राज्यसभा चुनाव में यूपी से भारतीय जनता पार्टी के नौ उम्मीदवारों की जीत

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लखनऊ. भाजपा ने एक बार फिर जीत कर दिखा दिया की उनके लिए कुछ मुशकिल नहीं है, उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की दस सीटों के लिए हुए चुनाव में केन्द्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली समेत भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के सभी नौ उम्मीदवार आज निर्वाचित घोषित किये गये।

समाजवादी पार्टी(सपा) उम्मीदवार जया बच्चन भी चुनाव जीत गयी हैं लेकिन बहुजन समाज पार्टी(बसपा) को करारा झटका लगा है। सपा, कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के समर्थन के बावजूद बसपा के भीमराव अम्बेडकर भाजपा के नौवें उम्मीदवार अनिल अग्रवाल से पराजित हो गये।

भाजपा के अनिल जैन, डा0 अशोक बाजपेयी, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, विजयपाल सिंह तोमर, जीवीएल नरसिम्हा और हरनाथ सिंह यादव भी चुनाव जीतने में कामयाब हो गये हैं।

मतगणना शुरु होने से पहले बसपा और सपा ने क्रास वोटिंग को लेकर अापत्तियां दाखिल की थीं। इनकी आपत्तियों को संज्ञान लेते हुए चुनाव आयोग ने उसपर मंथन किया। इनकी आपत्तियों को खारिज किया। इसकी वजह से मतगणना दो घण्टे देर से सात बजे के बाद शुरु हो सकी।

क्रास वोटिंग के मध्य 400 विधायकों ने वोट डाले

क्रास-वोटिंग के मध्य विधान भवन के तिलक सभागार में कुल 11 प्रत्याशियों के लिए 400 विधायकों ने अपने मत का प्रयोग किया। सुबह नौ बजे शुरू हुआ मतदान निर्धारित समय चार बजे से लगभग एक घंटा पूर्व तीन बजे ही समाप्त हो गया। तीन वोट नहीं पड़े। इनमें दो विधायक सपा के हरिओम यादव और बसपा के मुख्तार अंसारी, जेल में बंद होने के कारण मतदान नहीं कर सकें। बिजनौर जिले की नूरपुर सीट, विधायक लोकेंद्र सिंह की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने के कारण रिक्त है। सुबह नौ बजे से पहले ही वोट डालने के लिए विधायकों का विधान भवन में पहुंचना शुरू हो गया था।

बसपा विधायक महाराजजी के साथ

कांग्रेस और बसपा के विधायक एक साथ मतदान करने पहुंचे। कांग्रेस के कुल सात व बसपा के कुल 18 में से 17 विधायकों ने एक साथ पहुंच कर अलग अलग गुट में वोट डाले। सपा के शिवपाल यादव और राष्ट्रीय लोकदल के सहेंद्र रमाला दस बजे से पहले वोट डालने वालों में शामिल थे। सबकी निगाहें क्रास वोटिंग पर लगी थी। बसपा के बागी विधायक अनिल सिंह, भाजपा के प्रकाश द्विवेदी व निषाद पार्टी विजय मिश्र के साथ वोट डालने के लिए पहुंचे। उन्नाव जिले के पुरवा क्षेत्र से विधायक अनिल सिंह ने गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित भोज में पहुंच कर अपनी निष्ठा बदलने का संकेत दे दिया था। अनिल बसपा द्वारा आयोजित नाश्ते में भी नहीं गए। किसे वोट देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि अंतरात्मा की आवाज पर मतदान किया और वह महाराज जी यानी मुख्यमंत्री योगी के साथ हैं।