सिरोही में 67 साल बाद हुआ वो हुआ जिसका इंतजार था

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सिरोही। सिरोही के पूर्णविलय के 67 साल बाद सिरोही में गांधी जयंती के मौके पर महात्मा गांधी की आदमकद मूर्ति लग गई। गांधी उद्यान में मुख्यमंत्री सलाहकार संयम लोढ़ा, सभापति महेंद्र मेवाड़ा की अध्यक्षता और कलेक्टर भंवरलाल व पुलिस अधीक्षक ममता गुप्ता के आतिथ्य में प्रतिमा का अनावरण हुआ।

इस दौरान लोढ़ा ने कहा कि ये उनका सौभाग्य है कि उन्हें ये अवसर मिल रहा है कि वे महात्मा गांधी की मूर्ति का अनावरण कर सके। उन्होंने कहा कि भले सिरोही शहर में 40 से 46 हजार लोग हों लेकिन, यहां उपस्थित लोग जागृत आत्माएं हैं जो इस सुअवसर का साक्षी बनने के लिए यहां आई। उन्होंने वहां मौजूद बच्चों की तरफ मुखातिब होते हुए कहा कि वे महात्मा गांधी को पढ़ें, उनको पढ़ने से मानसिक और आत्मिक रूप से मजबूती मिलेगी।

कार्यक्रम अध्यक्ष सभापति महेंद्र मेवाड़ा ने कहा कि महात्मा गांधी गरीबों और महिलाओं की दयनीय स्थिति देखते हुए बैरिस्टरी छोड़कर स्वतंत्रता आंदोलन में कूदे। वे चाहते तो बैरिस्टरी करके अपना एकाकी जीवन जी सकते थे।

कलेक्टर भंवरलाल ने कहा कि महात्मा गांधी की शहर में यह पहली मूर्ति है। उन्होंने कहा कि जिन आदर्शों पर महात्मा गांधी चले उनका अनुसरण करने के लिए खुद को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी कहते थे कि अगर आप अपने चारों तरफ कोई परिवर्तन लाना चाहते हैं तो वो परिवर्तन पहले अपने आप में करें। नगर परिषद आयुक्त अनिल झिंगोंनिया ने बताया कि इस मूर्ति की ऊंचाई 6 फीट और अष्टधातु की है जिसका वजन करीब 350 किलोग्राम है।

इस दौरान बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रतन बाफना ने सिरोही मेडिकल कॉलेज में मेडिकल के विद्यार्थियों के लिए देहदान करने की घोषणा की। कार्यक्रम के बाद सभी अतिथियों ने महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया।

‘मोर का नृत्य’ दिखाने के लिए एक्टिव टीम

कहावत है ‘जंगल में मोर नाचा किसने देखा’। अब इस कहावत को झुठलाने के लिए नेता हो या अधिकारी की खुद की अपनी पीआर टीमें सक्रिय कर ली है। ताकि वे ये दिखा सकें कि मोर ने नृत्य किया था।

कार्यक्रमों के आयोजनों के दौरान साहेब के जीवन के महत्वपूर्ण पल छूट नहीं जाए ये दिखाने के लिए नेताओं और अधिकारियों के ये पीआर मैन इतने ज्यादा एक्टिव रहते हैं कि धक्का मुक्की और फ्रेम बिगड़ने के कारण मीडिया को भी फोटो खींचने से परहेज करना पड़ जाता है। लेकिन, नेताओं और अधिकरियों के पीआर मैन से इतर एक डार्क जोन होता है जहां से मंच के साथ साथ उसके सामने पड़ी कुर्सियां भी फ्रेम में आ आ जाती हैं। तो जंगल में जिस मोर को नाचता हुआ नेताओं और अधिकारियों के सोशल मीडिया हेंडल नहीं दिखाना चाहते वो खाली कुर्सियॉँ ज्यादा चर्चा में आ जाते हैं।

वैसे महात्मा गांधी मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम में भी ऐसा दिखा। कार्यक्रम शुरू होने तक पीछे काफी कुर्सियां खाली रही। तभी मुख्य अतिथि को भी ‘जागृत आत्मा’ जैसे विशेषण का इस्तेमाल करना पड़ा गया। स्थिति ये थी कि नगर परिषद के कांग्रेस के 22 पार्षद भी हाथ हिलाते हुए बिना लोगों को लिए कार्यक्रम स्थल पर आते दिखे। जो लोग एकत्रित थे वो संयम लोढ़ा के नाम पर एकत्रित हुए, नगर परिषद के निर्वाचित पार्षदों का योगदान तो नगण्य था।

मूर्ति सिरोही की, चर्चा माउंट आबू की

माउंट आबू के उपखण्ड अधिकारी और आयुक्त के द्वारा महात्मा गांधी की मूर्ति के अवलोकन के दौरान हुए मोतियाबिंद की चर्चा इस मूर्ति के आवरण के पहले भी रही। अनावरण के पहले ही कई लोग ये बोलते हुए पर्दे के पीछे मूर्ति का चेहरा देखने को जाते थे कि कहीं इस मूर्ति का चेहरा भी तो माउंट आबू की कथित महात्मा गांधी की मूर्ति की तरह नहीं है। लेकिन, इसे देखकर उनके चेहरों पर उभरे संतुष्टि के भाव देखकर कहा जा सकता था कि मूर्तिकार के हुनर और सिरोही के अधिकारियों की आंखों के मोतियाबिंद मुक्त होने को लेकर उन्हें कोई शक नहीं हैं।

नाम नहीं होने पर रार

महात्मा गांधी की मूर्ति के अनावरण को लेकर भले ही हर्ष हो लेकिन, इस मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम के लिए छपे कार्ड और यहां लगे शिलापट्ट पर सभी पार्षदों के नाम नहीं होने को लेकर पार्षदों में नाखुशी दिखी। वैसे देखा जाए तो कार्ड पर निवेदक में नगर परिषद लिखा है। कानूनी रूप से परिषद में ही पार्षद समाहित होते हैं। अधिकारियों की ये दलील स्वाभाविक है। लेकिन, राजस्थान के कार्मिक विभाग के आदेशानुसार शिलापट्टों पर सम्बंधित संस्थानों के अधिकारियों का नाम लिखना भी अनुशासनहीनता माना गया है।

ऐसी नारेबाजी की हंस गए लोग

जिंदाबाद जिंदाबाद के नारे लगाने के आदि कार्यकर्ता कई बार हंसी के पात्र भी बन जाते हैं। महात्मा गांधी की मूर्ति अनावरण के दौरान भी ऐसा पल आया। सिरोही विधायक संयम लोढ़ा ने राजनीतिक कार्यकर्ताओं के विवेक पर पूरा भरोसा करते हुए बोला ‘महात्मा गांधी’ तो पीछे से राजनीति कार्यकर्ता बोल पड़े ‘जिंदाबाद’। ये सुनते ही कई लोगों के साथ खुद लोढ़ा भी हंस दिए। बाद में उन्होंने ‘महात्मा गांधी अमर रहें’ नारा बोला तो राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने शहीद महात्मा गांधी के लिए ‘जिंदाबाद’ की जगह ‘अमर रहे’ शब्द का इस्तेमाल किया।

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