सिरोही में भी वसुंधरा राजे का सांकेतिक चुनावी आग़ाज़!


सिरोही में भी राजे का सांकेतिक चुनावी
सिरोही में भी राजे का सांकेतिक चुनावी

सिरोही। भले ही भाजपा में अंदर खाने ये दावे किए जा रहे हों कि हाई कमान ने राजे को साइड लाइन कर दिया है, लेकिन इन दावों को दरकिनार करते हुए राजे का मिशन 2023 यथावत जारी है।

पिंडवाड़ा-आबू विधायक समाराम गरासिया की बेटी की शादी के बहाने सिरोही पहुंची पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सारणेश्वर मंदिर से सिरोही में भी चुनाव की तैयारी का सांकेतिक घोषणा कर ही दी है।

 

सांकेतिक इसलिए कि उन्होने ऐसी घोषणा अपने मुंह से तो नहीं कि नारे लगाने वाले हड़ावल दस्ते ने अपने नारों से ये जता दिया कि उन्हें मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जैसी औऱ एमएलए ओटाराम देवासी जैसे चाहिए।

-सान्निध्य से हिचकिचाये कई भाजपाई, कइयों में उत्साह
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सिरोही आगमन पर भाजपाई दो की बजाय तीन खेमों में बंटे नजर आए। एक वो जिन्होंने राजे के आगमन पर बिल्कुल भी उत्साह नहीं दिखाया। ये वो लोग रहे जो उनके कथित पार्टी प्रतिद्वंद्वी सतीश पूनिया के करीबी माने जाते हैं। दूसरे वो जो राजे की खुदकी कमाई हैं और जिन्हें राजे के नेतृत्व पर अब भी विश्वास है। तीसरे वो जो विवाद में पड़ना नहीं चाहते लेकिन, राजे के आगमन पर उनकी झलक देखे बिना रह भी नहीं सकते थे।
पूनिया की करीब मानी जाने वाली जिले की लॉबी ने राजे से दूरी बनाए रखी। जबकि ये लोग जिले के अन्य इलाकों से बुधवार को ही सिरोही के बाण में आयोजित कार्यक्रम में सतीश पूनिया के सिरोही आगमन पर उनसे मिलने गए थे लेकिन, सिरोही शहर में आना उचित नहीं समझा।

पूनिया द्वारा जिले में बैठाया गए सन्गठन के लोगों से नाराज कुछ ऐसे भी लोग थे जिनमें राजे के आने से जबरदस्त उत्साह था। दोनो हाथ में लड्डू रखने वाले भी काफी थे। वैसे राजे का यहाँ तीन दिवसीय प्रवास है। सम्भव है कि सार्वजनिक रूप से उनसे कन्नी काटने वाले पदाधिकारी या कार्यकर्ता उनसे इस दौरान मिल लें।
– रेबारी समाज के लोगों की भी काफी संख्या
राजे के सारणेश्वर मन्दिर पहुंचने पर यहाँ काफी लोग थे। इनमे अधिकांश रेबारी समाज के भी थे। मंदिर के निकट ही रेबारी समाज छात्रावास के छात्रो की संख्या भी अच्छी खासी रही। ऐसे में इसे ओटाराम देवासी द्वारा जिले में सिरोही विधानसभा में उनकी भाजपा से टिकिट के दूसरे दावेदारों के लिए चुनौति के रूप में भी देखा जा रहा है।
-मंदिर में नारेबाजी से नाराज
शक्ति प्रदर्शन के लिए लाए गए हड़ावल दस्ते कई बार नेताओं के लिए समस्या बन जाते हैं। राजे जब मंदिर में घुसी तो पीछे कार्यकर्ता नारे लगाने लगे। राजे को सिरोही के पूर्व राज घराने के उत्तराधिकारी रघुवीर सिंह देवड़ा नजर आ गए। वो उनसे शिष्टाचार भेंट के लिए रुकी  जैसे ही वो बात करने लगी नारेबाजी रुकी नहीं।

इस पर नाराज होकर उन्होने स्थानीय नेताओं को इन नारेबाजों को बाहर रहने को कहा। रघुवीरसिंह देवड़ा से मिलकर आगे बढ़ीं तो फिर नारेबाजी शुर कर दी। इस बार राजे ने मंदिर में उनकी नारेबाजी नहीं करने की हिदायत देने को कहा तो सारणेश्वर महादेव के नारे लगने लगे।

वसुंधरा राजे कब साथ सिरोही पहुंचे उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के विश्वस्त।
वसुंधरा राजे कब साथ सिरोही पहुंचे उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के विश्वस्त।

– साथ थे पुराने विश्वस्त
वसुंधरा राजे के साथ उनके मंत्रिमंडल और सन्गठन के पुराने विश्वस्त भी सिरोही आये थे। उनमें उनके मुख्यमंत्री काल में प्रदेश अध्यक्ष रहे अशोक परनामी, स्वायत्त शासन मंत्री रहे शेखावत, बिजली मंत्री रहे पुष्पेन्द्र सिंह भाटी, ओटाराम देवासी साथ थे।

वहीं इस दौरान सांसद देवजी पटेल, रेवदर विधायक जगसीराम कोली, रानीवाड़ा विधायक नारायण देवल, पूर्व जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चौधरी, पूर्व महामंत्री वीरेंद्र चौहान, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष लोकेश खंडेलवाल, महिला मोर्चा से रक्षा भंडारी, दमयंती डाबी, हेमलता पुरोहित, भाजपा किसान मोर्चा अध्यक्ष गणपतसिंह, आदि स्थानीय लोग भी शिष्टाचार भेंट व  अभिनंदन के लिए पहुंचे थे।

सिरोही में फर्श पर पड़े दुपट्टे।
सिरोही में फर्श पर पड़े दुपट्टे।

– रुसवा पड़े रहे दुपट्टे
कार्यकर्ता मंदिर में राजे के अभिनंदन के लिए आये। पार्टी के प्रतीक के रूप में दुपट्टे पहने हुए थे। लेकिन राजे के आगमन में कुछ कार्यकर्ता उतने  उत्साहित रहे कि इन दुपट्टों को मंदिर की सीढ़ियों के पास जमीन पर रखकर चल दिये। किसी पदाधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। कुछ लोग इस ओर से निकलते हुए राजे के पीछे पीछे निकल गए और ये दुपट्टे यूँ ही रुसवा होकर पड़े रहे।

बैनर्स में वसुंधरा राजे की फ़ोटो से परहेज वाले गुलाब की माला लेकर साथ फोटो खिंचाते दिखे