कोरोना वायरस के खौफ के बीच वसंतीय नवरात्रा

सबगुरु न्यूज। वर्तमान में कोराना वायरस के संक्रमण से विश्व में सर्वत्र महामारी फैली हुई है तथा भारत देश में भी इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जा चुका है। जानलेवा बीमारी से बचने का एक ही उपाय है कि लोगों से दूरी बनाए रखें, डरें नहीं बस सावधानी बरतें तथा सरकार के निर्देशों की पालना करें ताकि इस कोरोना वायरस की महामारी से बचा जा सके।

धार्मिक आस्था और विश्वास वाले व्यक्तियों के लिए यह समय शरीर की आन्तरिक ऊर्जा बढाकर शक्ति की साधना एकांत में तथा संयमित खानपान, सादे रहन सहन तथा शुद्धता के साथ घर में बैठकर की जानी चाहिए। भले ही किसी भी तरह की पूजा सामग्री नहीं हो तब भी कोई बात नहीं केवल अपनी आखों में शक्ति का ध्यान करें और मन मंदिर में दीप जलाएं। आप स्वयं जो भोजन कर रहे हैं वही शक्ति के समक्ष अर्पण करने की भावना रखे।

मंदिर या घर मंदिर में या फिर मन मंदिर में बैठी पत्थरों की मूरत को ना तो 56 भोग की आवश्यकता है और ना ही किसी तरह की भाषा और सामग्रियों की। ये पत्थर भले ही साक्षात जगत के दृश्य भगवान नहीं होते हैं लेकिन यह बोलकर किसी को ना तो धोखा देते हैं और किसी का प्रत्यक्ष भला भी नहीं करते हैं तो बुरा भी नहीं करते। आस्था और श्रद्धा के यह भगवान बस एक सच्चे सहारे की तरह मनोबल बढाते हैं।

नव विक्रम संवत का शुभारंभ 24 मार्च 2020 मंगलवार को दोपहर 2 बजकर 58 मिनट पर उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र तथा ब्रह्म योग में कर्क लग्न में प्रारंभ हो गया है। इसी के साथ वसंतीय नवरात्रा भी शुरू हो गए। मंगलवार के दिन विक्रम संवत और हिन्दू नववर्ष के शुरू होने से इस वर्ष का राजा मंगल ग्रह होना चाहिए लेकिन मंगलवार को अमावस्या होंने केवल कारण इस वसंतीय नवरात्रा की शुरुआत व्यवहार में दिनांक 25 मार्च 2020 बुधवार को ही मानी जाएगी और आकाशीय ग्रह नक्षत्रों की ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं में बुध ग्रह को वर्ष का राजा माना जाएगा।

इस बार 25 मार्च 2020 को वसंतीय नवरात्रा में देवी की घट स्थापना सुबह 6 बजकर 30 मिनट से प्रातः साढे नो बजे तक की जा सकती हैं। 2 अप्रेल 2020 को राम नवमी के साथ नवरात्रा का समापन होगा।

संतजन कहते हैं कि हे मानव, यह ऋतु परिवर्तन का समय है और जगत का सूर्य अब उत्तरायन की ओर गति कर रहा है साथ ही अपनी ऊर्जा से बची हुई सर्दी ऋतु को विदाई दे रहा है। आगामी 13 अप्रेल 2020 को यह अपनी यात्रा में मेष राशि में भ्रमण कर नए सौर वर्ष को शुरू कर गर्मी की ऋतु का आगाज़ कर हर मौसमी बीमारियों को खत्म करनें की ओर बढेगा।

इसलिए हे मानव, भले ही तू आस्तिक हो या नास्तिक या फिर हो वास्तविक तब भी चैत्र मास में तू अपनी आंतरिक शक्ति को बढा तथा संयमित खानपान और रहन सहन तथा शुद्धता रख साथ ही आन्तरिक ऊर्जा बढाने के लिए घर में ही एकांत में मनन चिंतन और ध्यान कर चाहे किसी भी विषय पर।

बदलते ऋतु चक्र में शरीर में अभी अग्नि तत्व और जल तत्व का संतुलन बिगड़ता है तथा यह वायु तत्व की कमी बदलते ऋतु चक्र के कारण होती हैं क्योंकि हम ठंडे से गर्म की ओर बढ रहे हैं और शरीर को भी गर्म से ठंडे की ओर बढना है। इसी नव आंतरिक ऊर्जा शक्ति से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढेगी।

कोरोना वायरस की महामारी से डरे नहीं, घर में ही रहें तथा सामाजिक दूरियां बनाए रखें, सावधानी से रहे। मानसिक पूजा अर्चना घर में ही बैठकर करें और ध्यान चिंतन मनन करके आन्तरिक ऊर्जा शक्ति को बढाएं ताकि शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढे।

सौजन्य : ज्योतिषाचार्य भंवरलाल, जोगणियाधाम पुष्कर