सुप्रीमकोर्ट ने गुजरात राज्यसभा उपचुनाव को लेकर कांग्रेस की याचिका की खारिज

नई दिल्ली। गुजरात की दो राज्यसभा सीटों पर अलग-अलग उपचुनाव कराने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ कांग्रेस को मंगलवार को बड़ा झटका लगा। सुप्रीमकोर्ट ने कांग्रेस की तरफ से आयोग के निर्णय के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने से मंगलवार को इंकार कर दिया।

गुजरात कांग्रेस के नेता परेशभाई धनानी ने गुजरात से राज्यसभा की दो रिक्त सीटों पर अलग-अलग उपचुनाव कराने के चुनाव आयोग के निर्णय के खिलाफ यह याचिका दायर की थी।

यह दोनों सीटें भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के गुजरात के गांधीनगर और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के उत्तर प्रदेश के अमेठी से लोकसभा के लिए चुने जाने पर इस्तीफे के कारण रिक्त हुई थीं।

शीर्ष न्यायालय के न्यायाधीश संजीव खन्ना और बीआर गावी की अवकाशकालीन खंडपीठ ने आज कांग्रेस नेता की याचिका पर सुनवाई की। खंडपीठ ने गुजरात कांग्रेस की याचिका खारिज करते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से कहा कि वह इस संदर्भ में चुनाव आयोग के समक्ष याचिका दायर करें।

खंडपीठ ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया खत्म होने के बाद ही हम चुनाव याचिका के रुप में सुनवाई करेंगे, किंतु अभी इस पर सुनवाई नहीं की जा सकती।

शीर्ष अदालत से चुनाव आयोग ने कहा कि नियमित रिक्त सीटों को भरने के लिए एक साथ चुनाव होते हैं, किंतु आकस्मिक रिक्तियों को भरने के लिए एक साथ चुनाव कराने की कोई बाध्यता नहीं है।

शीर्ष अदालत ने कहा है कि चुनाव अधिसूचना जारी होने के बाद हम दखल नहीं दे सकते हैं। चुनौती देना है तो उपचुनाव संपन्न होने के बाद याचिका दाखिल कर सकते हैं।

निर्वाचन आयोग का कहना है कि शाह और ईरानी को राज्यसभा के लिए चुने जाने पर अलग-अलग दिन जीत का प्रमाण पत्र दिया गया था। इसलिए खाली सीटों पर एक दिन चुनाव कराए जाने का कोई मतलब नहीं है। आयोग ने नियमों के तहत ही दोनों रिक्त सीटों पर अलग-अलग तिथियों को उपचुनाव कराने की अधिसूचना जारी की थी।

सुप्रीमकोर्ट के निर्णय के बाद कांग्रेस के लिए मुश्किल हो सकती है। राज्यसभा के लिए चुनावी प्रक्रिया में प्रथम वरीयता के वोटों की गिनती होती है और यदि कोई मतदाता एक उम्मीदवार के पक्ष में प्रथम वरीयता का मत दे चुका है तो वह दूसरे उम्मीदवार को दोबार प्रथम वरीयता का मत नहीं दे सकता है।

गुजरात की राज्यसभा के लिए रिक्त दोनों सीटों पर यदि एक ही दिन उपचुनाव होता तो राज्य विधानसभा में भाजपा के विधायकों की संख्या को देखते हुए पार्टी का एक ही उम्मीदवार जीत पाता। अलग-अलग मतदान होने पर मतदान प्रथम वरीयता का वोट अलग-अलग दे सकेंगे और ऐसे में भाजपा दोनों सीटों पर जीत हासिल करने में सफल होगी।

गुजरात के राज्यसभा के इस उपचुनाव में एक उम्मीदवार को 61 वोट की जरुरत होगी। भाजपा विधायकों की संख्या सदन में 100 से अधिक है और ऐसे में अलग-अलग मतदान होने पर उसके विधायकों को दो बार प्रथम वरीयता के वोट डालने का मौका मिलेगा।

गुजरात विधानसभा में कुल 182 सीटों हैं। कांग्रेस के पास 75 और सात रिक्त हैं । एक दिन मतदान होता तो कांग्रेस अपने 71 विधायकों के बूते एक सीट निकाल ले जाती अब उसके लिए मुश्किल हो गई है।

चुनाव आयोग ने 15 जून को राज्य की दो सीटों पर पांच जुलाई को उपचुनाव के लिए मतदान कराये जाने का ऐलान किया था।

भाजपा ने नौकरशाह रहे एस जयशंकर और अन्य पिछड़ा वर्ग के नेता जुगलजी ठाकोर को अपना उम्मीदवार बनाया है। एस जयशंकर को नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में विदेश मंत्री बनाया गया है और उन्हें ने गत दिवस ही भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। दोनों सीटों पर उपचुनाव के लिए नामांकन भरने की आज अंतिम तिथि भी है।