भाजपा सरकार में मंत्री बनना चाहता था पर अब नहीं छोड़ूंगा कांग्रेस : अल्पेश ठाकोर

अहमदाबाद। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव और गुजरात के विधायक अल्पेश ठाकोर ने आज स्वीकार किया कि वह राज्य की भाजपा सरकार में मंत्री बनने के इच्छुक थे पर अब उन्होंने इरादा बदल दिया है और वह अपनी पार्टी में रह कर ही लोगों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि वह लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते क्योंकि उनकी रूचि गुजरात की ही राजनीति में हैं। उनकी पत्नी के भी लोकसभा चुनाव लड़ने की अटकले पूरी तरह गलत हैं क्योंकि वह कभी भी राजनीति में पदार्पण नहीं करेंगी।

ठाकोर ने कहा कि उनकी राष्ट्रीय राजनीति की बजाय गुजरात की राजनीति में रूचि होने के कारण उन्होंने आलाकमान से उन्हें राष्ट्रीय सचिव पद की जिम्मेदारी से मुक्त करने का भी आग्रह किया है।

लंबे समय से उनके पाला बदलने की अटकलों के बीच कल दिल्ली में पार्टी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल और अन्य वरिष्ठ नेताओं से मिल कर लौटने के बाद आज यहां संवाददाता सम्मेलन मेंं कहा यह बात सच है कि वह कांग्रेस पार्टी तथा इसके नेतृत्व से नाराज थे और यह नाराजगी उन्हें तथा उनके समर्थकों को उचित सम्मान नहीं मिलने के कारण था पर अब यह मामला हल हो गया है। आलाकमान ने ऐसा सुनिश्चित करने तथा हमारा सम्मान नहीं करने वालों के प्रति कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।

उन्होंने कहा कि वह मंत्री बनना चाहते थे और स्वयं इस बारे में (भाजपा से) इच्छा जताई थी और बात भी की थी। मंत्री पद और सत्ता सबको अच्छी लगती है। वह अपने लोगों के लिए कुछ और अधिक करने के लिए ऐसा करना चाहते थे। पर उनके समर्थकों ने कहा कि वह उनके लिए ऐसे ही संघर्ष करते रहें। वह अगर चाहते तो छह माह पहले ही मंत्री बन गए होते। अब मैने कांग्रेस में ही रह कर संर्घष करते रहने का फैसला किया है। अगर मेरे समर्थक चाहेंगे तो मैं केवल अपने संगठन ठाकोर सेना के लिए ही काम करते रहूंगा।

एक प्रश्न के उत्तर में उन्होने कहा कि वह नहीं मानते कि कांग्रेस छोड़ कर भाजपा में जाने वाले और आज मंत्री पद की शपथ ले रहे पूर्व विधायक के साथ खरीद फरोख्त हुई है। वह उन्हें अपनी शुभकामना देते हैं।

ठाकोर ने कहा कि कल तक वह बहुत उलझन में थे। वह और उनके साथी कांग्रेस विधायक धवल झाला (संवाददाता सम्मेलन में उनके साथ उपस्थित) रात भर जगे रहे। पर अब यह उलझन दूर हो गई है। वह यह नहीं चाहते कि वह मंत्री बने तो लोग उन्हें बिकाऊ नेता कहें। वह सत्ता के बिना तो रह सकते हैं पर सम्मान के बिना नहीं रह सकते।