आवंटित फंड नहीं मिलने से पार्षद को काम कराने में दिक्कत – मुकेश गोयल

आवंटित फंड नहीं मिलने से पार्षद को काम कराने में दिक्कत - मुकेश गोयल
आवंटित फंड नहीं मिलने से पार्षद को काम कराने में दिक्कत – मुकेश गोयल

नयी दिल्ली । उत्तरी दिल्ली नगर निगम में कांग्रेस के नेता मुकेश गोयल ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिल्ली को साफ सुथरा शहर बनाने के वादे को चुनावी जुमला बताते हुए कहा है पार्षदों को आवंटित कोष नहीं मिलने से विकास कार्य ठप्प पड़े हैं।

गोयल ने बुधवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि धन नहीं मिलने से विकास कार्य की किसी नयी योजना पर काम शुरु करना तो दूर मरम्मत और रखरखाव के कार्य करवा पाना मुश्किल हो रहा है।

निगम की स्थायी समिति के पूर्व अध्यक्ष गोयल ने कहा कि निगम पर सत्तारुढ भाजपा नेता विकास और सफाई की बड़ी बड़ी बातें करते हैं किंतु इनकी कथनी और करनी में बहुत अंतर है। केवल घोषणाएं की जाती हैं। उन्हें मूर्तरुप कैसे दिया जाय इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया जाता। आय बढ़ाने के लंबे.लंबे भाषणों के बावजूद निगम की आर्थिक स्थिति दिनों दिन जर्जर होती जा रही है।

निगम के पास फंड नहीं होने से कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं दिया जा रहा है। विभिन्न वार्डों में विकास के कार्य ठप्प पड़े हैं और काम नहीं होने से पार्षदों को जनता के कोपभाजन का शिकार होना पड़ता है। चालू वित्त वर्ष की एक तिमाही बीत जाने के बावजूद किसी पार्षद को अपने क्षेत्र में विकास कार्य कराने के लिए निगम की तरफ से योजना और गैर योजना मद से किसी भी लेखाशीर्ष में धनराशि मुहैया नहीं कराई गई है। निगम के स्टोरों में मरम्मत सामग्री और अन्य सामान तक उपलब्ध नहीं है।

गोयल ने कहा कि पिछले साल निगम चुनाव के समय भाजपा नेताओं ने जनता से बड़े बड़े वादे और दो माह के भीतर निगम की वित्तीय स्थिति मजबूत करने की बात कही थी किंतु 15 माह बीत जाने के बाद वित्तीय स्थिति में सुधार तो दूर की बात हालत और जर्जर हो गई है। चालू वित्त वर्ष के बजट में प्रत्येक पार्षद को पचास.पचास लाख रुपए देने का प्रावधान किया गया था किंतु अभी तक इस फंड के बारे में कुछ भी पता नहीं है।

उन्होंने कहा कि सदन और स्थायी समिति की बैठकों में बार.बार धनराशि नहीं मिलने और काम नहीं कर पाने से पार्षदों के जनता के गुस्से का शिकार होने का मुद्दा उठाया गया । ऐसा लगता है कि भाजपा नेताओं को जनता की दिक्कतों से कुछ लेना देना नहीं है और वह चुप्पी साधे हुए हैं। बारिश का मौसम शुरु हो गया है। सड़कों में बड़े बड़े गड्ढे हो गए हैं किंतु पैसा नहीं होने से पार्षद काम नहीं करा पा रहे हैं। जगह. जगह पानी भरने से डेंगू.मलेरिया और चिकनगुनिया के फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है।