श्रम के सम्मान से ही पुनः स्थापित होगा भारत का स्वाभिमान : जेएम काशीपति

अजमेर। अंग्रेजों के भारत मे आने के समय भारत का सम्पूर्ण विश्व के निर्यात में लगभग 35 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। समाज जीवन के सभी क्षेत्रों में भारत पूर्णतया आत्मनिर्भर था प्रत्येक व्यक्ति के पास अपना कौशल और अपना काम था इसी के बल पर भारत सोने की चिड़िया और विश्वगुरु की स्थिति को प्राप्त हुआ था।

दुर्भाग्य से शिक्षा का तंत्र ऐसा बदलाया की शिक्षित व्यक्ति की नज़रों में छोटे-छोटे कौशल के प्रति दृष्टि बदलने लगी अपने परिवार के कार्य के प्रति हेय भावना भी उत्पन्न हुई। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 फिर एक बार समाज मे इन कौशलों और श्रम के प्रति सम्मान स्थापित करने वाली है वास्तव में समाज में श्रम का सम्मान पुनः स्थापित होगा तो भारत का खोया स्वाभिमान भी वापस लौटेगा।

यह विचार रविवार को शहीद अविनाश माहेश्वरी आदर्श विद्या निकेतन माध्यमिक विद्यालय में विद्या भारती अजमेर द्वारा आयोजित हस्तकला कारीगर अभिभावकों की बैठक में विद्या भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री जेएम काशीपति ने कही।

उन्होंने उपास्थित विद्या भारती अजमेर के हस्तकला कारीगर अभिभावकों से कहा कि हमारे आराध्य विश्वकर्मा देवताओं के कुशल कारीगर है। देवताओं की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति विश्वकर्मा ही करते थे उनका कार्य सबके हित के लिए था अपने ही पुत्र के असुर बन जाने पर उन्होंने तपस्या कर इन्द्र को वज्र बनाकर दिया जिससे इन्द्र ने उनके पुत्र वृत्तासुर का अन्त किया।

जिस प्रकार विश्वकर्मा का प्रत्येक कर्म लोककल्याण के लुए होता है वैसे ही हम सब अपने कौशल को लोककल्याण से भी जोड़े रखें। इसी भावना से 17 सितम्बर को प्रतिवर्ष विश्वकर्मा जयन्ती भी मनाई जाती है।

नई शिक्षा नीति में कक्षा छटी से कौशल विकास को विषय के रूप में जोड़ने के पीछे भी यही भावना रही है कि ऐसे हाथ से काम करने वाले करीगरों के प्रति सम्मान की भावना बालकों में बढ़े साथ ही नई पीढ़ी में भी यह कौशल भी विकसित हो सकें।

कार्यक्रम में हस्त कला में उपयोग आने वाले औझारो और साधनों का पूजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय संगठन मंत्री शिवप्रसाद, प्रान्त संगठनमंत्री गोविंद कुमार, प्रान्त सचिव किशनगोपाल कुमावत सहित अजमेर संकुल के सभी आचार्य दीदी भी उपस्थित रहें।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नेमी चन्द प्रजापत ने की। विद्या भारती संस्थान अजमेर के जिला सचिव राजेन्द्र सिंह ने परिचय कराया और कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के प्रधानाचार्य भगवान प्रसाद शर्मा ने किया।