भीलवाड़ा में कोरोना वायरस के प्रसार पर लगभग पाया काबू

भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा शहर में कोरोना वायरस के प्रसार को नियंत्रित करने में सफलता मिली है। चिकित्सा सूत्रों ने बताया कि आज लगातार चौथे दिन कोरोना का एक भी संक्रमित सामने नहीं आया है।

चिकित्सा विभाग की सुबह नौ बजे जारी रिपोर्ट में प्रदेश में पांच नए मामले सामने आए हैं, लेकिन भीलवाड़ा में गत चार अप्रेल के बाद एक भी कोरोना वायरस का मामला दर्ज नहीं हुआ है। भीलवाड़ा में गत 30 मार्च से तीन अप्रेल तक पांच दिनों में इसका एक भी मरीज सामने नहीं आया था मगर चार अप्रैल को रायला क्षेत्र से एक मामला सामने आया।

भीलवाड़ा में चार अप्रेल तक कुल 27 मामले सामने आए जिसमें 12 मरीजों को स्वस्थ होने पर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई जबकि इतने ही मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव से नेगेटिव आ चुकी है। अब केवल एक मरीज पाेजिटिव हैं और उसके भी शीघ्र स्वस्थ होने की उम्मीद की जा रही है। अब तक 2782 नमूनों की जांच की जांच की गई हैं।

भीलवाड़ा में जिस तरह के प्रयास करके इस महामारी पर नियंत्रण किया गया है, उससे वह देश में एक उदाहरण बन गया है। उसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि जिस तरह प्रदेश के पहले हॉटस्पॉट बने भीलवाड़ा में स्थिति को बेहतर ढंग से नियंत्रित किया गया है, उसी मॉडल पर काम करते हुए जयपुर, जोधपुर, कोटा, टोंक, चूरू, झुंझुनूं आदि स्थानों पर भी संक्रमण के प्रसार को रोकने के निर्देश दिए गए हैं।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि राज्य में कोरोना पॉजीटिव की बढ़ती तादाद को नियंत्रित करने और इसे समुदाय में फैलने से रोकने के लिए भीलवाड़ा में अपनाए गए तरीकों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार सुधार करके प्रदेश में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना से लड़ने के लिए राजस्थान ने योजनाबद्ध ढंग से काम किया है। यही कारण है कि ‘भीलवाड़ा मॉडल’ की देश भर में चर्चा हो रही है।

विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव रोहित कुमार सिंह ने बताया कि भीलवाड़ा में लाकडाउन की सख्ती से पालना, कर्फ्यू, महाकर्फ्यू एवं समय पर जिले की सीमाएं सील कर दी गईं। यह तरीका कारगर रहा और इससे संदिग्ध मरीजों की पहचान एवं परीक्षण के बाद अस्पताल में उन्हें भर्ती एवं क्वारंटाइन करके इस महामारी को फैलने से रोकने में सफलता मिली है।

सिंह ने बताया कि शहर में गत 19 मार्च को कोरोना वायरस का पहला मरीज सामने आने के बाद से ही सतर्कता एवं सख्ती बरती गयी और पहले जहां इसका मरीज सामने आने पर एक किलोमीटर में तथा बाद में 20 किलोमीटर में लाखों लोगों की स्क्रीनिंग की गई। भीलवाड़ा में गत 20 मार्च को कर्फ्यू लगाया गया तथा तीन अप्रेल को आगामी तेरह अप्रेल तक महाकर्फ्यू लागू कर दिया गया।

उन्होंने बताया कि खांसी आदि लक्षण वाले करीब 14 हजार लोगों पर नजर रखी और अब भी ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि जयपुर के रामगंज क्षेत्र में जनसंख्या ज्यादा होने से भीलवाड़ा से स्थिति अलग है, लेकिन उम्मीद है कि जनता का सहयोग मिलने पर इस पर शीघ्र काबू पा लिया जाएगा।

भीलवाड़ा के जिला कलक्टर राजेन्द्र भट्ट ने बताया कि भीलवाड़ा जिले की सीमा सील करके राजस्थान के तेरह एवं अन्य राज्यों के चार जिलों सहित सत्रह जिलों के लोगों को बाहर जाने से रोककर इस बीमारी को फैलने से रोका गया।

उन्होंने बताया कि हजार लोगों की टीम बनाकर शहर में सर्वे किया गया। इसी तरह गांवों में सर्वे किया गया। इसके बाद दूसरा एवं तीसरा सर्वे किया गया और इसके लक्षण दिखने पर टेस्ट कराए गए। उन्होंने कहा कि यह चिकित्सकों सहित स्वास्थ्यकर्मियों का जज्बा एवं मेहनत ही थी कि जिससे यह संभव हो पा रहा है।

उल्लेखनीय है कि भीलवाड़ा में गत 19 मार्च को कोरोनावायरस का पहला मरीज सामने आया और अगले दस दिनों में इसके मरीजों की संख्या बढ़कर 27 पहुंच गई तथा दो मरीजों की मौत हुई।