नहीं रहे बिहार कांग्रेस के दिग्गज नेता सदानंद सिंह

पटना/भागलपुर। बिहार के राजनीति के चाणक्य माने जाने वाले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह का आज सुबह निधन हो गया।

दिवंगत सिंह के पुत्र शुभानंद मुकेश ने बुधवार को बताया कि उनके पिता लंबे समय से बीमार चल रहे थे। तबियत अधिक बिगड़ने पर इलाज के लिए उन्हें राजधानी पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आज सुबह उनका निधन हो गया। सिंह अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्री एवं एक पुत्र को छोड़ गए हैं।

भागलपुर जिले के सन्हौला प्रखंड के धुआवै गांव में एक किसान परिवार में 21 मई 1943 को जन्मे सदानंद सिंह की प्रारंभिक शिक्षा गांव के विद्यालय में हुई और फिर कहलगांव के शारदा पाठशाला से मैट्रिक तथा इंटर की परीक्षा पास की। बाद में उन्होंने भागलपुर के मारवाड़ी महाविद्यालय से बी काॅम और विधि महाविद्यालय से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।

सिंह ने वर्ष 1968 में राजनीति में प्रवेश किया। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की सरकार में स्व. इंदिरा गांधी को जेल भेजे जाने के विरोध में उन्होंने स्वेच्छा से गिरफ्तारी दी और चौदह दिन बाद जेल से रिहा हुए थे।

उल्लेखनीय है कि सिंह का राजनीतिक सफर काफी लंबा रहा। 1969 में वे कहलगांव विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में खड़े हुए और पहली बार ही उन्होंने जीत हासिल कर बिहार विधानसभा की सदस्यता ग्रहण की। भागलपुर जिले के कहलगांव विधानसभा क्षेत्र से लगातार 9 बार विधायक रह चुके सिंह पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा की सरकार में सिंचाई मंत्री भी रहे थे।

उन्होंने 12 बार विधानसभा का चुनाव लड़ा और इनमें से नौ बार लगातार निर्वाचित हुए थे। इस तरह उनके नाम से सबसे अधिक बार चुनाव जीतने का रिकॉर्ड है। अपने अच्छे व्यवहार और विकास कार्यों को उच्च प्राथमिकता देने के लिए अपने विधानसभा क्षेत्र में लोकप्रिय बने सिंह 2015 में बिहार में कांग्रेस की खराब स्थिति के बावजूद अपने क्षेत्र से विजयी घोषित हुए थे।

सिंह वर्ष 2000 से 2005 तक बिहार विधानसभा के अध्यक्ष रहे और इस दौरान एक अभिभावक के रूप में काम करते हुए सभी दलों के बीच लोकप्रिय रहे। बाद में उन्होंने दस वर्ष तक विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता के पद को सुशोभित किया। बीच में बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी बनाए गए थे।

एक जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने बिहार सरकार के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए कहलगांव और भागलपुर जिले के विकास के लिए कई काम किए, जिसमें कहलगांव में स्थापित बटेश्वर गंगा पंप सिंचाई परियोजना मुख्य रूप से शामिल हैं।

वह वर्ष 1973-74 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अब्दुल गफ्फूर की सरकार में ऊर्जा और सिंचाई राज्यमंत्री बनाए गए थे। बाद में 1980 में जगन्नाथ मिश्र की सरकार में भी सिंचाई राज्यमंत्री बनें थे। वहीं, सिंह लोकसभा में दहाड़ लगाने वाले भागलपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के दिग्गज सासंद भागवत झा आजाद के भी करीबी माने जाते थे।

इस तरह अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम पड़ाव में अस्वस्थता की वजह से उन्होंने वर्ष 2020 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने अपने इंजीनियर पुत्र शुभानंद मुकेश को कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में खड़ा किया था लेकिन वह चुनाव हार गए।