दिल के दुश्मन हैं जंक फूड, जिमखाना और एनर्जी ड्रिंक्स

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भारत में कम उम्र में कार्डियक अरेस्ट (हृदयाघात) की बढ़ती घटनाओं से युवा वर्ग को बेहद गंभीरता से लेने की जरूरत है और समय की मांग है कि यह वर्ग इसे चुनौती के रूप में लेते हुए इससे बचने के लिए हर कदम उठाएं।

पूर्व राष्ट्रपति आर वेंकटरमण, शंकर दयाल शर्मा और प्रणव मुखर्जी के निजी चिकित्सक रहे पद्मश्री (डॉ) मोहसिन वली ने गुरुवार को हार्ट डे के मौके पर कहा कि तेजी से बिगड़ती जीवन शैली कई बीमारियों की जननी है जिनमें कार्डियक अरेस्ट सबसे प्रमुख है।

फिल्म अभिनेता सिद्धार्थ शुक्ला, बेहद चहेते गायक केके, टीवी एकंर रोहित सदाना, दक्षिण भारतीय फिल्म के अभिनेता के बाद सितम्बर के पहले सप्ताह में लगातार तीन दिन कम उम्र में दिल की गति रूक जाने से हुई मौतों का मामला डरावना है।

सबसे कम उम्र (33) में राष्ट्रपति का निजी चिकित्सक बनने का गाैरव प्राप्त करने वाले प्रोफेसर वली ने कहा कि आपने देखा कि केके, सिद्धार्थ शुक्ला, पुनीत राजकुमार और हाल की घटनाओं में कार्डियक अरेस्ट से जान गंवाने वाले सभी युवा कितने फिट दिख रहे थे। किसी की 19 तो किसी की 29 वर्ष की उम्र में कार्डियक अरेस्ट से जान गई है। वर्तमान में 20 से 50 आयु वर्ग के लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं। आज के युवा वर्ग की जीवन शैली बहुत हद तक जिम्मेदार है कार्डियक अरेस्ट के लिए।

दिल की बीमारियों पर लंबे समय तक शोध करने वाले विश्वविख्यात चिकित्सक डॉ. वली ने कहा कि कार्डियक अरेस्ट की कई घटनाएं जिमखाना में हुई हैं। डोले-शोले बनाने के चक्कर में कम्र उम्र में कार्डियक अरेस्ट के शिकार होने का हमेशा खतरा रहता है।

क्षमता से अधिक वजन उठाना, ट्रेड मिल पर ट्रेनर की निगरानी में और सीमित गति से नहीं दौड़ना और तुरंत रिजल्ट के प्रोटीन तथा कई तरह के इंजेक्शन लेना दिल के लिए कतई ठीक नहीं है। मैं तो कहता हूं, बंद करो जिमखाने का खतरनाक खेल। देसी चाल चले हमारे युवा तो 100 वर्ष तक स्वस्थ रहेंगे।

सबसे अच्छा है कि हमारे नवयुवक सुबह की ताजी हवा में ब्रिस्क वाॅक करें, हल्की-फुल्की कसरत और योग करें तथा घर का खाना खाएं। भारतीय खाना दाल-भात को हालांकि विश्व में पहला स्थान मिल चुका है, लेकिन वही घर की मुर्गी दाल बराबर वाली बात है और हमारे बच्चे पश्चिमी देशों की नकल करके अपना बहुत कुछ खो रहे हैं।

डाॅ. वली ने युवाओं की खान-पान की आदतों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आज रात-रात भर जागने और दिन में सोने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या गंभीर चिंता का विषय है। माता-पिता सोये रहते हैं तो रात के दो बजे पिज्जा, मोमोस, बर्गर, नूडल्स समेत तमाम जंक फूड आपके बच्चों की एक अंगुली के इशारे पर हाजिर हो जाते हैं।

सुबह आपको उनके बेड या डाइनिंग टेबल पर लिफाफे और खाली डिब्बों के रूप में जंक फूड के निशान मिलते हैं। जंक फूड में नमक, फैट, मैदा और चीनी के रूप में हमें कई बीमारियां परोसी जा रही हैं और हमारे बच्चे टेस्ट, आसान उलब्धता और फैशन की जद में आकर इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं।

ट्रांस फैट वाली खाने की वस्तुएं सीधे हमारे दिल की धमनियों पर असर करती हैं। उन पर परत बनकर चिपक जाती हैं और एक दिन दिल का दौरा पड़ने का मुख्य कारण बनती हैं। बच्चे रात की पूरी नींद नहीं लेते हैं जिसके कारण अल्जाइमर और कार्डियक अरेस्ट समेत कई गंभीर बीमारियों का खतरा उत्पन्न होता है।

उन्होंने कहा कि वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति के कारण धूम्रपान की लत और बढ़ी है। ऑफिस में शर्म से इसका सेवन बेलगाम नहीं होता था। एनर्जी ड्रिंक से अल्कोहल की क्रेविंग होती है यानी उसकी तरफ जाने की पहली सीढ़ी है। उसे प्रतिबंधित कर दिया जाना चाहिए। जीवन शैली में सुधार लगाकर असमय मौत से बचा जा सकता है। हमारे वे दिन बहुत अच्छे थे जब दूरदर्शन जमाना था और चित्रहार 10 बजे बंद हो जाता था, जल्दी सोने और जल्दी उठने की आदत थी।आज हम दिन-रात सोशल मीडिया पर उगंलिया नचाते हैं, उससे भी गंभीर बीमरियों का खतरा है।

चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वर्ष 2007 में पद्मश्री से नवाजे गए डॉ. वली ने कहा कि खराब जीवन शैली के साथ-साथ गोर चिंता भी जानलेवा साबित हाेता है। बच्चों में कोविड के बाद बेरोजगारी समेत कई तरह की चिंता घर कर गयी हैं। स्ट्रेस कम करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कुछ लोग कार्डियक अरेस्ट को हार्ट अटैक समझते हैं, लेकिन ये दोनों अलग है। यहां ये समझना जरूरी है कि हार्ट अटैक से ज्यादा खतरनाक कार्डियक अरेस्ट होता है। इस बीमारी में अगर समय पर इलाज न मिले, तो व्यक्ति की मौत तक हो सकती है। इसमें इलेक्ट्रिक इनबैलेंस के कारण दिल धड़कना बंद कर देता है।

यह दिल धड़कने की गति से संबंधित है। दिल की गति 100 से बढ़कर 400 तक हो सकती है और एक दम दिल की धड़कन बंद हो जाती है। ऐसे में समय पर छह मिनट के अंदर सीपीआर मिलना बेहद जरुरी है। हार्ट अटैक दिल की धमनियों में ब्लॉकेज होने और दिल की कुछ क्रॉनिक बीमारियों के कारण हाेता है। कोेलेस्ट्राॅल बढ़ने के कारण खून से चिपचिपे पदार्थ धमनियों पर जम जाती हैं जो दिल का दौरा पड़ने के कारणों में प्रमुख है।

डॉ.वली ने कहा कि मैं सभी लोगों, खासकर युवा वर्ग से आग्रह करता हूं कि वे अपनी नहीं तो अपने माता-पिता की चिंता करते हुए अपनी जीवन शैली को स्वस्थ बनाएं। आप लोग ऐसा नहीं करेंगे तो कौन बनेगा नासा प्रमुख, अमरीकी हेल्थकेयर जाकर कौन नाम कमाएगा। हमारी लड़कियां चांद पर गई हैं, कैसे हो पाएगा इस परम्परा का निर्वहन?