क्या उत्तर भारत में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहेगी

क्या उत्तर भारत में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहेगी
क्या उत्तर भारत में बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहेगी

मंगलवार | को डिस्कॉम्स के विनिमय केंद्रों की डे अहेड बाइंग रणनीति व बिजली की बढ़ती मांग ने स्पॉट पावर कीमतों को 6.20 रुपये प्रति इकाई लांघने पर मजबूर कर दिया। यह बढ़ोतरी तापीय ऊर्जा की बढ़ती मांग व अपर्याप्त कोयला आपूर्ति के बीच हुई है। इस समय डिस्कॉम्स के पास बिजली कंपनियों के साथ दीर्घावधि के पीपीए में हाथ आजमाना एक उपाय है। दीर्घावधि के पीपीए पूर्वनिर्धारित कीमत पर बिजली के निर्बाध स्रोत सुनिश्चित कर डिस्कॉम्स व आम लोगों की लागत को काबू करने में मदद करेंगे। यही समय की मांग है क्योंकि इससे अचानक हुई बढ़ोतरी को काबू किया जा सकेगा जो आम लोगों के हित में होगा।

उद्योग के जानकारों के अनुसार अधिक लोगों तक बिजली की पहुंच के साथ इसकी मांग में बढ़ोतरी जारी रहेगी। आज, मांग में बढ़ोतरी के मुख्य कारण हैं सरकार की ’सभी को 24×7 बिजली’, ’स्मार्ट सिटीज’ का विकास, ’सभी के लिए घर’ योजना, ’मेक इन इंडिया’ द्वारा औद्योगिक प्रगति, बढ़ता शहरीकरण, आधारभूत संरचना की आवश्यकताएं, बिजली चलित वाहन एवं वर्तमान आर्थिक प्रगति। आधार मांग व अधिकतम मांग, दोनों में भारत के बिजली की बढ़ती कमी झेलने की आशंका है। अक्षय ऊर्जा में तीव्र प्रगति के बावजूद, बेस लोड व ईवनिंग पीक को पूरा करने के लिए जरूरी सौर ऊर्जा के तापीय संयंत्र उपलब्ध नहीं है व बिजली बनाने के लिए हवा की एक निश्चित गति चाहिए होती है।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन ने अपनी अप्रैल 2018 की टिप्पणी में कहा था कि ग्रामीण इलाकों के विद्युतीकरण से बिजली की मांग बढ़ेगी जिससे कोयले की आपूर्ति पर बोझ पड़ेगा। कोल इंडिया का वित्तीय वर्ष 2018 का उत्पादन लक्ष्य पहले 630 मीट्रिक टन, फिर 600 मीट्रिक टन रखा गया व अंत में उत्पादन हुआ 567 मीट्रिक टन। जिंदल तमनार थर्मल स्टेशन, छत्तीसगढ़ व झाबुआ थर्मल स्टेशन, मध्य प्रदेश में कोयले की कमी से केरल में बिजली की आपूर्ति पर असर पड़ा है।

उत्तरी राज्यों से तापीय ऊर्जा की औसत से अधिक मांग व पश्चिमी भारत से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा व पंजाब जैसे उत्तरी राज्यों में बिजली आपूर्ति करने वाली एक महत्वपूर्ण ट्रांसमिशन लाइन के ठप्प पड़ जाने से इन राज्यों में सोमवार को कीमतें बढ़कर लगभग 8 रुपये प्रति इकाई पहुंच गईं। अभी वे 7.43 रुपये प्रति इकाई पर हैं।

गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, आंध्र व तमिलनाडु की वितरण कंपनियां आपूर्ति में कमी से निपटने के लिए स्पॉट मार्केट से बिजली खरीदती हैं। यदि वे महंगी बिजली खरीदने को मजबूर होती हैं, जैसा कि अभी हो रहा है, तो यह लागत आगे ऊंची दरों द्वारा खुदरा व औद्योगिक ग्राहकों को झेलनी पड़ेगी।

वित्तीय वर्ष 2007 व वित्तीय वर्ष 2017 के बीच, भारत की अधिकतम मांग लगभग 5 प्रतिशत संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 159.54 गीगावॉट तक पहुंची, इसी दौरान स्थापित बिजली उत्पादन लगभग 10 प्रतिशत की संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर से बढ़कर 200 गीगावॉट से 327 गीगावॉट तक पहुंचा। यह सकल घरेलू उत्पाद (“जीडीपी“) की मजबूत प्रगति से संभव हुआ, हालांकि वितरण कंपनियों की गिरती वित्तीय सेहत ने वृद्धि को थामा।

बॉक्स में
स्पॉट पावर की कीमतें पिछले हफ्ते 4 रुपये प्रति इकाई के आसपास थीं, परंतु कोयला निर्मित बिजली की मांग में वृद्धि व सबसे बड़ी बिजली लेनदेन कंपनी, इंडिया एनर्जी एक्सचेंज में कीमतों के 7 दिनों में 2 रुपये प्रति इकाई से अधिक की बढ़ोतरी के बाद बिजली की मांग में बढ़ोतरी के साथ यह 6 रूपये प्रति इकाई को पार कर गयीं।