BSP उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचाने के लिए जबरदस्त दवाब में SP

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी से मिले समर्थन के बूते लोकसभा उपचुनाव में विजय पताका लहराने वाली समाजवादी पार्टी को अब उपहार के तौर पर राज्यसभा में बसपा प्रत्याशी बीआर अंबेडकर को भेजने का जबरदस्त दवाब है। उच्च सदन की दस सीटों के लिए 11 उम्मीदवारों के ताल ठोकने से सपा के लिये यह चुनाव अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा।

दरअसल, भाजपा ने एक खास रणनीति के तहत 10 सीटों के लिए 11 उम्मीदवारों को पर्चे भरने को कहा था। नाम वापस लेने के आखिरी दिन गुरुवार को भाजपा के विद्या सागर सोनकर और सलिल विश्नाई ने अपने नाम वापस ले लिए जिसके बाद भाजपा के नौ उम्मीदवार मैदान में डटे हैं जबकि सपा और बसपा का एक-एक प्रत्याशी चुनावी रणक्षेत्र में जमा है।

संख्या बल के लिहाज से भाजपा का आठ सीटों पर और सपा का एक सीट पर जीत पक्की है मगर भाजपा के दसवीं सीट पर दावा ठाेकने से 23 मार्च को मतदान लगभग तय हो चुका है। सपा और कांग्रेस बसपा प्रत्याशी को समर्थन का एलान पहले ही कर चुके हैं, लेकिन मतदान की सूरत में भाजपा इस सीट को निकालने के लिए पूरा दमखम लगाएगी। हालांकि पार्टी व्हिप का उल्लघंन करने वाले सदस्यों काे अयोग्य ठहराया जा सकता है।

फूलपुर और गोरखपुर संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में जीत का जश्न मना रही सपा को चिंता है कि बसपा प्रमुख मायावती को रिटर्न गिफ्ट के तौर पर उनकी पार्टी के प्रत्याशी की राज्यसभा के लिये राह कैसे आसान की जा सकती है।

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनावी नतीजे आने के बाद बुधवार शाम मायावती से मुलाकात की थी और बसपा उम्मीदवार को राज्यसभा चुनाव में समर्थन का भरोसा दिया था। बाद में पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों की एक बैठक में यादव ने कहा था कि बसपा ने उप चुनाव में हमारा समर्थन किया जिसकी बदौलत हम जीत सके। अब हमारा कर्तव्य है कि राज्यसभा चुनाव में हमारे विधायक बसपा उम्मीदवार के पक्ष में वोट करें ताकि वह राज्यसभा जा सके।

सपा विधायकों की इस बैठक में पार्टी के 47 में से करीब 40 विधायक मौजूद थे। बैठक में हालांकि नरेश अग्रवाल के पुत्र नितिन अग्रवाल, शिवपाल सिंह यादव, संजय गर्ग समेत कुछ अन्य विधायक उपस्थित नहीं थे।

बाद में यादव मायावती के आवास गए और उन्हें समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। इस मौके पर बसपा सुप्रीमों ने उनके उम्मीदवार को राज्यसभा में समर्थन का वादा याद कराया। दोनों नेताओं के बीच राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति पर चर्चा हुई।

भाजपा की ओर से केन्द्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली समेत आठ उम्मीदवारों ने सोमवार को पर्चे भरे थे हालांकि नामाकंन के आखिरी दिन गाजियाबाद के व्यवसायी अनिल अग्रवाल ने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर नामाकंन कर मुकाबला दिलचस्प बना दिया। भाजपा के अन्य उम्मीदवारों में अशोक बाजपेयी, सकलदीप राजभर, कांता कर्दम, विजय पाल सिंह तोमर, डॉ अनिल जैन, जीवीएल नरसिंहराव और हरनाथ सिंह यादव शामिल है।

सपा की ओर से एकमात्र उम्मीदवार जया बच्चन है जबकि बसपा केबीआर अंबेडकर राज्यसभा के लिए चुनाव मैदान में है। विधानसभा में संख्या बल की गणित के लिहाज से भाजपा 324 वोटों के साथ आसानी से आठ सीटों को अपने पक्ष में कर लेगी जबकि सपा को एक सीट मिलना तय है।

अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो दसवीं सीट पर विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार जीतना तय है। हालांकि भाजपा के इस सीट पर दांव खेलने से विपक्ष की एकता को कडी कसौटी से गुजरना होगा।