद हुआ।