बसंत पंचमी पर ‘मां सरस्वती’ की आराधना की जाती है

Special on spring panchami

सबगुरु न्यूज। चारों और बसंत ऋतु छा गई है। खेतों में सरसों लहलहा रही है। उल्लास और उमंग का वातावरण छाया हुआ है। ये वातावरण आज बसंत पंचमी होने का अहसास करा रहा है। हिंदू शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी का बहुत ही धार्मिक महत्व है, जैसे मकर संक्रांति, माैनी अमावस्या को श्रद्धालु नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करते हैं, वैसे ही बसंत पंचमी में भी स्नान और दान  करने की पुरानी परंपरा रही है। हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन यानि पंचमी तिथि को बसंत पंचमी मनाई जाती है।

इस दिन मां सरस्वती की आराधना की जाती है। भारत के आलावा यह पर्व बांग्लादेश और नेपाल में भी बड़े उल्लास से मनाया जाता है। बसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पांचवें दिन भगवान विष्णु और कामदेव की पूजा की जाती है। इस वजह से इसे बसंत पंचमी कहते हैं। बसंत पंचमी को श्रीपंचमी और सरस्वती पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। बसंत पंचमी के दिन को देवी सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं।

इस बार बसंत पंचमी पर दो शुभ मुहूर्त बन रहे हैं

आज बसंत पंचमी इसलिए और खास है क्योंकि आज दो बहुत ही शुभ मुहूर्त का संयोग बन रहा है। इस दिन ‘सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग’ जैसे दो शुभ मुहूर्त का बन रहे हैं। सिद्धि और सर्वार्थसिद्धि योग को विद्यारंभ, यज्ञोपवीत, विवाह जैसे संस्कारों और अन्य शुभ कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। बसंत पंचमी पर सरस्वती की आराधना के साथ ही विवाह के शुभ मुहूर्त भी रहेंगे। इस बार बसंत पंचमी इसलिए भी श्रेष्ठ है क्योंकि सालों बाद ग्रह और नक्षत्रों की स्थिति इस दिन को और खास बना रही है। बसंत पंचमी के दिन 3 ग्रह खुद की ही राशि में रहेंगे। मंगल वृश्चिक में, बृहस्पति धनु में और शनि मकर राशि में रहेंगे। विवाह और अन्य शुभ कार्यों के लिए ये स्थिति बहुत ही शुभ मानी जाती है।

इस प्रकार करें पूजा-अर्चना

बसंत पंचमी के दिन स्नान करना भी बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिन भी पूजा अर्चना का विशेष महत्व है। प्रयागराज के संगम पर लाखों श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं और दान-पुण्य करते हैं। इस प्रकार करें पूजा, इस दिन पीले, बसंती या सफेद वस्त्र धारण करें। पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा की शुरुआत करें। मां सरस्वती को पीला वस्त्र बिछाकर उस पर स्थापित करें और रोली मौली, केसर, हल्दी, चावल, पीले फूल, पीली मिठाई, मिश्री, दही, हलवा आदि प्रसाद के रूप में उनके पास रखें।

मां सरस्वती को श्वेत चंदन और पीले तथा सफ़ेद पुष्प दाएं हाथ से अर्पण करें। केसर मिश्रित खीर अर्पित करना सर्वोत्तम होगा। मां सरस्वती के मूल मंत्र ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः का जाप हल्दी की माला से करना सर्वोत्तम होगा। काले, नीले कपड़ों का प्रयोग पूजन में भूलकर भी ना करें। शिक्षा की बाधा का योग है तो इस दिन विशेष पूजा करके उसको ठीक किया जा सकता है।

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार