सिरोही भाजपा को झटका, सिरोही मंडल अध्यक्ष ने दिया पद से इस्तीफ़ा, जानें वजह

Sirohi, bjp
Sirohi bjp mandal president suresh sagarvanshi

सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही भाजपा में पिछले 4 साल से सत्ता और संगठन द्वारा निचले स्तर के कार्यकर्तओं और पदाधिकारियों की अवहेलना और उत्पीड़न की परिणीति शनिवार को एकाएक सामने आ गयी। सिरोही भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरेश सगरवंशी ने जिलाध्यक्ष को अपना इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे में कारण स्पष्ट नहीं किया, लेकिन लंबे समय से जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को सत्ता और संगठन द्वारा सरकारी अफसरों के साथ मिलकर किये जा रहे उत्पीड़न को इसकी मुख्य वजह बताई जा रही है।

भाजपा जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चौधरी ने सबगुरु न्यूज को बताया कि सगरवंशी लंबे समय से घरेलू कारणों से समय नहीं दे पाने को लेकर नया ब्लॉक अध्यक्ष बनाने का कह रहे थे। मैने उन्हें कहा था कि ऐसी समस्या है तो लिखित में देवें। उन्होंने अपना इस्तीफा लिखित में दे दिया है। इसे जयपुर भिजवा दिया जाएगा। वहां से जो भी निर्णय होगा उस पर अमल किया जाएगा।

मंडल अध्यक्ष सगरवंशी ने बताया कि घरेलू और व्यावसायिक व्यस्तताओं के कारण पार्टी के पदाधिकारी के रूप में उतना समय नहीं दे पा रहा था जितना वाकई दिया जाना चाहिए। इसलिए एक कार्यकर्ता के रूप में काम करने का निर्णय करते हुए मंडल अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया है।
-केस के बाद पार्टी की अनदेखी से आहत थे सगरवंशी
सिरोही जिले में गत वर्ष अतिवृष्टि के बाद शहरवासियों को कालका तालाब का प्रदूषित पानी वितरित किया गया था। इसे लेकर सुरेश सगरवंशी भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ सिरोही पीएचईडी के एसई से मिलने गए थे। इस दौरान साधारण चर्चा ही हुई थी, लेकिन अधिकारियों ने सगरवंशी समेत भाजपा के कई पदधिकारियोन पर राजकार्य में बाधा का मुकदमा दर्ज करवा दिया।

पार्टी सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण को लेकर आशापुरा टेकरी पर हुई बैठक में जब प्रदेश स्तरीय एक पदाधिकारी को जब ये व्यथा बताई तो उन्होंने भी कार्यकर्ताओं का साथ देंव की बजाय ये कह दिया कि उन्हें जरूरत नहीं है पीडित भाजपाइयों की उनके पास दूसरे बहुत लोग हैं। बाद में इस प्रकरण को वापस लेने की भी बात हुई। लेकिन मंत्री एयर सिरोही विधायक ओटाराम देवासी ने भी कुछ नहीं किया।

इतना ही नहीं केस झेलने के बाद भी सिरोही को गंदा पानी पिलाने के मामले में शामिल एक भी अधिकारी को यहां से रवाना नहीं किया गया। इससे कई भाजपाइयों के आत्मसम्मान को चोट पहुंची। सुरेश सगरवंशी के इस्तीफे के पीछे पार्टी हल्के में यही वजह बताई जा रही है।