जातिवाद, विकास या सुराज, इस बार क्या तारेगा गोपालन मंत्री ओटाराम देवासी को?

Sirohi-Assembly
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सबगुरु न्यूज-सिरोही। तीन बार राष्ट्रीय और प्रदेश स्तरीय नेताओं की रायशुमारी हो चुकी है। तीनों ही बार सिरोही विधानसभा के तीनों ही विधायकों की खिलाफत सामने आई। वैसे इनकी कार्यप्रणाली के अलावा इस खिलाफत की मुख्य वजह देवासी के कारण राजनीतिक पारी की एक्स्पायरी डेट के करीब पहुंच चुके दूसरे नेताओं की महत्वाकांक्षा भी है जो यह मान रहे हैं कि अभी नहीं तो कभी नहीं।

सिरोही के होटल में सिरोही विधानसभा के विधायक और गोपालन राज्यमंत्री ओटराम देवासी को भी अपने विधानसभा क्षेत्र के लिए पार्टी मे ही विरोध झेलना पड़ा। अब सवाल ये है कि लगातार दो बार सिरोही विधानसभा क्षेत्र से लगातार एमएलए रह चुके ओटाराम देवासी इस बार अपनी पार्टी को किस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएंगे जातिवाद, विकास या फिर फिर से सुराज का गुड़ जनता की कोहनी पर लगाएंगे।

इस बार तो उनके पास जनता को देने के लिए यह दलील भी नहीं रही की हावकी मां (सौतेली मां की सरकार, जो दलील प्रथम बार एमएलए बनने पर वो देते थे) होने के कारण वह जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर पाए।
सिरोही विधानसभा में ओटाराम देवासी की सबसे बड़ी ताकत है उनकी जाति और भाविको के वोट। ऐसे में ओटाराम देवासी के खडे होने पर जहां भाजपा के वोटों की गिनती दस हजार से शुरू करनी पड़ती है, वहीं कांग्रेस को एक वोट से करनी होती है। लेकिन, इस बार स्थिति उलट हो गई। इसका कारण खुद देवासी और उनकी जाति के अति उत्साही समर्थक हैं।

देवासी ने सिरोही विधानसभा से उनके टिकिट कटने की बात पर एक इंटरव्यू में कहा था कि रेबारी का टिकिट कटा तो उनके समाज में गलत संदेश जाएगा, दूसरा उनके समर्थक का एक आॅडियो वायरल हुआ, जिसमें उसका कहना था कि हम अपने काम के लिए अपनी ही जाति वाले के हाथ जोड़ेंगे।

दोनों ही संदेशों ने दूसरे समाज में गलत संदेश भेजा। एक तो ये कि सिर्फ एक ही व्यक्ति की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को वो कब तक पोषित करेंगे दूसरी ये कि दूसरी जातियां भी उनके समर्थक के कहे अनुसार अपनी ही जाति के व्यक्ति को हाथ क्यों नहीं जोडेंगे। सोशल मीडिया में खुद भाजपा के नेता इस बात को उठा रहे हैं।

वैसे जातिवाद के रथ पर सवार होकर विधानसभाओं में पहुंचने वाले मिर्धा और मदेरणा परिवार की हार भी सबसे बड़े उदाहरण है कि जातिवाद की बैसाखी पर कोई भी नेता तभी तक राजनीतिक सफर तय कर सकता है जब तक कि शेष मतदाता इसकी खिलाफत पर नहीं उतरते। फिलहाल सिरोही के मतदाताओं का मूड प्रथम दृष्टया इस बैसाखी के खिलाफ ज्यादा प्रतीत हो रहा है।

विकास की बात करें तो सिरोही का वही विकास हुआ है जो आमतौर पर होता रहा है। ओटाराम देवासी के अनुसार सिरोही जिले में 2200 करोड़ रुपये के विकास कार्य हो रहे हैं। इनमें सड़कें, नालियां, भवन शामिल हैं।

इनकी गुणवत्ता और इनमें हुए भ्रष्टाचार की बात दूसरी है, लेकिन इस राशि से बत्तीसा नाले को छोड़कर कोई ऐसा कार्य नहीं गिनाया जा सकता जो मील का पत्थर साबित हो।

बत्तीसा नाला भी सिर्फ सिरोही शहर के पीने के पानी के लिए काम आ सकता है, सिंचाई के लिए इसका पानी अणगौर में लाना तकनीकी रूप से असंभव होने की बात तकनीशियन कह चुके हैं। ऐसे में पांच लाख की आबादी में इससे सिर्फ 30 हजार लोगों को फायदा होगा। वैसे नर्मदा का पपलू देवासी फिर से पकड़ाने लगे हैं।
ओटाराम देवासी दूसरी बार जब जीते थे तब कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश था। इसी दौरान रामराज देने का वायदा करके वसुंधरा राजे ने 2018 में सुराज संकल्प यात्रा निकाली थी। इसी में सुराज का वायदा किया था।

सुराज मतलब सुविधाजनक राज, सुखद राज, सुगम राज। लेकिन, इन पांच सालों में सिरोही में सुराज के नाम पर आम लोगों को नौकरशाही की लम्बी प्रक्रिया ज्यादा मिली। आंकड़ांे में सुगम पोर्टल में समस्याओं का निराकरण दिखाया गया, लेकिन अधिकांश की रिपोर्ट में असंतुष्ट ही आया।

खुद देवासी अपने विधानसभा क्षेत्र को भ्रष्टाचार मुक्त नहीं रख पाए। कांग्रेस के पूर्व बोर्ड में हुए घोटालों पर सजा दिलवा पाए न ही अपनी पार्टी के बोर्ड में भ्रष्टाचार रोक पाए। जबकि निकायों में वह सदस्य हैं। ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों के शीघ्र स्थानांतरण का मामला भी उनके सुराज की बड़ी विफलता रही।

जिला कलक्टर अभिमन्यु कुमार, पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार, शिवगंज उपखण्ड अधिकारी कुलराज मीणा, सिरोही तहसीलदार विरेन्द्रसिंह व अनुपसिंह, बरलूट थानाधिकारी और ऐसे कितने ही अधिकारी हैं, जिन्हें यहां से स्थानांतरित होने के पीछे यह आरोप लगा कि इन लोगों ने भाजपा नेताओं के अवैधानिक कामों को मना कर दिया था।

इसके अलावा सिरोही में भाजपा कार्यालय की करोड़ों की जमीन का औने पौने दामों पर लेने के लिए व्यवस्था का जमकर दुरुपयोग करके और सिरोही वासियों को गंदा पानी पिलवाने के मामले में मुंह में दही जमाने से स्वयं देवासी ने अपने शासन की सुराज के संकल्प को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि ओटाराम देवासी भाजपा की विजय के लिए इस बार जनता के बीच इन तीनों में से किस मुद्दे को लेकर जाएंगे। क्योंकि उन्हें टिकिट मिलने की संभावना वह स्वयं भी जता रहे हैं, इसके अलावा यदि देवासी यहां से खड़े नहीं भी होते हैं तो पार्टी के चेहरे के समर्थन में उन्हें ही सिरोही की जनता के बीच जाकर जवाब तो देना होगा।