यूनानी चिकित्सा पद्धति रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में कारगर : डॉ मोहम्मद रोशन

अजमेर। कोरोना महामारी काल में लगे लॉकडाउन के कारण घर में रहने की वजह से अधिकतर लोगों में तनाव की शिकायत भी आने लगी है। खासतौर पर वर्किंग लोगों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। बाहर न निकल पाना, नौकरी, स्कूल और बच्चों की पढ़ाई को लेकर लोग तनाव का शिकार हो रहे हैं।

कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग को सबसे अहम माना जाता है। इसके अलावा अगर शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी होगी तो बीमारियों से बचे रह सकते हैं बार-बार बीमार पड़ना कमजोर इम्यूनिटी की निशानी है। इसलिए जरूरी है कि घर में रहते हुए भी हम अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखें और बीमारियों से दूर रहें।

आयुष की यूनानी पद्धति में भी इम्यूनिटी को बढ़ाने की कई तरह के इलाज और नुस्खे मौजूद हैं। ऐसे में कुछ यूनानी नस्खों के सेवन से राहत मिल सकती है। इसे लेकर राजकीय यूनानी औषधालय जेएलएन अस्पताल के सीनियर यूनानी मेडिकल ऑफिसर डॉ मोहम्मद रोशन ने कुछ परामर्श दिए हैं:-

खमीरा:– इम्युनिटी बढ़ाने के लिए यूनानी चिकित्सा में खमीरा का इस्तेमाल बहुत खास है। यह किसी भी दवा दुकान पर मिल जाएगा। मोतियों का खमीरा या खमीरा मरवारीद की थोड़ी-सी मात्रा रोजाना दूध के साथ लेने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। दरअसल, खमीरे में ऐंटि-ऑक्सिडेंट और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने वाले तत्व पाए जाते हैं। इसके नियमित सेवन से मौसमी या पुराना बुखार खत्म हो जाता है। खमीरा खाने से दिल भी मजबूत होता है।

खमीरा का स्वाद मीठा होता है। इसे रोजाना सुबह खाली पेट खाना चाहिए और ऊपर में दूध पी लेना चाहिए। दूध की मात्रा 1 कप से एक गिलास (250ml) तक होनी चाहिए। दूध मीठा या फीका जैसा चाहें पी सकते हैं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए 2 ग्राम, 5-10 साल तक के बच्चों के लिए 3 ग्राम और 10 साल से ज्यादा की उम्र वालों के लिए 5 ग्राम खमीरा लेना काफी है।

खमीरा मरवारीद की गोलियां भी बाजार में उपलब्ध हैं। शुगर के मरीजों को ये गोलियां खाने की सलाह दी जाती है। ये गोलियां भी दूध (1 कप से 1 गिलास यानी 250ml) के साथ ली जाती हैं। 10 साल से कम उम्र है तो एक गोली का चौथा हिस्सा लें और 10 साल से ज्यादा के हैं तो 1 गोली काफी है।

खशखास :- दिमागी सुकून के लिए खशखास एक ग्राम, मुनक्का-पांच मुनक्का के बीज निकालकर पीस लें और दोनो की चटनी बना लें एक कप गुनगुने पानी से सेवन कर लें।

जहर मोहरा खताई :- ये एक तरह का पत्थर है जिसका पाउडर बनाकर दवा के रूप में यूनानी पद्धति में उपयोग किया जाता है। ये हृदय मस्तिष्क को ताकत देती है और पित्त का नाश करती है। बच्चों के लिए बेहद फायदेमंद है, ये बुखार में भी फायदा करती है और कई तरह के जहर को शरीर में खत्म कर देती है। एक ग्राम जहर मोहरा को एक चम्मच शहद में मिलाकर सुबह शाम गर्म पानी के साथ सेवन कर सकते हैं। वहीं 12 साल से कम उम्र के बच्चों को आधा ग्राम देना चाहिए।

तबाशीर कबूद :- ये एक नैचुरल कैल्शियम है जो बांस के पेड़ से मिलता है। ये खांसी और कफ में भी दिया जाता है, इसके अलावा अस्थमा के मरीजों को भी दिया जाता है। एक ग्राम तबाशीर को एक चम्मच शहद में मिलाकर सुबह शाम गर्म पानी के साथ सेवन कर सकते है। वहीं 12 साल से कम उम्र के बच्चों को आधा ग्राम देना चाहिए।

सत गिलोय :– ये रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है। इसके अलावा ये बुखार, मधुमेह और खून की कमी को भी दूर करता है। इसके नियमित इस्तेमाल से पाचन तंत्र सही रहता है और प्लेटलेट्स को भी बढ़ाता है। एक ग्राम सत गिलोय को एक चम्मच शहद में मिलाकर सुबह शाम गर्म पानी के साथ सेवन कर सकते हैं। वहीं 12 साल से कम उम्र के बच्चों को आधा ग्राम देना चाहिए।

यूनानी दवाओं का जोशांदा (काढ़ा) :– जोशांदा साम्रगी – बेहिदाना 3 ग्राम, उन्नाव 7 दाना, सपिस्तान 7 दाना, दालचीनी 3 ग्राम, बनफसा 5 ग्राम, बर्ज-ए-गोजाबान 7 ग्राम 1 लीटर पानी में डालकर उबालें, आधा रह जाने पर छान कर 20 मिली दिन में तीन बार पिएं।

नोट :– इन सभी जड़ी बूटियों का सेवन विशेषज्ञ चिकित्सक के परामर्श से ही लेना चाहिए।