गरीब, किसान और गांवों के लिए सौगात, वेतनभाेगी निराश, अमीरों पर कर बढ़ाया

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने बजट में गरीब, किसान तथा ग्रामीण क्षेत्र को सौगत दी है और सुस्त पड़ी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए घरेलू तथा विदेशी निवेश बढ़ाने का ऐलान किया है। उम्मीद के विपरीत मध्यम आयकरदाताओं को कोई राहत नहीं दी गई है जबकि अमीरों पर कर बढ़ाया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को संसद में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पेश किया। वर्ष 2019-20 के बजट में देश की विकास गति को फिर से पटरी पर लाने और 2025 तक पचास खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर ढांचागत निवेश और कल्याणकारी कार्यों के लिए संसाधन जुटाने के उद्देश्य से पेट्रोल और डीजल पर दो-दो रुपए प्रति लीटर कर बढ़ाया गया है।

शेयर बाजार को बजट रास नहीं आया और सेंसेक्स 0.99 प्रतिशत तथा निफ्टी 1.14 प्रतिशत टूटकर एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया।

बजट में गांव, गरीब, किसान के जीवन स्तर को ऊँचा उठाने के लिए कई ऐलान किए गए हैं जबकि मध्यम वर्ग के वेतनभोगियों को किसी प्रकार की रियायत नहीं मिलने से खासी निराशा हुई है। अलबत्ता अमीरों पर कर बढ़ाया गया है। दो करोड़ रुपए से ज्यादा और पांच करोड़ रुपए तक की आमदनी वालों के लिए अधिभार 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया गया है। इससे उन्हें तीन प्रतिशत ज्यादा कर देना होगा। पांच करोड़ रुपए से ज्यादा की कर योग्य आमदनी वालों के लिए अधिभार 15 से बढ़ाकर 37 प्रतिशत किया गया है। इससे उन्हें सात फीसदी ज्यादा कर देना होगा।

पैंतालिस लाख रुपये तक का मकान खरीदने वालों को आवास ऋण के ब्याज पर आयकर में दी जाने वाली छूट की सीमा भी बढ़ाई गई है। अगले साल 31 मार्च तक मकान खरीदने वालों को 1.5 लाख रुपए तक की अतिरिक्त आयकर छूट की घोषणा की गई है। इस तरह के मकानों के लिए दो लाख रुपए तक की आयकर छूट की व्यवस्था पहले से है जिसे बरकरार रखा गया है।

पेट्रोल और डीजल पर एक-एक रुपए प्रति लीटर का उत्पाद शुल्क बढ़ाने के साथ ही इतनी ही राशि का भार ढांचागत विकास की मद में बढ़ाने का ऐलान किया है। इससे दोनों ईंधनों की कीमत शनिवार से दो-दो रुपये प्रति लीटर बढ़ जाएगी। सोना-चांदी और अन्य बेशकीमती धातुओं, काजू, पुस्तकों, ऑप्टिकल फाइबर केबल पर आयात शुल्क बढ़ाने से ये उत्पाद भी महंगे होंगे।

एयरकंडीशन, लाउस्पीकर, वीडियो रिकॉर्डर, सीसीटीवी कैमरा, वाहन के हॉर्न, तंबाकू सिगरेट और मोबाइल के पाटर्स भी शुल्क बढ़ाने से महंगे होंगे। आयातित डिजिटल कैमरा, पूर्ण रूप से आयातित कार, साबुन बनाने के काम में आने वाला कच्चा माल, आयातित स्टैनलैस स्टील उत्पाद, न्यूजप्रिंट और मोबाइल फोन चार्जर आदि भी महंगे हो जाएंगे।

सीतारण ने अगले दशक के लिए 10 सूत्री विजन का ऐलान किया जसमें जनभागीदारी, प्रदूषण मुक्त भारत, अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र में डिजिटल इंडिया की पहुंच, बुनियादी तथा सामाजिक ढांचों का निर्माण, जल प्रबंधन और नदियों को स्वच्छ करना, आत्मनिर्भरता, मेक इन इंडिया, खाद्यान्न, दालों, तिलहनों, फलों एवं सब्जियों का निर्यात बढ़ाना और आयुष्मान भारत के जरिये स्वस्थ समाज का निर्माण शामिल हैं।

घरेलू स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए मध्यम और लघु तथा सूक्षम उद्योगों पर जोर के अलावा स्टार्टअप, रक्षा उपकरणों को देश में बनाना, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में मेक इन इंडिया की पहुंच को बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

सीतारमण ने कहा कि वर्ष 2014 में देश की अर्थव्यवस्था 15.8 खरब डॉलर की थी जो वर्ष 2019 में बढ़कर 27 खरब डॉलर की हो गई है और इसी वर्ष यह 30 खरब डॉलर की हो जाएगी। अगले कुछ वर्षाें में भारतीय अर्थव्यवस्था के 50 खरब डॉलर के बनने की उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि 55 वर्षाें में यह 10 खरब डॉलर पर पहुंची थी। पिछले कुछ वर्षाें में अर्थव्यवस्था के विकास में जबरदस्त तेजी आई है।

उन्होंने कहा कि 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंचने का लक्ष्य, बुनियादी ढ़ांचे में भारी निवेश, डिजिटल अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन ,नागरिकों की आशाओं, विश्वास और आकांक्षाओं से परिपूर्ण है। उन्होंने कहा कि गांव, गरीब और किसान इस सरकार की सभी योजनाओं के केन्द्र बिन्दु हैं और उन्हें ध्यान में रखते हुए की कार्ययोजनाएं बनाई जा रही है।

सीतारमण ने कहा कि भारत विदेशी सरकारी ऋण जीडीपी के पांच प्रतिशत से कम है। सरकार विदेशों से विदेशी मुद्रा में और ऋण जुटाने की संभावना तलाशेगी। उन्होंने कहा कि 2022 तक सभी को घर और हर घर को गैस तथा बिजली का कनेक्शन दिया जाएगा जबकि 2024 तक ‘हर घर जल’ का लक्ष्य हासिल किया जाएगा। स्वच्छ भारत अभियान के अगले चरण में हर गांव में ठोस कचरा प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी।

वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय दुगुना करने के लिए मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान बांस, शहद और खादी के 100 नए कलस्टर बनाए जाएंगे जिससे 50 हजार शिल्पकार आर्थिक रूप से सशक्त हो सकेंगे।

उन्होंने कहा कि कृषि आधारभूत सुविधाओं के विकास पर बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा तथा सहकारिता के माध्यम से डेयरी क्षेत्र का विकास किया जाएगा। उन्होंने दलहन की पैदावार में आत्मनिर्भरता के लिए किसानों की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें विश्वास है कि तिलहनों की पैदावार में भी ऐसी सफलता मिलेगी। किसानों की मेहनत से देश का आयात खर्च कम होगा।

सीतारमण ने कहा कि रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए वर्ष 2018 से 2030 के दौरान 50 लाख करोड़ रुपए निवेश करने की आवश्यकता होगी और इसके लिए सार्वजनिक निजी भागीदारी मॉडल को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि समाज सेवी संस्थान सेबी में पंजीकरण कराकर इक्विटी, डेट और म्युचुअल फंड के जरिये पूंजी जुटा सकेंगे और इनके लिए उन्होंने सोशल स्टॉक एक्सचेंज बनाने की भी घोषणा की।

उन्होंने कहा कि 400 करोड़ रुपए से अधिक का वार्षिक कारोबार करने वाली कंपनियों पर अब 25 प्रतिशत कार्पोरेट कर लगेगा। पहले यह सीमा 250 करोड़ रुपए तक के कारोबार वाली कंपनियों के लिए थी।

मीडिया, विमानन और बीमा में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने की भी सरकार की योजना है। नए उद्यमों तथा इनमें पूंजी लगाने वाले निवेशकों को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार ने कहा है कि स्टार्टअप और निवेशकों की आयकर जाँच नहीं करने की घोषणा की गई है।

सरकार ने रक्षा मंत्रालय के लिए आम बजट में तीन लाख 18 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है जो पिछले वर्ष की तुलना में 23 हजार करोड़ रुपए यानी करीब आठ फीसदी अधिक है।

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए एक वर्ष में एक करोड़ रुपए की नकद निकासी पर दो प्रतिशत टीडीएस का प्रस्ताव है। साथ ही अर्थव्यवस्था में नकदी का इस्तेमाल कम करने के लिए भीम, यूपीआई, आधार-पे, एनईएफटी और आरटीजीएस को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके साथ ही 50 करोड़ रुपए के वार्षिक कारोबार वाले कारोबारियों तथा ग्राहकों को अब इनके माध्यम से भुगतान करने पर कोई शुल्क या मर्चेेट डिस्काउंट दर (एमडीआर) नहीं देना पड़ेगा।