शादी के बहाने वसुंधरा राजे का सिरोही में कार्यकर्ताओं का मन टटोलने की कोशिश तो नहीं?

राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे।
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे।

सिरोही। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे आज सिरोही आ रही हैं। मौका पिंडवाड़ा-आबू विधायक समाराम गरासिया की बेटी की शादी का जरूर है। लेकिन, उनके प्रवास के जो पैटर्न है वो महत्वपूर्ण है।

वो आते ही सबसे पहले सिरोही के सारणेश्वर मंदिर जाएंगी, माउंट आबू में भी अधर देवी मंदिर में पूजा का कार्यक्रम बताया जा रहा है। आम तौर पर वे चुनावी बिगुल फूंकने के लिए मंदिर दर्शन के पैटर्न को ही अपनाती हैं।  ऐसे में इस दौरे में शादी से ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि वे किस तरह से कार्यकर्ताओं का मन टटोलती हैं और राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा युग का अंत मान चुके भाजपा नेताओं का क्या रुख रहता है।

वैसे वसुंधरा राजे के बूंदी में केशवरायपाटन में उनके जन्मदिन पर कथित शक्ति प्रदर्शन के कार्यक्रम में समाराम गरासिया, ओटाराम देवासी और जिले के एक प्रधान के जाने की चर्चा उस समय जोरों पर रही थी और भाजपा समूहों में फ़ोटो भी वायरल हुए थे। तो ऐसे में 2023 के लिए सिरोही में अपने राजनीतिक अभियान की शुरुआत और समाराम गरासिया को धन्यवाद देने का इससे बेहतर मौका उनके लिए कुछ नहीं हो सकता था।

सिरोही में बैनर्स से कर दिया है अलविदा

वसुंधरा राजे भले ही पूर्व मुख्यमंत्री रही हों, लेकिन उनके मुख्यमंत्री काल में जो लोग उनके पास खड़े होकर के एक फोटो खिंचवाने को लालायित रहते थे उन्हीं बैनर वीरों ने वसुन्धरा राजे को सिरोही में भाजपा के बैनरों से गायब कर दिया है।

वर्तमान भाजपा प्रदेश सन्गठन में अधिकांश लोगों के वसुंधरा राजे के विपरीत खेमे के होने के कारण जिले के कई नेताओं ने प्रदेश।के आला नेताओं को खुश करने का सबसे बेहतर तरीका राजे को दरकिनार करने का निकाला और उसकी सांकेतिक शुरुआत बैनर और पोस्टरों से की।

किसान मोर्चे ने सबसे पहले किया अलविदा

जिले में वृहद स्तर और वसुंधरा राजे का बैनर पोस्टर्स से बायकॉट की शुरुआत की किसान मोर्चा ने। मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर गत वर्ष जुलाई में स्वामीनारायण मंदिर में किए गए आयोजन में सिरोही शहर और मंच पर लगे पोस्टरों से वृहद स्तर पर वसुंधरा राजे को बैनर और पोस्टरों से एलिमिनेशन का काम शुरू किया गया। फिर ये परम्परा बना गया।

सांसद देवजी पटेल और पूर्व जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चौधरी के करीब माने जाने वाले भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष गणपतसिंह इस वृहद कार्यक्रम से जिले में वसुंधरा राजे को बैनर पोस्टर्स से हटाने के राजनीतिक खेल के अगुआ के रूप में सामने आए। फ़िर बाकी लोगों ने भी राजस्थान की राजनीति में वसुंधरा युग का अंत मानते हुए इसका अनुकरण शुरू कर दिया।

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