अलगाव नहीं बदलाव चाहिए, सरकार नहीं मददगार चाहिए

bjp-cong-aapSabguru News: सरकार चाहे किसी की भी हो लोगो को चाहिए सुधार लेकिन सच तो यह है की चाहे कोई भी सरकार आई हो लेकिन यह चीजे कभी सुधरीं। जी हां हम बात कर रहे हैं भ्रष्टाचार और न्याय की। इन मुद्दों का मसला कभी नहीं सुलझ पाया। आज भी हर एक आम आदमी को भ्रष्टाचार का सामना करना ही पड़ता है चाहे वो पुलिस विभाग में हो या शिक्षा विभाग में अथवा यातायात, मेडिकल व लगभग सभी ऐसे काम जिनका एक आम आदमी की जरुरत होती ही है।

लेकिन इनमे कभी किसी प्रकार की स्थिरता नहीं आई। आज भी रिशवत का बोलबाला है और अब इसकी आदत इस कदर हो गई है जैसे यह एक प्रकार का अनिवार्य नियम हो। जब भी कोई काम में अडचन आती है हर एक व्यक्ति की जुबान से यही निकलता है की वजन रखो काम हो जाएगा।

आखिर इन सब के लिए कोई ऐसा कानून क्या नहीं आता जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है। यहां तो हालात ऐसे हैं की किसी का कोई गलत काम करते हुए सबूत भी वायरल हो जाए तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता, बल्कि इससे तो उसका और नाम बढ़ जाता है और कई दूसरों की हिम्मत भी।

पुलिस आज भी कोई एफआईआर बिना किसी दबाव के नहीं लिखती। किसी की चोरी हुई चीज़ दुबारा नहीं मिलती। हां अगर वो किसी बड़े आदमी की हो तो पुलिस पाताल से भी चोर को खोज निकलती है लेकिन आम आदमी की फाइल धूल में ही मिल जाती है। पुलिस में लोगों के लिए सम्मान नहीं डर और नफरत ज़्यदा है।

इसलिए लोग उनके सहयोग की बजाए दूर रहना पसंद करते हैं हर जगह ही यही स्थिति है। यह केवल एक विचार है, सरकार चाहे किसी की भी हो कोई भी हो लेकिन सरकार चलाने वाला सही होना चाहिए अन्यथा आम आदमी का धन व धर्म यूं ही जाता रहेगा और इंसानियत का नाम तो वैसे ही नहीं है जो बचे खुचे कुछ निशान है वो भी मिट जाएंगे।

“धर्म के नाम पर लड़ना छोड़कर अपनी सोच बदले और अपने हक़ और सच के लिए एक साथ खड़े हो ताकि लोकतंत्र सच में लोकतंत्र कहलाये ना की केवल कानून में।”