‘लाडी बाई का जौहर व राजकुमारी सूर्यकुमारी व परमाल का बलिदान सिन्ध का नारी शौर्य’

अजमेर। सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन के 1306वें बलिदान वर्ष के उपलक्ष में सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन स्मारक पर इतिहास संकलन समिति अजमेर के सहयोग से ‘सिन्ध का नारी शौर्य’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया।

संगोष्ठी में वक्ता सुमित्रा खेतावत, विनिता मण्डावरा, डॉ. एनके उपाध्याय ने सिन्धूपति महाराजा दाहरसेन की पत्नि लाडी बाई की ओर से युद्ध में दिखाए गए शौर्य और जौहर के साथ उनकी सुपुत्रियों सूर्यकुमारी, परमल के बलिदान पर चर्चा की गई।

इतिहास संकलन समिति के डॉ. उपाध्याय ने बताया कि वीर सेनानी दाहरसेन की वीर पत्नी लाडीबाई के पाास जब पति के बलिदान की हृदयद्रावक सूचना पहुंची तो क्षण भर ठिठक कर उन्होंने अपने अमर पति के पद का अनुसरण करने की निश्चय किया। वे राजनिवास से बाहर निकलीं और अपने सेना का नेतृत्व संभाल लिया।

सिन्धुसुता के अपूर्व रणकौल से शत्रुओं में हाहाकार मच गया। परन्तु कतिपय देश द्रोहियों और विश्वासघातियों के अरब सेना से मिल जाने के कारण वीरांगना लाडीबाई को युद्ध के परिणाम का आभास हो गया। अपने सतीत्व एंव पवित्रता की रक्षा के लिए उन्होंने सिन्धी ललनाओं के साथ हंसते-हंसते जौहर की ज्वाला में आत्महुति दे दी।

ज्वाला शिखा सी रानी का यह आत्मोसर्ग सिन्धु सांस्कृतिक दृष्टि को उजागर करता है। लाडी बाई का जोहर व राजकुमारी सूर्यकुमारी व परमाल का बलिदान सिन्ध का नारी शौर्य के रूप में देखा गया है।

हरीसुन्दर बालिका विद्यालय की व्याख्याता सुमित्रा खेतावत ने बताया कि सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन मातृ शक्ति के सम्मान के लिये हमेशा तत्पर रहते थे। सिन्धुपति महाराजा दहिर व रानी लाडीबाई के बलिदान के बाद महाराजा दहिर की वीर कन्याओं सूर्यकुमारी एवं परमाल ने महलों से निकलकर मुहम्म्द बिन कासिम के सैनिकों का सामना किया।

कुछ विश्वासघातियों की सहायता दोनों को कैद करके रस्सियों से बांधकर अनेक अरब सैनिकों की बलि लेने के बाद अन्नतः विदेशी आक्रमणकारी मुहम्मद बिन कासिम के समक्ष लाया गया। उसकी सुन्दरता से प्रभावित होकर मुहम्मद बिन कासिम ने सौगत के रूप में उन्हें खलीफा के पास भेजने का निश्चय किया।

राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रघुनाथपुरा की व्याख्याता विनिता मण्डावरा ने बताया कि सिन्ध में पहला जोहर रानी लाडी के रूप में हुआ था। दोनों पुत्रियां वीरता पूर्वक संघर्ष करते हुए अरब सैनिकों को धूल चटाते हुए अंत में अपने प्राण न्यौछावर कर दिये। इस तरह से नारी ने देश के लिये हमेशा अपना बलिदान दिया है।

मंच संचालन विनिता मण्डावर व महेश टेकचन्दानी ने किया और धन्यवाद मोहन तुलस्यिानी ने दिया। इस अवसर पर हरीसुन्दर बालिका स्कूल की जूही ने देशभक्ति गीत गाकर सभी को मंत्रमुग्ध किया।

इस अवसर पर राजस्थान धरोहर संरक्षण प्रोन्नती प्राधिकरण अध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत और नगर निगम उपमहापौर सम्पत सांखला, पूर्व विधायक हरीश झामनानी, कंवल प्रकाश किशनानी, लाजवन्ती आहुजा, गीता मटाई, दिशा प्रकाश किशनानी, प्रियंका किशनानी, सुषमा अभिचंदानी, पुनम जेनानी, भारती बेलानी, बीना तोतलानी, ज्योति मूरजानी, राजकुमारी मंगलानी, खेमचन्द नारवानी, नरेन्द्र सोनी, रमेश एच. लालवानी, खियल मंगलानी, कैलाश लखवानी, कमलेश शर्मा सहित कई कार्यकर्ता और सदस्य उपस्थित रहे।