शिरडी ट्रस्ट ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ खोला मोर्चा, साईं भक्त धर्मसंकट में

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हमारे देश में आस्था और राजनीति का खेल वर्षों पुराना रहा है । जब-जब आस्था राज्य सरकाराें या केंद्र सरकारों से टकराती हैं तब मंदिरों और भक्त धर्मसंकट में आ जाते हैं । अब देश में एक नया विवाद शुरू हो गया है । मामला महाराष्ट्र का है । अभी तक साईं के भक्त बाबा का जन्म स्थान शिरडी को मानते आए हैं । लेकिन पिछले दिनों महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने साईं बाबा के जन्म स्थान को शिरडी न बता कर पाथरी बताया और वहां के विकास कार्य के लिए करोड़ों रुपये देने की घोषणा कर डाली । मुख्यमंत्री ठाकरे की घोषणा शिरडी ट्रस्ट को नागवार गुजरी । बाद में शिरडी ट्रस्ट के लोगों ने उद्धव ठाकरे खिलाफ मोर्चा खोल दिया है । शिरडी के ट्रस्ट से जुड़े लोगों को लगता है अगर ऐसा हो गया तो हमारे मंदिर की कमाई पर असर पड़ेगा बाबा के भक्त भी बटेंगे । अब ट्रस्ट वालों ने शिरडी शहर को बंद करने का एलान कर दिया है । हालांकि साईं बाबा मंदिर खुला रहेगा, लेकिन बाबा के भक्त धर्म संकट में आ गए हैं ।

साईं बाबा के जन्मस्थान को लेकर छिड़ी है जंग

साईं बाबा के समर्थकों ने महाराष्ट्र सरकार के एक फैसले के खिलाफ जंग छेड़ दी है । मुद्दा साईं बाबा के जन्म स्थान को लेकर है और साईं समर्थक इसे आस्था का सवाल मानकर लड़ाई लड़ने को तैयार हो गए हैं । सवाल उठ रहे हैं कि क्या रोजाना शिरडी पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं को पिसना पड़ेगा या आस्था के आगे उद्धव सरकार को झुकना पड़ेगा । दरअसल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अपील के बावजूद शिरडी ग्राम सभा ने रविवार को बंद करने का फैसला किया है । सीएम की ओर से साई जन्मभूमि पाथरी शहर के लिए विकास निधि के ऐलान के बाद उठा विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है । मुख्यमंत्री के बयान से शिरडी के लोग नाराज हैं । आज से 19 शिरडी में अनिश्चकालीन बंद का एलान किया गया है । साईं भक्तों का आरोप है कि महाराष्ट्र सरकार आस्था से खिलवाड़ कर रही है ।

पाथरी के लोगों ने कहां, बाबा का जन्म यहीं हुआ था

इस विवाद के बाद पाथरी के लोग भी खुलकर मैदान में आ गए हैं । यहां के निवासियों ने कहा कि ‘साईं बाबा की जन्म स्थली पाथरी में होने के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं । शिरडी साईं की कर्मभूमि है और पाथरी जन्मभूमि । दोनों की अपनी-अपनी अहमियत है । शिरडी निवासी अपनी कमाई बंटने के डर से पाथरी का विरोध कर रहे हैं । यहां हम आपको बता दें कि आस्था के नाम पर छप्पर फाड़कर बरसती इसी दौलत का तकाजा है कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने साईं के खिलाफ धर्मयुद्ध छेड़ रखा था और उन्हें मुसलमान बताकर हिंदुओं को शिरडी से दूर रहने की नसीहत भी दे डाली थी, लेकिन आस्था तो आस्था है । एक बाार बन गई तो फिर टूटना आसान नहीं होता ।

दुनिया का अमीर धार्मिक ट्रस्ट है ‘साईंट्रस्ट’ सता रहा कमाई बंटने का डर

साईं भक्तों की आस्था के चलते साईं ट्रस्ट दुनिया के सबसे अमीर धार्मिक ट्रस्टों में से एक है । मंदिर के चारों ओर बसे कस्बों और गावों की अर्थव्यवस्था साईं के इर्द गिर्द ही घूमती है । अगर ट्रस्ट की बीते साल की रिकॉर्ड तोड़ कमाई पर नजर डालें तो 2019 में साई दरबार में 287 करोड़ का चढ़ावा आया । चढ़ावे में कैश के अलावा 19 किलो सोना और 392 किलो चांदी भी मिली । वहीं मंदिर में रोजाना आने वाला औसत चढ़ावा 80 लाख रुपए है । मंदिर ट्रस्ट के पास 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा का फिक्स्ड डिपॉजिट है । जाहिर है अगर पाथरी में साईं बाबा के जन्म स्थान के नाम पर मंदिर बन गया तो देश भर से आने वाले साईं भक्तों का एक हिस्सा उधर भी सिर झुकाने पहुंचेगा और शिरडी में बरसने वाली इस दौलत पर भी असर पड़ेगा ।

यह था पूरा मामला, जिसके बाद भड़का विवाद

साईं के जन्म स्थान को लेकर पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है, लेकिन बीती 9 जनवरी को मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने परभणी जिले के पाथरी को साईं के जन्म स्थान की हैसियत से विकसित करने के लिए 100 करोड़ के पैकेज का एलान कर दिया । इसके बाद से ही ये विवाद भड़क गया है । उद्धव से पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी पाथरी को लेकर ऐसा ही एलान किया था । 2018 में साईं समाधि शताब्दी समारोह का उद्घाटन करने पहुंचे राष्ट्रपति ने कहा था, ‘पाथरी साई बाबा का जन्म स्थान है । मैं पाथरी के विकास के लिए काम करूंगा ।

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार