उत्तर प्रदेश चुनाव : तीसरे चरण में शाम 5 बजे तक 57.58 प्रतिशत मतदान

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में तीसरे चरण के लिये रविवार को 16 जिलों की 59 सीटों पर हो रहे चुनाव के दौरान सायं पांच बजे तक औसतन 57.58 प्रतिशत मतदान हुआ।

चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार ललितुपर जिले में अब तक सबसे ज्यादा 67.38 फीसदी लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया जबकि कानपुर नगर मेे सबसे कम 50.76 प्रतिशत लोग ही शाम पांच बजे तक वोट डालने के लिए निकले।

इसके अलावा एटा जिले में 63़ 58 फीसदी, मैनपुरी में 60.80 प्रतिशत, महोबा जिले में औसत मतदान 62.02 प्रतिशत मतदान हुआ। वहीं, फिरोजाबाद में 57.41 प्रतिशत, कासगंज में 59.11 प्रतिशत, हमीरपुर में 57.90 प्रतिशत, इटावा में 58.35 प्रतिशत, कन्नौज में 60़ 28 फीसदी और हाथरस में 59 प्रतिशत मतदान हुआ।

झांसी में 57.71 फीसद लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, जबकि औरेया में यह प्रतिशत 57.55 रहा। कानुपर देहात में 58.48 प्रतिशत, जालौन में 53.84 प्रतिशत, फर्रुखाबाद जिले में 54.55 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।  इस चरण में शाम छह बजे तक होने वाले मतदान में 2.16 करोड़ मतदाता 627 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला ईवीएम में कैद कर देंगे।

आयोग की ओर से बताया गया कि तीसरे चरण में बृज क्षेत्र के पांच जिलों फिरोजाबाद, हाथरस, मैनपुरी, एटा और कासगंज की 19, अवध क्षेत्र के कानपुर, कानपुर देहात, औरैया, फर्रुखाबाद, कन्नौज और इटावा जिले की 27 तथा बुंदेलखंड के पांच जिलों झांसी, जालौन, ललितपुर, महोबा और हमीरपुर की 13 सीटों पर सुबत सात बजे मतदान शुरु हो गया। इस चरण में 15,557 मतदान केन्द्रों के 25,794 मतदेय स्थलों पर मतदान हो रहा है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक मतदान शुरु होने के समय कुछ एक मतदान केन्द्रों पर इक्का दुक्का मतदाता पहुंचे। सर्द सुबह में शुरु हुए मतदान के बीच मतदाताओं को धूप निकलने का इंतजार है। कोविड प्रोटोकॉल के तहत मतदाताओं को मास्क पहन कर ही मतदान केन्द्र में अंदर जाने की इजाजत है। इसके अलावा चुनाव आयोग ने सेनेटाइजर और थर्मल स्केनिंग सहित अन्य इंतजाम भी मतदान केन्द्रों पर किये हैं।

तीसरे चरण में 13 विधान सभा क्षेत्रों कन्नाैज, शिकोहाबाद, फिरोजाबाद, मैनपुरी, भोगांव, किशनी, कहरल, अलीगंज, सादाबाद, आर्यनगर, सीसामऊ, किदवई नगर और कानपुर कैंट को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इनके 887 इलाकों के 5401 अतिसंवेदनशील मतदेय स्थलों पर सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किये गये हैं।

इस चरण में समाजवादी पार्टी (सपा) अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रतिष्ठा दांव पर है। अखिलेश मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में है। उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी एवं केन्द्रीय राज्य मंत्री एसपी सिंह बघेल से है। इसी जिले की भोगांव सीट पर योगी सरकार में आबकारी मंत्री रामनरेश अग्निहोत्री और कानपुर जिले की महाराजगंज सीट पर औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना भी किस्मत आजमा रहे हैं।

मतदान पर पैनी निगाह रखने के लिये आयोग ने 52 सामान्य प्रेक्षक,16 पुलिस प्रेक्षक तथा 19 व्यय प्रेक्षक तैनात किये हैं। इसके अलावा 2235 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 273 जोनल मजिस्ट्रेट, 832 स्टैटिक मजिस्ट्रेट तथा 3069 माइक्रो ऑब्जर्वर भी तैनात किये गये हैं।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में तीसरे चरण की 59 में से 49 सीटों पर भाजपा ने कब्जा जमाया था, जबकि मात्र नौ सीटें सपा और एक सीट पर कांग्रेस जीत सकी थी। बहुजन समाज पार्टी का इस इलाके में खाता भी नहीं खुल सका था। अपने वजूद की लड़ाई लड़ रहे विपक्षी दलों को इस चुनाव में तीसरे चरण वाली सीटों पर खोई जमीन वापस पाने की उम्मीद है वहीं, भाजपा किसी भी कीमत पर इस इलाके में खुद को कमजोर नहीं पड़ने देने की भरपूर कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि पहले दो चरण के चुनाव में 20 जिलों की 113 सीटों पर मतदान हो चुका है। इसमें 10 फरवरी को 11 जिलों की 58 सीटों पर और 14 फरवरी को नौ जिलों की 55 सीटों पर मतदान हुआ था।

चर्चित चेहरों वाली अन्य प्रमुख सीटों में सादाबाद,जसवंतनगर,फर्रुखाबाद और कन्नौज सीट शामिल है। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के भाई शिवपाल सिंह यादव इटावा की जसवंतनगर सीट से सपा के चुनाव चिन्ह पर मैदान में हैं जबकि मुलायम के समधी हरिओम यादव भाजपा के टिकट पर सिरसागंज सीट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

बसपा के ब्राह्मण चेहरा रहे रामवीर उपाध्याय इस बार सादाबाद से भाजपा के उम्मीदवार हैं। हाल ही में भारतीय पुलिस सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले कानपुर के पुलिस आयुक्त रहे असीम अरुण कन्नौज (सु) सीट से भाजपा के प्रत्याशी हैं। पूर्व मंत्री सलमान खुर्शीद की पत्नी लुइस खुर्शीद फर्रुखाबाद सीट से कांग्रेस प्रत्याशी हैं।

कांग्रेस ने 2017 में कानपुर की किदवईनगर सीट पर अजय कपूर और गोविंदनगर सीट पर करिश्मा ठाकुर की बहुत कम मतों से हार के कारण एक बार फिर इस चुनाव में दोनों को उम्मीदवार बनाया है। इस चरण के मतदान वाली 59 सीटों में से लगभग दो दर्जन सीटों पर दलित मतदाता और इतनी ही सीटों पर पिछड़ी जातियाें का बाहुल्य हार जीत का फैसला करता है।