तो क्या इस बार सिरोही के ग्रामीण सरकार चुनने में लगना था शराब तस्करों का पैसा?

गुजरात मि डीसा की होटल में पकड़े गए आनंदपाल सिंह के सीसीटीवी फुटेज की क्लिप।
गुजरात मि डीसा की होटल में पकड़े गए आनंदपाल सिंह के सीसीटीवी फुटेज की क्लिप।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही जिले में नगर निकायों पर कब्जा जमाने के लिए वहां पर कब्जा करने का खेल दो दशक पहले शुरू हुआ था। तब इसमें जिले की को-ऑपरेटिव सोसायटियां पैसा लगाती थीं। कई प्रत्याशी वो खड़ा करती थी जिससे नगर निकायों में उनका कब्जा हो सके।

जिससे वो अपने पैसों को तेज रफ्तार से बढ़ाने के लिए जमीनों के खेल को खेल सकें। इसी कारण सिरोही जैसे बिना आधारभूत सुविधाओं वाले सबसे पिछले जिला मुख्यालय पर जमीनों के दाम आसमान को छू गए।

फिलहाल शराब तस्कर आनन्दपालसिंह जिस जगह से पकड़ा गया वहां पर सिरोही जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के प्रत्याशियों के होने की जानकारी सामने आ रही है। तो क्या सोसायटियों के खतम होने के बाद ग्रामीण सरकार में शराब माफिया कब्जा जमाने की जुगत में थे। ये सवाल सिरोही की राजनीति में कौंधने लगा है।
-आखिर इनकी मंशा क्या?
सोसायटिया निकायों में पैसा जमीनों के धंधे को फलाने फुलाने के लिए लगाती थी, शराब तस्करों द्वारा ग्रामीण सरकार में अपना पैसा लगाने के पीछे भी अपना काम फलने फूलने की वजह बताई जा रही है। 31 मई को सरूपगंज के निकट शराब की खेप की डंपिंक के बाद इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि सिरोही गुजरात में शराब तस्करी के लिए डंपिंग यार्ड के रूप में इस्तेमाल होता है।

ये डंपिंग अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में है। शराब की अवैध दुकानें भी ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में डंपिंग और अवैध दुकानों के संचालन में बाधा नहीं आने देने को भी इसकी वजह बताया जा रहा है।
-खुल पाएगा राजनीतिक आकाओं का राज?
आनंदपाल की गिरफ्तारी जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के ठीक बीच में होना कोई इत्तेफाक नहीं है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के बाद हॉर्स ट्रेडिंग में शराब तस्करी का पैसा नहीं लग पाए इसलिए भी इसे राजनीतिक साजिश के रूप में देखा जा रहा है।

लोगों का ये सवाल वाजिब भी है कि जो आनन्दपाल 31 मई से फरार है वो जिला परिषद और पंचायत समिति चुनावों के बीच कैसे हत्थे लगा? इससे पहले या बाद में क्यों नहीं? यदि वाकई आनन्दपाल राजनीतिक बाड़ाबंदी का हिस्सा था तो क्या आनन्दपाल के उन राजनीतिक आकाओं का खुलासा पुलिस कर पाएगी जिनके लिए वो कथित तौर पर राजनीति बाड़ाबंदी का काम कर रहा था।
-फरारी के बाद भी पुलिस को सूचना नहीं देना भी अपराध
आनन्दपालसिंह जून महीने में ही नामजद हो गया था। जिसकी वजह से जिले का पूरा पुलिस महकमे को सजा मिल गई। पुलिस अधीक्षक समेत कई थानाधिकारी और निचले स्तर के पुलिस कार्मिकों को विभागीय सजा मिल गई। उसकी फरारी की जानकारी होने पर भी ये जानकारी पुलिस को नहीं देना भी एक अपराध है। यदि इस फरारी काल में आनन्दपाल जिले के रसूखदारों के संपर्क में रहा है तो क्या पुलिस के हाथ उन तक भी पहुुंच पाएंगे?