उद्धव ठाकरे सरकार ने औरंगाबाद, उस्मानाबाद के नाम बदले

मुंबई। महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उथल पुथल के बीच उद्धव ठाकरे नीत मंत्रिमंडल ने राज्य के मराठवाड़ा क्षेत्र के दो शहरों औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम क्रमशः संभाजी नगर और धाराशिव करने को बुधवार को मंजूरी दे दी।

राज्य मंत्रिमंडल ने विदर्भ विकास महामंडल, मराठवाड़ा विकास महामंडल और शेष महाराष्ट्र विकास महामंडल के पुनर्गठन का भी निर्णय लिया। मंत्रिमंडल ने सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (एसईबीसी) के उम्मीदवारों के लिए अधिकांश पद सृजित करने के लिए एक विधेयक पेश करने का भी निर्णय लिया, जो चुने गए लेकिन नियुक्त नहीं किए गए, क्योंकि मंत्रिमंडल की ओर से पारित मराठा आरक्षण रद्द कर दिया गया था।

मंत्रिमंडल के अन्य निर्णयों में हिंगोली जिले में राज्य के लिए हल्दी अनुसंधान एवं प्रसंस्करण नीति को लागू करना, अहमदनगर जिले के कर्जत में एक अदालत की स्थापना, एक नई अहमदनगर-बीड-परली वैजनाथ रेलवे लाइन परियोजना का पुनर्निर्माण तथा विशेष पिछड़ा वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले घरकुल योजना को लागू करना शामिल है।

राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी व कांग्रेस के अधिकांश और शिवसेना के कुछ मंत्री शामिल हुए। बैठक में शिवसेना के केवल उन मंत्रियों ने भाग लिया जो ठाकरे के साथ हैं।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बोलते हुए ठाकरे ने अपनी ही पार्टी के विधायकों द्वारा धोखा दिए जाने पर निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मुझे मेरी ही पार्टी के विधायकों ने धोखा दिया है। उन्होंने सहयोगी दलों, राकांपा और कांग्रेस को पिछले ढाई वर्षों के दौरान उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया।

गौरतलब है कि शिवसेना के संस्थापक स्व़ बाल ठाकरे ने कई साल पहले औरंगाबाद और उस्मानाबाद का नाम बदलने की मांग की थी।

उल्लेखनीय है कि राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे नीत महा विकास आघाड़ी की सरकार को गुरुवार को विधानसभा में शक्ति परक्षण कराने और बहुमत साबित करने का निर्देश दिया है।

भारतीय जनता पार्टी के नेता देवेंद्र फडनवीस के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार की रात राज्यपाल से मुलाकात की और बहुमत प्रदान करने के लिए एमवीए को तत्काल निर्देश देने की मांग की। इसके तुरंत बाद राजभवन द्वारा मंगलवार देर रात विधानसभा सचिव को इस आशय का तीन पन्नों का पत्र जारी किया गया।