Warning: Constant WP_MEMORY_LIMIT already defined in /www/wwwroot/sabguru/sabguru.com/18-22/wp-config.php on line 46 Sabguru News - 7250 का पृष्ठ 7094 -
आगरा| विश्व धरोहर ताजमहल गुरुवार से पर्यटकों के लिए 30 मिनट पहले खुलेगा। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने कहा कि 17वीं शताब्दी की धरोहर की प्राकृतिक प्रकाश में सुरक्षा जांचों के लिए गुरुवार से आधे घंटे पहले खोला और आधे घंटे पहले बंद किया जाएगा। सूर्योदय से आधे घंटे पहले खोले जाने से पर्यटक उगते सूरज के साथ ताज का दीदार कर सकेंगे जो उनके लिए एक यादगार अनुभव होगा। एएसआई प्रमुख भुवन विक्रम ने कहा कि यह निर्णय पर्यटकों की लगातार आने वाली मांगों को देखते हुए लिया गया है। अधिकारियों ने कहा कि एएसआई ताज में 15 साल से कम आयु के बच्चों सहित दैनिक 40,000 पर्यटकों को ही प्रतिदिन प्रवेश की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। इस पर अगले महीने घोषणा होने की संभावना है। टिकट की दरों में भी संशोधन किया जाएगा।
Disappointed with Supreme Court verdict on Padmavat: Karani Sena
जयपुर| ‘श्री राजपूत करणी सेना’ ने मंगलवार को कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ को प्रतिबंधित करने की मांग खारिज करने से उन्हें निराशा हुई है। संगठन की चित्तौड़गढ़ इकाई के अध्यक्ष ने दावा किया कि ‘जौहर’ करने के लिए पंजीकरण करा चुकीं 1900 से भी ज्यादा महिलाएं तैयार बैठी हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राजस्थान और मध्य प्रदेश की फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की याचिका खारिज करने का फैसला करने के बाद संगठन के अगुआ लोकेंद्र सिंह कल्वी ने कहा, मुझे यह जानकर दु:ख हुआ कि सर्वोच्च न्यायालय ने जन भावनाओं का सम्मान नहीं किया है।उन्होंने कहा, अब हम जनता की अदालत में खड़े हैं और हमें विश्वास है कि फिल्म का पूर्ण बहिष्कार करने में वह हमारा समर्थन करेगी।
उन्होंने कहा कि वे मात्र इतना चाहते थे कि नौ इतिहासकारों को फिल्म दिखाई जाए। फिल्मकारों ने मात्र तीन इतिहासकारों को फिल्म दिखाई थी।इस दौरान संगठन की चित्तौड़गढ़ इकाई के एक वरिष्ठ प्रवक्ता ने कहा कि रानी पद्मावती के शहर के लोग सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से निराश हैं।उन्होंने कहा, हम चाहें तो हिसंक रास्ता अपनाकर लोगों और पर्यटकों को परेशान कर सकते हैं, लेकिन हमारी महिलाओं ने बिना किसी को परेशान किए ‘जौहर’ करने का निर्णय लिया है।
उन्होंने दावा किया कि ‘जौहर’ के स्थान पर लकड़ियां जमा कर दी गई हैं और ‘जौहर’ के लिए 1908 महिलाओं ने पंजीकरण कराया है।प्रशासनिक अधिकारी इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं या बात करने से बच रहे हैं।’पद्मावत’ गुरुवार को रिलीज हो रही है। करणी सेना का आरोप है कि भंसाली की फिल्म में इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
वाशिंगटन। अमरीका के अलास्का खाड़ी में मंगलवार को 7.9 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है और तटीय क्षेत्रों के लोगों को ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए कहा गया है।
बांदा | उत्तर प्रदेश में बांदा नगर के बाकरगंज मुहल्ले में एक युवक ने अपनी प्रेमिका को कथित तौर पर आग के हवाले कर दिया। नगर कोतवाल ताराचंद्र ने मंगलवार को बताया कि आग से जली 18 वर्षीय एक युवती को जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। युवती कुछ भी बताने की स्थिति में नहीं है। कोतवाल ने बताया कि युवती के परिजन मुंबई में रहकर मजदूरी करते हैं और वह यहां अपनी छोटी बहन के साथ रहती है। कोतवाल के अनुसार, पीड़िता की बहन ने बताया कि युवती का एक युवक से प्रेम प्रसंग चल रहा है।
घटना से पहले युवक उसके घर आया था। कुछ देर बातचीत करने के बाद दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद युवक ने कथित रूप से युवती को आग के हवाले कर दिया और फरार हो गया। उन्होंने पीड़िता की बहन के हवाले से बताया कि इस घटना में प्रेमी के भी हाथ झुलस गए हैं। जिला चिकित्सालय में डॉ. विनीत सचान ने बताया कि अस्सी प्रतिशत जल चुकी युवती की हालत गंभीर बनी हुई है। पुलिस मामले की जांच कर आरोपी की तलाश कर रही है।
वाशिंगटन| अमेरिका ने पाकिस्तान से तालिबान के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने का आग्रह किया है। वाशिंगटन की यह प्रतिक्रिया तालिबान द्वारा पिछले सप्ताह काबुल के होटल में हुए आतंकवादी हमले की जिम्मेदारी लेने के बाद आई है, जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी। तालिबान आतंकवादियों ने शनिवार को काबुल के इंटरकॉन्टिनेंटल होटल पर हमला किया था। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव सारा सैंडर्स ने सोमवार को मीडिया को संबोधित करते हुए कहा, हम पाकिस्तान से तालिबान नेताओं की तत्काल गिरफ्तारी या उन्हें खदेड़ने का आह्रान करते हैं। पाकिस्तान द्वारा आतंकवादी समूह को अपनी भूमि का उपयोग करने से रोका जाना चाहिए।
सैंडर्स ने कहा, नागरिकों के खिलाफ हमले हमारे अफगान सहयोगियों के साथ काम करने के वॉशिंगटन के संकल्प को और मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा, अफगानिस्तान की सेना हमारे समर्थन के साथ दुश्मनों के पीछे पड़ी रहेगी, जो दुनिया भर में आतंक का निर्यात करना चाहते हैं। वहीं, पाकिस्तान ने इस हमले की कड़ी निंदा कर आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई कर रहे देशों के बीच सहयोग की जरूरत पर बल दिया था।
Jubilee Special: Netaji Subhash Chandra Bose’s unique love story
ये 1934 का साल था| सुभाष चंद्र बोस उस वक्त ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में थे| उस वक्त तक उनकी पहचान कांग्रेस के योद्धा के तौर पर होने लगी थी| सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान जेल में बंद सुभाष चंद्र बोस की तबीयत फरवरी, 1932 में ख़राब होने लगी थी| इसके बाद ब्रिटिश सरकार उनको इलाज के लिए यूरोप भेजने पर मान गई थी| विएना में इलाज कराने के साथ ही उन्होंने तय किया कि वे यूरोप रह रहे भारतीय छात्रों को आज़ादी की लड़ाई के लिए एकजुट करेंगे| बोस के दोस्त डॉ| माथुर ने उन्हें दो लोगों का रिफ़रेंस दिया| बोस ने दोनों के बारे में मिली जानकारी के आधार पर बेहतर उम्मीदवार को बुलाया, लेकिन इंटरव्यू के दौरान वे उससे संतुष्ट नहीं हुए| ये दूसरी उम्मीदवार थीं, 23 साल की एमिली शेंकल| बोस ने इस ख़ूबसूरत ऑस्ट्रियाई युवती को जॉब दे दी| एमिली ने जून, 1934 से सुभाष चंद्र बोस के साथ काम करना शुरू कर दिया|
1934 में सुभाष चंद्र बोस 37 साल के थे और इस मुलाकात से पहले उनका सारा ध्यान अपने देश को अंग्रेजों से आज़ाद करने पर था| लेकिन सुभाष चंद्र बोस को अंदाजा भी नहीं था कि एमिली उनके जीवन में नया तूफ़ान लेकर आ चुकी हैं| सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पोते सुगत बोस ने सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर ‘हिज़ मैजेस्टी अपोनेंट- सुभाष चंद्र बोस एंड इंडियाज स्ट्रगल अगेंस्ट एंपायर’ किताब लिखी है| इसमें उन्होंने लिखा है कि एमिली से मुलाकात के बाद सुभाष के जीवन में नाटकीय परिवर्तन आया|
सुगत बोस के मुताबिक इससे पहले सुभाष चंद्र बोस को प्रेम और शादी के कई ऑफ़र मिले थे, लेकिन उन्होंने किसी में दिलचस्पी नहीं ली थी| लेकिन एमिली की ख़ूबसूरती ने सुभाष पर मानो जादू सा कर दिया| सुगत बोस ने अपनी पुस्तक में एमिली के हवाले से लिखा है, प्यार की पहल सुभाष चंद्र बोस की ओर से हुई थी और धीरे धीरे हमारे रिश्ते रोमांटिक होते गए| 1934 के मध्य से लेकर मार्च 1936 के बीच ऑस्ट्रिया और चेकेस्लोवाकिया में रहने के दौरान हमारे रिश्ते मधुर होते गए|
26 जनवरी, 1910 को ऑस्ट्रिया के एक कैथोलिक परिवार में जन्मी एमिली के पिता को ये पसंद नहीं था कि उनकी बेटी किसी भारतीय के यहां काम करे लेकिन जब वे लोग सुभाष चंद्र बोस से मिले तो उनके व्यक्तित्व के कायल हुए बिना नहीं रहे| सुभाष और एमिली ने शुरूआत से ही स्वीकर कर लिया था कि उनका रिश्ता बेहद अलग और मुश्किल रहने वाला है| एक-दूसरे को लिखे खतों में दोनों एक दूसरे के लिए जिस संबोधन का इस्तेमाल करते हैं, उससे ये ज़ाहिर होता है| एमिली उन्हें मिस्टर बोस लिखती हैं, जबकि बोस उन्हें मिस शेंकल या पर्ल शेंकल|
ये हक़ीक़त है कि पहचान छुपा कर रहने की बाध्यता और सैनिक संघर्ष में यूरोपीय देशों से मदद मांगने के लिए भाग दौड़ करने के चलते सुभाष अपने प्यार भरे रिश्ते लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरतते होंगे| लेकिन एमिली को लेकर उनके अंदर कैसा भाव था, इसे उस पत्र से समझा जा सकता है, जिसे आप सुभाष चंद्र बोस का लिखा लव लेटर कह सकते हैं|
माय डार्लिंग, समय आने पर हिमपर्वत भी पिघलता है, ऐसा भाव मेरे अंदर अभी है| मैं तुमसे कितना प्रेम करता हूं, ये बताने के लिए कुछ लिखने से खुद को रोक नहीं पा रहा हूं| जैसा कि हम एक-दूसरे को आपस में कहते हैं, माय डार्लिंग, तुम मेरे दिल की रानी हो| लेकिन क्या तुम मुझसे प्यार करती हो| मुझे नहीं मालूम कि भविष्य में क्या होगा| हो सकता है पूरा जीवन जेल में बिताना पड़े, मुझे गोली मार दी जाए या मुझे फांसी पर लटका दिया जाए| हो सकता है मैं तुम्हें कभी देख नहीं पाऊं, हो सकता है कि कभी पत्र नहीं लिख पाऊं- लेकिन भरोसा करो, तुम हमेशा मेरे दिल में रहोगी, मेरी सोच और मेरे सपनों में रहोगी| अगर हम इस जीवन में नहीं मिले तो अगले जीवन में मैं तुम्हारे साथ रहूंगा|
इस पत्र के अंत में सुभाष ने लिखा है कि मैं तुम्हारे अंदर की औरत को प्यार करता हूं, तुम्हारी आत्मा से प्यार करता हूं, तुम पहली औरत हो जिससे मैंने प्यार किया| पत्र के अंत में सुभाष ने इस पत्र को नष्ट करने का अनुरोध भी किया था, लेकिन एमिली ने इस पत्र को संभाल कर रखा| सुभाष की मनोदशा उस दौरान किस तरह की थी, ये अप्रैल या मई, 1937 में एमिली को भेजे एक पत्र से ज़ाहिर होता है, जो उन्होंने कैपिटल अक्षरों में लिखा है|
उन्होंने लिखा था, पिछले कुछ दिनों से तुम्हें लिखने को सोच रहा था| लेकिन तुम समझ सकती हो कि मेरे लिए तुम्हारे बारे में अपने मनोभावों को लिखना कितना मुश्किल था| मैं तुम्हें केवल ये बताना चाहता हूं कि जैसा मैं पहले था, वैसा ही अब भी हूं| एक भी दिन ऐसा नहीं बीता है, जब मैंने तुम्हारे बारे में नहीं सोचा था| तुम हमेशा मेरे साथ हो| मैं किसी और के बारे में सोच भी नहीं सकता| मैं तुम्हें ये भी नहीं बता सकता कि इन महीनों में मैं कितना दुखी रहा, अकेलापन महसूस किया| केवल एक चीज़ मुझे ख़ुश रख सकती है, लेकिन मैं नहीं जानता कि क्या ये संभव होगा| इसके बाद भी दिन रात मैं इसके बारे में सोच रहा हूं और प्रार्थना करता हूं कि मुझे सही रास्ता दिखाएं| इन पत्रों में ज़ाहिर अकुलाहट के चलते ही जब दोनों अगली बार मिले तो सुभाष और एमिली ने आपस में शादी कर ली| ये शादी कहां हुई, इस बारे में एमिली ने कृष्णा बोस को बताया कि 26 दिसंबर, 1937 को, उनकी 27वीं जन्मदिन पर ये शादी आस्ट्रिया के बादगास्तीन में हुई थी|
ये शादी इतनी गोपनीय थी कि उनके बादगास्तीन रहने के दौरान ही उनके भतीजे अमिय बोस भी उनसे मिलने पहुंचे थे, लेकिन उन्हें एमिली महज अपने चाचा की सहायक भर लगी थीं| तीन बार सासंद रहीं और शरत चंद्र बोस के बेटे शिशिर कुमार बोस की पत्नी कृष्णा बोस ने सुभाष और एमिली की प्रेम कहानी पर ‘ए ट्रू लव स्टोरी- एमिली एंड सुभाष’ लिखी है, जिसमें सुभाष और शेंकल के बीच के प्रेम संबंधों का दिलचस्प विवरण मिलता है| सुभाष चंद्र बोस, एमिली को प्यार से बाघिनी कहकर भी बुलाया करते थे| हालांकि इस बात के भी उदाहरण मिलते हैं कि एमिली इंटेलेक्ट के मामले में सुभाष के आस पास नहीं थीं और सुभाष जब तब इसे ज़ाहिर भी कर देते थे|
सुभाष के कहने पर एमिली ने द हिंदु और मॉर्डन रिव्यू के लिए कुछ लेख लिखे थे, लेकिन वो समाचारों के विश्लेषण करने में सहज नहीं थीं, सुभाष कई बार उनसे कहा करते थे, तुम्हारा लेख ठीक नहीं था, उसे नहीं छापा गया है| 12 अगस्त, 1937 को लिखे एक पत्र में सुभाष एमिली को लिखते हैं, तुमने भारत के बारे में कुछ किताबें मंगाई हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता है कि इन किताबों को तुम्हें देने का कोई मतलब है| तुम्हारे पास जो किताबें हैं, वो भी तुमने नहीं पढ़ी हैं|
इन दोनों की प्रेम की निशानी के तौर 29 नवंबर, 1942 को बेटी का जन्म हुआ, जिसका नाम अनीता रखा गया| इटली के क्रांतिकारी नेता गैरीबाल्डी की ब्राजीली मूल की पत्नी अनीता गैरीबाल्डी के सम्मान में| अनीता अपने पति के साथ कई युद्धों में शामिल हुई थीं और उनकी पहचान बहादुर लड़ाका की रही है| सुभाष अपनी बेटी को देखने के लिए दिसंबर, 1942 में विएना पहुंचते हैं और इसके बाद अपने भाई शरत चंद्र बोस को बंगाली में लिखे खत में अपनी पत्नी और बेटी की जानकारी देते हैं| इसके बाद सुभाष उस मिशन पर निकल जाते हैं, जहां से वो फिर एमिली और अनीता के पास कभी लौट कर नहीं आए| एमिली सुभाष चंद्र बोस की यादों के सहारे 1996 तक जीवित रहीं और उन्होंने एक छोटे से तार घर में काम करते हुए सुभाष चंद्र बोस की अंतिम निशानी अपनी बेटी अनीता बोस को पाल पोस कर बड़ा कर जर्मनी का मशहूर अर्थशास्त्री बनाया|
HAPPY BIRTHDAY: Ramesh Sippy was ready to change Sholay’s climax
रमेश सिप्पी को ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ के निर्देशक के तौर पर जाना जाता है| रमेश सिप्पी का जन्म 23 जनवरी 1947 को हुआ था| उनके पिता जी|पी सिप्पी भी एक जानेमाने प्रोड्यूसर और डायरेक्टर थे| रमेश सिप्पी ने अपने करियर कर शुरुआत मात्र 9 साल से की थी, जब साल 1953 की फिल्म ‘शहंशाह’ में अचला सचदेव के बेटे का किरदार निभाया था| रमेश सिप्पी ने शान और सीता और गीता जैसी हिट फिल्में भी बनाई हैं| रमेश सिप्पी ने अपने इंटरव्यू में ‘शोले’ से जुड़ी कई दिलचस्प बातें शेयर की है| मैं भाग्यशाली था कि शोले बनाने के दौरान मेरे पिताजी मेरे साथ थे| मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं इसे बना सकूं| उस समय यह सिर्फ 3 करोड़ में बनी थी| रमेश सिप्पी बताते हैं,’ मुझे याद है जब दिलीप कुमार ने एक फिल्म के लिए एक लाख रुपये की फीस ली तो हर किसी ने यही कहा कि फिल्म इंडस्ट्री बंद होनेवाली है| उन्होंने बताया था,’ शोले बनाने में कुल खर्च तीन करोड़ रुपये आया था और स्टार कास्ट कर फीस मात्र 20 लाख रुपये| आज के समय में अगर आप 150 करोड़ रुपये की फिल्म बनाते हैं तो उसमें से 100 करोड़ रुपये तो स्टार कास्ट में ही लग जाते हैं| ‘शोले’ के रिलीज के दो दिन बाद ही रमेश सिप्पी ने इसका क्लाइमेक्स बदलने का फैसला कर लिया था|
जब ‘शोले’ रिलीज हुई तो शुक्रवार और शनिवार को बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म कमाई के मामले में पूरी तरह से असफल रही थी| फिल्म का यह हाल देख रिलीज के दो दिन बाद ही रविवार को रमेश सिप्पी ने अपने घर में मीटिंग बुलाई| इस मीटिंग में लेखक सलीम-जावेद को भी बुलाया गया था| फिल्म के कमजोर प्रदर्शन का यह अर्थ निकाला गया कि शायद अंत में अमिताभ के किरदार की मौत को दर्शक पसंद नहीं कर रहे हैं| ऐसे में फिल्म का क्लाइमेक्स बदलने के लिए रमेश सिप्पी तैयार हो गये थे|
देश की सबसे बड़ी दोपहिया वाहन कंपनी हीरो Motocorp अपनी नई स्पोर्ट्सबाइक XF3R को ऑटो एक्सपो 2018 में पेश करने की तैयारी कर चुकी है। इस बाइक का सीधा मुकाबला Bajaj Dominer और जल्द लॉन्च होने वाली बीएमडब्ल्यू G310 R से रहेगा। यह हीरो Motocorp की सबसे महंगी बाइक होगी। इंजन की बात करें तो हीरो XF3R में 300सीसी का सिंगल सिलिंडर इंजन दिया होगा। यह इंजन कितनी पावर और टॉर्क जेनरेट करेगा इसका खुलासा नहीं किया गया है। बाइक के साथ 5 और 6 स्पीड गियरबॉक्स दिया जाएगा।
Results of IBPS RRB OFFICE ASSISTANTANT MAIN EXAM 2017
नई दिल्ली। इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सोनल सलेक्शन (IBPS) रीजनल रूरल बैंक (RRB) ऑफिस असिस्टेंट 2017 की मुख्य परीक्षा का रिजल्ट आज घोषित हो सकता है। रिजल्ट इसकी वेबसाइट www.ibps.in पर जारी होंगे। मुख्य परीक्षा 12 नवंबर को आयोजित कराई गई थी। सूत्रों के अनुसार परिणाम आज या फिर इस हफ्ते जारी हो सकते हैं। परिणाम IBPS की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी होंगे। ऑफिस असिस्टेंट पदों पर भर्ती मुख्य परीक्षा की मेरिट लिस्ट के आधार पर ही किया जाएगा। इसमें इंटरव्यू नहीं होगा। मुख्य परीक्षा के आधार पर कुल 8,518 पदों पर भर्तियां की जाएंगी।
सर्दियों के मौसम में स्वस्थ रहने के लिए शरीर को अंदर से गर्म रखने की ज़रूरत होती है| पर क्या आपको पता है की अगर आप सर्दियों के मौसम में नियमित रूप से एक छोटा खजूर खाते हैं तो इससे आपका शरीर हमेशा स्वस्थ रह सकता है| खजूर में भरपूर मात्रा में आयरन, मिनरल, कैल्शियम, अमिनो एसिड, फास्फोरस मौजूद होते हैं|
– अगर आप नियमित रूप से खजूर का सेवन करते हैं तो इससे आपके शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है| इसके अलावा इसमें भरपूर मात्रा में ग्लूकोज और फ्रुक्टोज भी मौजूद होता है जो आपकी इम्युनिटी पावर को मजबूत बनता है|
– दिल के लिए भी खजूर का सेवन बहुत फायदेमंद होता है, इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होता है जो आपके दिल को मजबूत और सेहतमंद बनाने का काम करते हैं|
– खजूर में फाइबर की भरपूर मात्रा मौजूद होने के कारण इसके सेवन से पाचनतंत्र मजबूत बनता है, जिससे कब्ज़ की समस्या से आराम मिलता है|