आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा पर संसद में हंगामा

Uproar in both Houses of Parliament over special status to Andhra Pradesh
Uproar in both Houses of Parliament over special status to Andhra Pradesh

नई दिल्ली। संसद में गुरुवार को आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा और राज्य को अन्य वित्तीय फायदे देने की मांग को लेकर तेलुगू देशम पार्टी और वाईएसआर कांग्रेस के सदस्यों ने अपना विरोध दर्ज कराया। लोकसभा में दोनों दलों के नेताओं ने अलग अलग विरोध प्रदर्शन किया और प्रश्नकाल के दौरान सदन को थोड़ी देर के लिए स्थगित करने को मजबूर कर दिया।

राज्यसभा में भी मुद्दे को लेकर शोरशराबा हुआ और सभापति एम वेंकैया नायडू के मुद्दे को सुलझाने के प्रयास विफल रहे। जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तेदेपा और युवजन श्रमिक राइथू कांग्रेस के सदस्य पोस्टर के साथ अध्यक्ष सुमित्रा महाजन के आसन के समीप इकठ्ठा हो गए और आंध्र प्रदेश के लिए ‘न्याय’ की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे।

अध्यक्ष ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपनी सीटों पर वापस चले जाएं, लेकिन प्रदर्शन और नारेबाजी जारी रही। प्रश्नकाल के बीच तेदेपा सांसद एन शिव प्रसाद ने लोकसभा महासचिव की मेज से कार्यवाही के नियमों की कुछ किताबें उठाईं और उनके साथ बाहर निकलने का प्रयास किया। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि वह अन्य लोगों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं।

अध्यक्ष के आसन के सामने बैठे लोकसभा सचिवालय के स्टाफ के संबंध में अध्यक्ष ने कहा कि यह आपके लिए काम कर रहे हैं, अगर इनके साथ कुछ भी होता है तो..यह सही नहीं है, कृपया इनसे दूरी बनाकर रखें।

प्रदर्शन कर रहे सदस्य महासचिव की मेज के पास खड़े होकर प्रदर्शन करते रहे। नाराज अध्यक्ष ने सदन को 15 मिनट के लिए स्थगित कर दिया। जैसे ही सदन दोबारा से शुरू हुआ, विरोध फिर से शुरू हो गया। शिव प्रसाद प्रदर्शन के दौरान झुनझुना बजाते नजर आए।

वित्त मंत्री अरुण जेटली जब बजट पर बहस पर जवाब देने आए तो अनंत कुमार ने सदस्यों से प्रदर्शन रोकने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री व तेदेपा नेता वाईएस चौधरी ने प्रदर्शनकारी सदस्यों से सरकार को थोड़ा समय देने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि अगर 15 दिनों में मुद्दे का समाधान नहीं होता है तो हम इस पर एक विशेष चर्चा करेंगे। तेदेपा सदस्यों ने हालांकि अपना विरोध जारी रखा। जैसे ही बहस शुरू हुई, दोनों दलों के सदस्य अध्यक्ष के आसन के समीप आकर खड़े हो गए लेकिन उन्होंने नारेबाजी बंद कर दी।

राज्यसभा में नजारा इससे अलग नहीं था। दोपहर 12 बजे के बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर तेदेपा सदस्यों ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम का मुद्दा उठाया और संकट के समाधान की मांग की। मुद्दे का समाधान निकालने के प्रयास में सभापति वेंकैया नायडू ने मंत्री चौधरी को आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा देने की मांग पर सुझाव देने की इजाजत दी।

इस पर चौधरी ने कहा कि अगर सरकार तैयार है तो विशेष दर्जा श्रेणी में कुछ मुद्दे हैं। मेरा सरकार से अनुरोध है कि क्या वह इस मुद्दे को 15 दिन में सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध हो सकती है। वित्त मंत्री को बजट पर चर्चा के अपने जवाब में इस मुद्दे पर संबोधित करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से मैं यह उल्लेख करना चाहता हूं कि पूरा सदन पूरी तरह से अवगत है कि आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम कितने अवैज्ञानिक और अनुचित रूप से पारित किया गया था, जिसके लिए दोनों राष्ट्रीय दल जिम्मेदार हैं।

उन्होंने कहा कि जब हम सहकारी संघवाद के बारे में बात कर रहे हैं, तो यह आंशिक रूप से सहकारी नहीं हो सकता। सदस्यों के लिए सम्मान होना चाहिए, संख्याओं के लिए नहीं। इसलिए इस मामले में पिछले साढ़े तीन साल से हमारी सरकार इस अधिनियम के बनने के दौरान अपनी द्वारा दी गई कुछ प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं कर सकी।

चौधरी ने सरकार से वचनबद्ध होने का अनुरोध किया कि वित्त मंत्री बजट चर्चा में इस मुद्दे का 15 दिनों के भीतर समाधान निकालेंगे और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री विजय गोयल यह सुनिश्चित करेंगे कि जेटली इस मुद्दे को हल करेंगे। लेकिन, वाईएसआर कांग्रेस समेत कुछ सदस्यों ने चौधरी के इस बयान पर आपत्ति जताई।

वाईएसआरसीपी सदस्य विजयसाई रेड्डी ने कहा कि तेदेपा, भाजपा की सहयोगी है और सरकार का हिस्सा है जिसने राष्ट्रपति के अभिभाषण को मंजूरी दी है। कैसे एक मंत्री तब और अब में बदल सकता है।

सभापति ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि मंत्री ने समाधान निकालने के लिए सुझाव दिया है। लेकिन, प्रदर्शनकारी सदस्य खड़े हो गए और उन्होंने अपना विरोध जारी रखा। नायडू ने अपरान्ह दो बजे तक सदन को स्थगित कर दिया और कहा कि अप लोग समाधान नहीं चाहते हैं। मैं सदन को स्थगित कर रहा हूं।

सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का घटक दल तेदेपा आंध्र प्रदेश के लिए विशेष पैकेज की मांग कर रहा है। पार्टी सदस्यों ने इस मामले में केंद्र सरकार पर अपना वादा नहीं निभाने को लेकर निशाना साधा और कहा कि वह अपना गठबंधन धर्म नहीं निभा रही है।