राज्यों की पॉलिटिक्स ने अपनों को ही बना दिया ‘प्रवासी’

States politics has made their own migrants
States politics has made their own migrants

सबगुरु न्यूज। कोरोना से जहां एक ओर पूरा देश जंग लड़ रहा है वहीं दूसरी ओर लाखों मजदूर और कामगार घर वापसी के लिए पिछले 1 माह से एक अलग जिंदगी बचाने के लिए जान की बाजी लगा रहे हैं। सड़कों पर हजारों की संख्या में मजदूर, महिलाएं, बच्चों की भूखे-प्यासे और नंगे पांव दौड़ती तस्वीर इतनी भयावह है कि देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया इस पर शर्मसार हो रही है । यही नहीं केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के समय पर इन मजदूरों को भेजने के इंतजाम न करने की वजह से कई मजदूरों ने हादसे में अपनी जान तक गंवा दी है, कई मजदूरों की मौत रेलगाड़ी से कुचलकर तो कईयों की ट्रक पलटने से हुई है।

लाखों की संख्या में ये कामगार अपने राज्यों में लौटने के लिए हजारों किलोमीटर का सफर पैदल ही करने पर मजबूर हैं। मुंबई, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, राजस्थान, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु आदि से लाखों की संख्या में पिछले कई दिनों से ये मजदूर अपने राज्य उत्तर प्रदेश, बिहार झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड लौट रहे हैं। इन कामगारों और मजदूरों पर पिछले कई दिनों से राज्यों और केंद्र सरकार के बीच जमकर घमासान छिड़ा हुआ है। यही नहीं कई राज्य तो ऐसे ही भी हैं जो अपने नागरिकों की वापसी के लेकर ही कतरा रहे हैं। सही मायने में इन मजदूरों को एक नया नाम दिया गया है वह है ‘प्रवासी’। अन्य राज्यों से आ रहे मजदूर सड़क पर चिलचिलाती गर्मी में राज्यों के मुख्यमंत्रियों की ओर दया भाव से देख रहे हैं कि कब इनकी राजनीति खत्म होगी और हम अपने घर पहुंच सकेंगे।

इस संकट काल में भी गरीब मजदूरों का कोई नहीं दे रहा है साथ

लाखों मजदूर अन्य राज्यों से सड़कों के सहारे भूखे प्यासे पैदल चले आ रहे हैं सबसे बड़ी देश की विडंबना यह है कि इन असहाय मजदूरों का कोई भी रंडी दल खुलकर साथ नहीं दे रहा है सभी एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में ही व्यस्त है।‌ केंद्र पर नजर दौड़ाएं तो वह बंगाल व महाराष्ट्र के साथ-साथ करीब-करीब हर उस प्रदेश के साथ तकरार वाली स्थिति में है जहां भाजपा की सरकारें नहीं है। कांग्रेस नेतृत्व विशेषतया सोनिया गांधी और राहुल गांधी के निशाने पर मोदी व मोदी सरकार है। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि संकट की इस घड़ी में भी राजनीतिक दल व उनके नेता राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हुए हैं। यह सिलसिला जिला स्तर से राज्य स्तर व केंद्र स्तर तक देखा जा सकता है।

पंजाब सरकार प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण का ठीकरा महाराष्ट्र पर फोड़ रही है। हरियाणा पंजाब को प्रवासी मजदूरों को हरियाणा भेजने के लिए कटघरे में खड़ा कर रहा है। महाराष्ट्र पंजाब सहित गुजरात को इसी तरह मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली इत्यादि एक-दूसरे पर आरोप लगाकर लॉकडाउन में हुई अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान हटाना चाह रहे हैं। इन कामगारों और मजदूर मजदूरों को लेकर उत्तर प्रदेश की सरकार और राजस्थान सरकार ने तो सारी हदें पार कर दी हैं। राजस्थान-यूपी बॉर्डर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जिसे देखकर सब हैरान है। दरअसल मजदूरों के प्रवेश को लेकर राजस्थान और उत्तर प्रदेश की पुलिस मथुरा सीमा पर आपस में भिड़ गए।

अपने ही नागरिकों को लेकर आपस में उलझी राज्य सरकारें

अपने ही राज्य के नागरिकों को लेकर कई राज्यों की सरकारें आपस में उलझी हुई हैं।‌ राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा उत्तर प्रदेश के बॉर्डर भरतपुर में बस भेजने पर उत्तर प्रदेश सरकार ने उन बसों को कई दिनों तक वहां खड़ा कर रखा और बाद में लौटा दिया गया। इस बीच मजदर कई दिनों तक उत्तर प्रदेश बॉर्डर पर भूखे प्यासे धूप में खड़े रहे। इसके बाद पश्चिम बंगाल में फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई।

केंद्र ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने ट्रेनें चलाने की मंजूरी नहीं दी है। जबकि ममता बनर्जी की सरकार ने कहा कि आठ ट्रेनों को मंजूरी दी है। अब बात करते हैं पंजाब और बिहार की। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि पंजाब से रोजाना 20 ट्रेनों के जरिये प्रवासी मजदूरों को बिहार व यूपी भेजा जा रहा है। अमरिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब से अभी और मजदूरों को भेजने के लिए ट्रेन की जरूरत है परंतु बिहार अपने यहां क्वॉरेंटाइन रखने के किए गए प्रबंधों के कम हो जाने की वजह से अपने मजदूरों को बिहार में रखने की इच्छा नहीं दिखा रहा है।

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार