देख रहा है ना बिनोद, कैसे व्यापक जनहित के बहाने सिरोही आयुक्त पेट्रोल पंप बनवा दिये!

सिरोही में निर्माणाधीन विवादित पेट्रोल पंप की साइट।

सिरोही। स्थानीय विधायक संयम लोढ़ा के महत्वाकांक्षी टाउन हॉल प्रोजेक्ट को कथित रूप से लटकाने वाले और शहर के जोनल प्लान पास नहीं करवाकर विधायक की साख को बट्टा लगाने वाले सिरोही नगर परिषद के आयुक्त ने जिस तरह से पेट्रोल पंप के लिए गली निकाल कर उसके कन्वर्जन का रास्ता साफ कर दिया वो पूरे प्रकरण में उनकी भूमिका को संदिग्ध बनाता है।

सिरोही के विवादित हो चुके पेट्रोल पंप को लेकर नगर विकास विभाग के सिरोही नगर परिषद आयुक्त के बीच हुआ पत्राचार से जो खुलासा हुआ है वो वाकई चौंकाने वाला है। फरवरी 2022 में सबगुरु न्यूज ने ( http://सिरोही में रिहायशी इलाके में पेट्रोल पम्प के लिए भू-उपयोग परिवर्तन! – https://www.sabguru.com/administration-violating-ngt-guideline-to-establish-new-petrol-pump-in-sirohi/ ) सबसे पहले जब इसका खुलासा किया था तो उस समय दस्तावेजों के अभाव में नगर पालिका प्रशासन ने इस पर गहरी आपत्ति जताई थी। बाद जब अन्य माध्यमों से इसकी पत्रावली निकलवाई तो पनिहारी गार्डन के सामने वाले नवस्वीकृत पेट्रोल पंप के कन्वर्जन में बड़ा गोलमाल सामने आया।

सिरोही में कथित विवादित पेट्रोल पंप की भूमि के कनवर्जन के लिए आहूत राज्य स्तरीय भू-उपयोग परिवर्तन समिति की बैठक का आंशिक विवरण।
सिरोही में कथित विवादित पेट्रोल पंप की भूमि के कनवर्जन के लिए आहूत राज्य स्तरीय भू-उपयोग परिवर्तन समिति की बैठक का आंशिक विवरण।

इस तरह निकाली कन्वर्जन की गली

पत्रावली के दस्तावेजों के अनुसार सेंट्रल को ऑपरेटिव बैंक के निकट जिस स्थान पर पेट्रोल पम्प बन रहा है, वो क्षेत्र सिरोही के 2031 के मास्टर प्लान में रिहायशी जोन में आती है। गुलाब कोठारी बनाम राजस्थान सरकार के प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट ने मास्टर प्लान का उल्लंघन करके कोई भी निर्माण की अनुमति देने पर रोक लगा दी थी। लेकिन, बाद में राजस्थान सरकार की अपील पर इसमे दो तरह से छूट मिली थी।

एक ये कि यदि व्यापक जनहित के मामला हो तो राज्य स्तरीय समिति कन्वर्जन कर सकती है। दूसरा जिस क्षेत्र का लेंड यूज चेंज करवाना है उस क्षेत्र का अलग से जोनल प्लान बनाया जाना चाहिए। इस प्रकरण में पहली गली का ही फायदा उठाया गया है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 9 सितंबर 2020 को प्रमुख शासन सचिव भास्कर के सावंत की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय भू उपयोग परिवर्तन समिति की 126वीं बैठक शाम 4 से साढ़े पांच बजे तक हुई। इस बैठक में सिरोही के तत्कालीन आयुक्त शिवपाल सिंह और तत्कालीन अधिशासी अभियंता महेंद्रसिंह भी वीसी के माध्यम से मौजूद थे।

मुख्य नगर नियोजक आर के विजयवर्गीय द्वारा 9 सितंबर 2020 की बैठक में लिए निर्णय के अनुसार जनहित में सिरोही में पेट्रोल पम्प के लिए भूमि।का भू उपयोग परिवर्तन करने के लिए 7 दिसम्बर 2021 को जारी पत्र।

इसी बैठक में एजेंडा संख्या 30/ 126 पर लिए गए निर्णय के अनुसार 7 दिसम्बर 2021 को मुख्य नगर नियोजक आर के विजयवर्गीय ने पत्र जारी करके इस 525 वर्ग मीटर भूमि का व्यापक जनहित में भू उपयोग परिवर्तन करने के निर्देश जारी किए।

दरअसल, गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार के मामले में व्यापक ‘जनहित’ में मिली ढील का फायदा उठाया। 126 बैठक की प्रोसिडिंग के अनुसार स्थानीय निकाय सिरोही के स्तर की बैठक में लिए निर्णय के अनुसार तत्कालीन आयुक्त ने 6 जुलाई 2020 इस प्रकरण को व्यापक जनहित के बताते हुए भूमि के भू उपयोग परिवर्तन की अभिशंसा की थी।

इसी आधार पर गुलाब कोठारी बनाम राज्य सरकार प्रकरण के बाद मिली छूट का फायदा उठा लिया। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि तत्कालीन आयुक्त, जो कि बैठक की प्रोसिडिंग के अनुसार शिवपाल सिंह थे, ने इस भूमि के रूपांतरण में व्यापक जनहित छिपे होने की जो दलील दी है वो इतनी हास्यास्पद है कि सिरोही का आम नागरिक पढ़ेगा तो उसे इस प्रकरण में भ्रष्टाचार की स्पष्ट बू आ जायेगी। इस सम्बंध में जनहित की दलील को जानने के लिए पिछले कई दिनों से पूर्व आयुक्त शिवपाल सिंह को फोन लगाया लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

इन्हीं अधिकरियो को पास करना था जोनल प्लान

अशोक गहलोत सरकार के स्वायत मंत्री शांति धारीवाल के अधीन स्वायत्त शासन विभाग में किस कदर अनियमितता व्याप्त है ये प्रकरण इसका उदाहरण है। सिरोही नगर परिषद आयुक्त से लेकर एसटीपी, सीटीपी, प्रमुख शासन सचिव और स्वायत्त शासन मंत्री की जिस पूरी कड़ी ने इस पेट्रोल पंप को व्यापक जनहित के बताकर गुलाब कोठारी बनाम राजस्थान सरकार के प्रकरण की गली का फायदा उठाया इसी पूरी कड़ी को सिरोही का जोनल प्लान भी पारित करने था।

उन लोगों ने इसे इसलिए अटकाया कि उससे सिरोही में आदर्श नगर मोड़ से डीटीओ ऑफिस तक, अनादरा चौराहे से बाहरी घाटे तक, कुम्हारवाड़ा, शाहजी की बाड़ी समेत रिहायशी इलाको में शामिल व्यावसायिक महत्व के इलाकों का कनवर्जन हो जाता और स्थानीय लोगों के रोजगार के रास्ते खुलते, लेकिन इन्हें लाभ नहीं होता।

इस कारण लंबे अर्से से जोनल प्लान अटका हुआ है जिसे जनहित मानते हुए पूर्व आयुक्त शिवपाल सिंह, उनके बाद के कार्यवाहक आयुक्त महेंद्रसिंह और वर्तमान आयुक्त अनिल झिंगोनिया इसे पारित नहीं करवा पाए। जिससे इन स्थानों पर लोग व्यवसाय के लिए निर्माण नहीं कर पा रहे हैं और कर भी रहे हैं तो नगर परिषद उन्हें तंग करने लगती है। कुल मिलाकर सिरोही के लोगों का हाल ये कर दिया है कि निजी हित नहीं होने पर अधिकारी सत्ता के चाबुक से मारेंगे भी और रोने भी नहीं देंगे।