संकट के दौर से गुजर रहा अजमेर का पोल्ट्री व्यवसाय

अजमेर। आल राजस्थान पॉल्ट्री फार्मस सोसायटी अजमेर की ओर से पोल्ट्री फार्मस की समस्याओं एवं अंडे के बारे में फैली भ्रांतियों पर चिंता व्यक्त की गई।

पोल्ट्री फार्मस सोसायटी के अध्यक्ष डा. राजकुमार जयपाल ने बताया कि वर्तमान में पोल्ट्री व्यवसाय बुरे दौर से गुजर रहा है। बीते कुछ समय से पोल्ट्री फीड में मिलाए जाने वाले स्रोत जैसे मक्का, सोयाबीन, डीओआरबी, बाजरा आदि की कीमतें काफी बढ चुकी हैं। इस कारण फीड महंगा हो गया।

इसके अलावा कुछ सालों से मौसमी बीमारियों का प्रकोप भी बढा है। इस कारण फार्मस को अंडे उत्पादन की लागत अधिक पड रही है। सोसायटी लंबे समय से मांग कर रही है कि सरकार पोल्ट्री फीड में मिलाए जाने वाले मक्का, सोयाबीन, डीओआरबी, बाजरा आदि अनुदानित दर पर उपलब्ध कराए।

इस मौके पर वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डा. आलोक खरे में बताया कि समाज में अंडे के सेवन को लेकर काफी गलत धारणाएं बनी हुईं हैं। इस कारण लोग चाह कर भी अंडे नहीं खाते। उन्होंने स्पष्ट करते हुए बताया कि मुर्गी का अण्डा एक प्राकृतिक सम्पूर्ण मल्टीविटामिन कैप्सूल की भांति है।

एक सर्वे के अनुसार धार्मिक आस्था के कारण 34.1 प्रतिशत लोग अण्डे नहीं खाते, 6.5 प्रतिशत लोग स्वास्थ्य के कारणों से और 22.8 प्रतिशत लोग महक के कारण अंडे नहीं खा पाते। 16.9 प्रतिशत लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने कभी अण्डा खाया ही नहीं।

अंडा शाकाहारी होता है या मांसाहारी

मुर्गी का अण्डा मांसाहारी है या शाकाहारी यह सवाल भी अब तक बना हुआ है। जबकि सत्य यह है कि दूध की तरह मुर्गी का अण्डा भी पशु उत्पाद है। परन्तु सदियों से दूध के प्रति कोई गलत धारणा नहीं रही है। लेकिन अण्डे को मांसाहारी भोजन समझा जाता है। लोगों को लगता है कि अण्डे में जीव है या अण्डे से चूजे का जन्म हो सकता है। वास्तविकता में पोल्ट्री फार्म के अण्डे अनिषेचित होते हैं। इसलिए ऐसी कोई सम्भावना नहीं होती कि अगर उस अण्डे को नहीं खाया जाता तो उससे चूजा निकल सकता था। मादा शरीर होने के कारण, मुर्गी के शरीर में उत्पन्न होने वाले हार्मोन्स, मुर्गी के प्रजनन अंगों का विकास और अण्डा उत्पादन नियन्त्रित करते हैं।

हार्मोन्स के प्रभाव के कारण ही मुर्गी अण्डा देती रहती है। अण्डा देने के लिए मुर्गी का मुर्गे के संपर्क में आना जरूरी नहीं है। यही कारण है कि पोल्ट्री फार्म की मुर्गियां भी बिना मुर्गा के भी अण्डे देती रहती हैं। पोल्ट्री फार्म के अण्डे मांसाहारी नहीं हो सकते। ऐसा अण्डा जिसे मुर्गी, मुर्गे के संपर्क में आने के बाद देती है, उसे हम मांसाहारी कह सकते हैं। इन अण्डों में भ्रूण मौजूद होता है, जो उन्हें मांसाहारी बना देता है। यह देशी मुर्गी में सम्भव है, क्योंकि देशी मुर्गी, मुर्गे के संपर्क में आती रहती है।

देसी मुर्गी और विदेशी मुर्गी में अंतर

देशी मुर्गी के अण्डे की कीमत काफी ज्यादा होती है। क्या पोल्ट्री फार्म के अण्डों की तुलना में देशी मुर्गी के अण्डें ज्यादा पौष्टिक होते हैं? यह बात भी बार बार उठती रहती है। समाज में शायद इसीलिए यह भ्रम भी व्याप्त है कि पोल्ट्री फार्म के अण्डे ‘फर्जी‘ या ’मशीनी‘ होते हैं या ’पौष्टिक’ नहीं होते। यह गलत धारणा है। दोनों प्रकार के अण्डों में पाए जाने वाले पोषक तत्व बराबर मात्रा में ही होते हैं। अण्डे के खोल (छिलका) के रंग से उसकी पौष्टिकता पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। आप पोल्ट्री फार्म का अण्डा खाएं या फिर देशी अण्डा, आपको बराबर मात्रा में प्रोटीन और अन्य पोषक तत्व मिलेंगे।

इसी तरह लोग मानते हैं कि गर्मी के मौसम में अण्डे नहीं खाने चाहिए, क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। जबकि अभी तक कोई वैज्ञानिक अध्ययन यह तथ्य साबित नहीं कर पाया है। ये सब सिर्फ एक भ्रान्ति है। अन्य देशों में तो अण्डा रोज खाया जाता है। वहां इसके खाने से किसी को नुकसान होने की खबर आज तक नहीं आई।

क्या अण्डे में कॉलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होती है? और इस कारण से क्या यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है? प्रश्न भी उठता रहा है। जबकि यह सही नहीं है। कॉलेस्ट्रॉल हमारे शरीर के लिए जरूरी होता है। एक औसत अण्डे में केवल 275 मिग्रा कॉलेस्ट्रॉल होता है, जबकि मनुष्य का शरीर 2000 मिग्रा कॉलेस्ट्रॉल बनाता है। हमारे शरीर में खराब और अच्छे दो तरह के कॉलेस्ट्रॉल होते हैं। अण्डा आपके शरीर में अच्छे कॉलेस्ट्रॉल उत्पादन करता है जिससे दिल की बीमारी का खतरा कम होता है। एक अंडे में करीब 6 ग्राम यानि लगभग एक चम्मच वसा होती है। लेकिन इसका सिर्फ एक चौथाई हिस्सा यानि लगभग 1.5 ग्राम सैचुरेटेड फैट होता है। अण्डे का कॉलेस्ट्रॉल समस्या नहीं है, बल्कि सेचुरेटेड फैट से बना कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा बड़ी मुसीबत है।

अंडे की जर्दी खाने से क्या होता है

अधिकतर लोग अण्डे की सिर्फ सफेद जर्दी ही खाते हैं और पीली जर्दी को फेंक देते हैं। इसे समझने के लिए यह आवश्यक है कि अण्डे की सफेद जर्दी और पीली जर्दी के अन्तर को समझा जाए। अण्डे की सफेद जर्दी में प्रोटीन और पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इसमें कोई वसा नहीं होती और कार्बोहाइड्रेट भी 1 प्रतिशत से कम होता है। अण्डे में पाई जाने वाली पूरी वसा उसके पीली जर्दी में होती है, इसलिए कैलोरी की मात्रा भी इसमें ज्यादा होती है। पीली जर्दी में सफ़ेद जर्दी की तुलना में ज्यादा विटामिन, मिनरल और फैट पाया जाता है। इसमें विटामिन बी, ए, डी, ई और के, अधिक मात्रा में पाया जाता है जबकि सफेद जर्दी में विटामिन ए, डी, ई और के नहीं पाया जाता है। अण्डे की पीली जर्दी में फैट, फोलेट, कोलिन, सेलेनियम, आयरन और जिंक भी पर्याप्त मात्रा में होता है जो अच्छी सेहत के लिए बहुत ज़रूरी हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो अंडे की पीली ज़र्दी ही ज्यादा फायदेमंद है। अण्डे के सभी पोषक तत्व प्राप्त करने के लिए हमें पूरा अण्डा खाना चाहिए।

Ande khane ke fayde

अण्डे खाने के क्या फायदे हैं? अण्डा एक प्रकार से मल्टीविटामिन कैप्सूल है। अण्डे में सबसे अच्छी गुणवत्ता का प्रोटीन होता है। अण्डे की प्रोटीन संरचना आदर्श होती है। इसीलिए अन्य खाद्य पदार्थों की प्रोटीन की गुणवत्ता मापने के लिए वैज्ञानिक अक्सर अण्डे को एक मानक के रूप में उपयोग करते हैं। प्रोटीन की गुणवत्ता को जैविक मूल्य के रूप में व्यक्त किया जाता है। किसी भी अन्य भोजन की तुलना में अण्डे का सर्वाधिक स्कोर 93.7 प्रतिशत है। हमारे भोजन में अण्डा दैनिक आवश्यकता का 12 प्रतिशत प्रोटीन की पूर्ति करता है।

Ande me konsa protein paya jata hai

अण्डा उन कुछ चुनिंदा खाद्य पदार्थों में से एक है, जिसमें संपूर्ण प्रोटीन और सभी नौ अत्यावश्यक अमीनो एसिड पाए जाते हैं जो हमारे शरीर में प्राकृतिक रूप से नहीं बन सकते। इन आवश्यक अमीनो एसिड के आधार पर ही अण्डे का प्रोटीन, मानव पोषण के लिए मां के दूध के बाद दूसरे नम्बर पर माना जाता है। जिन खाद्य पदार्थों में सभी नौ आवश्यक अमीनो एसिड होते हैं उन्हें पूर्ण प्रोटीन खाद्य पदार्थ कहा जाता है। अभी अण्डे में दो नए पहचाने गए पोषक तत्व पाए जाते हैं ल्यूटिन और ज़ेक्सैन्थिन। जिससे अंडे को “कार्यात्मक भोजन“ श्रेणी में रखा है। एक कार्यात्मक भोजन वह है जो अपने मूल पोषक तत्व से परे स्वास्थ्य लाभ भी प्रदान करता है।

Ande khana chahiye ya nahi

क्या लोगों को प्रतिदिन अण्डे खाने चाहिए? नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रीशन के अनुसार व्यक्ति प्रतिदिन यदि आधा अण्डा भी खाए तो उसके शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्वों की पूर्ति हो सकती है। यानि कि पूरे वर्ष में प्रति व्यक्ति 180 अण्डा की आवश्यकता होगी। जबकि हमारे देश में प्रति वर्ष प्रति व्यक्ति अण्डे की उपलब्धता मात्र 68 है। इस हिसाब से वर्तमान में अण्डे की खपत काफी कम है। वर्तमान दरों के अनुसार उपभोक्ता को आधे अण्डे की कीमत लगभग रूपए 2.50 ही पड़ती है। जबकि इसकी तुलना में एक गिलास दूध (लगभम 250 मिली) लगभग 10 रुपए का मिलता है। गरीब आदमी के भी भोजन में अण्डा एक सस्ता और सम्पूर्ण खाद्य पदार्थ हो सकता है।

Ajmer Rajasthan Pultry farm helpline number

नोट : राजकीय कुकुट प्रशिक्षण संस्थान के वरिष्ठ चिकित्सक डा. आलोक खरे (मोबाइल नंबर 9414707657) से पोल्ट्री संबंधी अधिक जानकारी के लिए संपर्क किया जा सकता है।