तपती दोपहरी में रैली निकालकर बयां किया नौकरी छिनने का दर्द

अजमेर। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रेलवे से बर्खास्त किए गए करीब तीन सौ खलासियों ने तपती दोपहर में अजमेर कलेक्ट्रेट के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। 13 साल तक नौकरी पूरी कर लेने के बाद निकाले जाने से अब फाकाकासी को मजबूर पीडितों ने  रोजी रोटी मुहैया कराए जाने की मांग उठाई।

सुबह करीब दस बजे रेलवे स्टेशन से रैली के रूप में अपनी पत्नी और बच्चों समेत हाथों में तख्तियां थामे जब पीडित नारेबाजी करते हुए रवाना हुए तो रास्ते में हर निगाह उन्हें देख थम सी गई। माता पिता के साथ बच्चे भी सरकार को कोसते चल रहे थे। रैली कचहरी रोड, डीआएम आॅफिस, इंडिया मोटर्स चौराहा, पुराना लोक सेवा आयोग होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची।

कलेक्ट्रेट के बाहर रैली आम सभा में तब्दील हो गई। इस दौरान पीडितों ने रेलवे प्रशासन और रेल मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि सुप्रीमकोर्ट में झूठ का सहारा लेकर मोदी के राज में हमारी 13 साल पुरानी नौकरी छीन ली गई। उम्र के इस पडाव पर अब कुछ ओर करने लायक भी नहीं रहे। बच्चे बडे हो गए हैं, उनकी शिक्षा और शादी ब्याह आदि तक करने की स्थिति नहीं रही।

खासकर वे लोग अधिक मुश्किल में फंस गए हैं जिन्होंने नौकरी के भरोसे मकान या अन्य किसी काम से बैंक लोन उठाया हुआ है। बैंक किस्त नहीं चुका पाने से अब रहने की जगह छिनने का डर सताने लगा है। जब खाने को दाने दाने को मोहताज हो गए हैं तो बैंक की किस्त कहां से भरें।

उम्र के इस पडाव पर नौकरी खोने की पीडा उनके चेहरों पर झलक रही थी। उनका कहना था कि एक तरफ परिवार पालने का संकट और दूसरी तरफ बडे हो रहे बच्चों की जिम्मेदारी का बोझ, ऐसे में आय का कोई जरिया न होने से अब हम मुफलिसी में जीवन जीने को मजबूर हैं।