चन्द्रवरदाई नगर व नाका मदार में सिन्धी बाल संस्कार शिविरों का समापन

अजमेर। सिन्धी  बाल संस्कार शिविर में सीखी गई सिन्धी भाषा व संस्कृति को जीवन में अपनाने का शिविरार्थी संकल्प करें जिससे मातृभाषा के प्रति लगाव और अपनायत बनी रहे। ये आशीर्वचन ईश्वर मनोहर उदासीन आश्रम अजयनगर के महंत स्वरूपदास ने भारतीय सिन्धु सभा व सिन्धी विकास समिति की ओर से चन्द्रवरदाई नगर में आयोजित सिन्धी बालसंस्कार शिविर के समापन अवसर दिए।

प्रेम प्रकाश आश्रम के सांई ओमलाल शास्त्री ने कहा कि भाषा का ज्ञान होने के साथ हमें अपनी संस्कृति, पहनावे व खानपान के जरिए भी पहचान बनाए रखनी है। राजस्थान धरोहर संरक्षण व प्रोन्नति प्राधिकरण के सदस्य कवंलप्रकाश किशनानी ने कहा कि भारतीय सिन्धु सभा की ओर से किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने ऐसे शिविरों की सफलता के लिए शिविर संचालकों तथा शिक्षकों को साधुवाद दिया।

किशनानी ने आगामी 16 जून को सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन बलिदान दिवस पर होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कार्यक्रम में सभी को भागीदारी बढाने का आव्हान किया ताकि युवा पीढी प्रेरणा ले सके।

कार्यक्रम में शिक्षकों द्वारा दिए गए सहयोग के लिए स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों द्वारा रंगारंग प्रस्तुति दी गई। शिविरार्थियों को सभा की ओर से प्रशस्ति प्रदान किए गए। समारोह में घनश्याम भगत, खेमचंद नारवाणी, नरेन्द्र सोनी, खूबचंद रमेश वलीरामाणी, चन्द्र गोकलाणी, शंकर सबनाणी सहित कार्यकर्ता उपस्थित थे।

इससे पहले कार्यक्रम का शुभारम्भ ईष्टदेव झूलेलाल, भारत माता, महाराजा दाहरसेन के चित्र पर माल्यार्पण कर तथा दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया। जिसमें सभा के प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी, संगठन मंत्री मोहन कोटवाणी, समिति सरंक्षक प्रकाश मूलचंदाणी, अध्यक्ष जगदीश भाटिया, महासचिव रमेश एच. लालवाणी, सचिव हरीश खेमाणी, गोर्वधनदास खिलनाणी, चन्द्र नावाणी उपस्थित थे। स्वागत भाषण रमेश लख्याणी व प्रवीण वाधवापणी व आभार सुन्दर लखवाणी ने किया। संचालन व्याख्याता भरत गोकलाणी ने किया।

झूलेलाल मन्दिर नाका मदार में शिविर का समापन

भारतीय सिन्धु सभा की ओर से झूलेलाल मंदिर नाका मदार में आयोजित सिन्धी बालसंस्कार शिविर का सोमवार को विधिवत समापन हुआ। संयोजक पुष्पा साधवाणी ने बताया कि इस मौके पर प्रेम प्रकाश आश्रम के सांई ओमलाल शास्त्री व निर्मलधाम झूला मौहल्ला के स्वामी आत्मदास, सुमेरपुर से आए ललित भारती गोस्वामी, पार्षद बीना टाक, सभा के संभाग प्रभारी नरेन्द्र बसराणी, गोर्वधन मोटवाणी, प्रदेश महामंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी, कंवलप्रकाश किशनानी का सान्निध्य मिला।

शिविरार्थियों ने शिविर में सीखे गई विधाओं तथा सिन्धी संस्कृति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी। सिन्धी भाषा के गीत व भजनों पर श्रोता झूम उठे। भगत घनश्याम के साथ भारती रामचंदाणी, हर्षा कलवाणी, लीला आसवाणी, भूमि कानाणी, रेखा तोलवाणी व कविता तोलवणी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम तैयार करवाया जिसमें बच्चो ने मां सरस्वती वंदना, सांई ओ सांई…, छल्लन जो जोडो…., जीए मुहिंजी सिन्ध…., ठार माता ठार….., असांजो देश आ प्यारो….को खूब सराहा गया। सभी शिविरार्थियों को प्रशस्ति पत्र व विजेताओं को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।