देशविरोधी गतिविधियों में लिप्त तीन आरोपी एटीएस के हत्थे चढे

भोपाल। पड़ाेसी देश पाकिस्तान के ‘हैंडलर’ से संपर्क रखने और उनके निर्देशों पर फर्जी बैंक खातों के जरिए पैसों के लेनदेन करने के मामले में मध्यप्रदेश पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते ने सतना जिले से तीन आरोपियों को आज गिरफ्तार कर लिया।

प्रदेश पुलिस मुख्यालय के अनुसार सुनील सिंह, बलराम सिंह और शुभम मिश्रा को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि ये तीनों और उनके साथी पाकिस्तान के उन हैंडलरों के संपर्क में आकर काम कर रहे थे, जो भारत विरोधी कार्यों में पहले से ही लिप्त हैं।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि उसे खबर मिली थी कि सुनील सिंह और बलराम सिंह द्वारा पाकिस्तान के कई फोन नंबरों से संपर्क कर बड़ी धनराशि का लेनदेन किया जा रहा है। गहन जांच में पाया गया कि पाकिस्तान के इन नंबरों में वे नंबर भी शामिल हैं, जो वर्ष 2017 में पंजीबद्ध अपराध में भी सामने आए थे और उनके निर्देशों पर भारत की सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की जा रही थी।

जांच में पता चला कि सुनील सिंह, बलराम सिंह, शुभम मिश्रा और उनके साथियों ने इस प्रकरण में भी संगठित होकर उन्हीं पाकिस्तानी एजेंटों को बैंक एकाउंट तथा एटीएम कार्ड की जानकारियां तथा पैसा भेजा है, जो कि पहले भी योजनाबद्ध तरीके से सामरिक महत्व की जानकारियां एकत्रित कर रहे थे। तीनों ने पाकिस्तान के उन्हीं हैंडलरों के फिर से संपर्क में आकर काम किया, जो कि भारत के विरूद्ध पूर्व में काम कर रहे थे।

ये तीनों आरोपी पाकिस्तान के एजेंटों द्वारा जुटाई जा रही सामरिक जानकारी के एवज में दी जाने वाली धनराशि लोगों को झांसा देकर फर्जी बैंक खातों में प्राप्त कर रहे थे और इन एजेंटों के निर्देशों पर धनराशि को ठिकाने लगा रहे थे। इस आधार पर पुलिस को आशंका है कि इन हैंडलरों द्वारा एकत्रित जानकारी का उपयोग भारत के विरूद्ध किया जा रहा है। इस मामले में एटीएस ने भारतीय दंड विधान की धारा 123 के तहत अपराध दर्ज कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

इसके पहले वर्ष 2017 में राज्य पुलिस की एटीएस ने एक प्रकरण दर्ज कर बलराम और ध्रुव सक्सेना नाम के आरोपी समेत 15 लाेगों को गिरफ्तार किया था। यह सभी आरोपी पाकिस्तान के हैंडलरों के निर्देशों पर फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उनमें धनराशि प्राप्त कर उसे ठिकाने लगा रहे थे।

इस कार्य के लिए अवैध तरीके से टेलीफोन एक्सचेंट भी स्थापित किए गए थे और पाकिस्तानी हैंडलरों से इंटरनेट कॉलिंग के जरिए बातचीत होती थी। पाकिस्तान के हैंडलरों द्वारा एक सौ से भी अधिक फोन नंबरों से संपर्क किया जा रहा था।