यह जगह है अर्धकाशी के नाम से मशहूर, 5000 साल से भी पुराना है इतिहास

This place is famous for the name of Ardhakashi, which is more than 5000 years old History This place is famous for the name of Ardhakashi, which is more than 5000 years old History

This place is famous for the name of Ardhakashi, which is more than 5000 years old History

सबगुरु न्यूज़| राजस्‍थान का माउंटआबू अर्धकाशी के नाम से मशहूर है| यहां भोलेनाथ के 100 से भी ज्‍यादा मंदिर हैं, जिनका इतिहास 5000 साल से भी पुराना है| इसे शिवालयों की नगरी भी कहते हैं|स्कंद पुराण के अनुसार भी माउंटआबू अर्धकाशी माना गया है| यहां अचलगढ़, वास्थान जी को मिलाकर 108 शिव मंदिर है| महाशिवरात्रि पर यहां जश्न का माहौल रहता है| माउंट आबू के ये 6 मंदिर, जिनका इतिहास 5000 साल से भी पुराना माना जाता है|

लीलाधारी महादेव मंदिर

लीलाधारी महादेव मंदिर भगवान शिव का स्वयंभू मंदिर माउंटआबू से 65 किलोमीटर दूर मंदार में स्थित है| ये मंदिर मंदार शिखर पर्वत पर ये मंदिर स्थित है| यहां भगवान शंकर यहां कई लीलाओं के रूप में वास करते हैं| यहां एक शिवलिंग जमीन पर स्थित है जो चट्टानों से बना है|

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सोमनाथ शिव मंदिर

सोमनाथ संत सरोवर का जिक्र शिव पुराण और स्कंद पुराण में भी है|  इस पौराणिक स्थल के बारे में ये मान्यता है कि यहां भगवान शंकर का वास है और भक्तों को उसके अनुभव भी होते हैं|

अर्बुद नीलकंठ मंदिर

अर्बुद नीलकंठ मंदिर भी माउंटआबू का एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है|  इस मंदिर को राजा नल और दमयंती ने बनवाया था|  भगवान शंकर का मंदिर और शिवलिंग नीलम के पत्थर से बना हुआ है|

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बालाराम महादेव मंदिर

माउंटआबू और राजस्थान की सीमा पर स्थित है| यहां भगवान शंकर वास्तविक स्वरूप में वास करते है| उनके साथ उनका गले में लिपटा सर्प भी वास करता है| भगवान शंकर की जटा से निकली हुई गंगा की धारा यहां भी बहती है| गंगा के पानी का स्रोत कहां से है ये अबतक एक रहस्य बना हुआ है| भगवान शंकर के ऊपर गोमुख से गंगा की अमृतधारा बहती है|

वास्थान जी

माउंटआबू से 65 किलोमीटर दूर वास्थानजी महादेव मंदिर आबूराज है| ये मंदिर 5,500 साल पुराना है| दुनिया का ये इकलौता मंदिर है, जहां भगवान विष्णु से पहले इस मंदिर में भगवान शंकर की पूजा होती है| आबूराज इसलिए कहा जाता है क्योंकि अर्बुद पर्वत अर्बुद सर्प पर टिका हुआ है| भगवान विष्णु और भगवान शंकर यहां एक साथ वास करते है|

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