काठमांडू। नेपाल में तिब्बत सीमा के पास बुधवार को अचानक आयी बाढ़ की चपेट में आने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है जबकि 105 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता बताए जा रहे हैं।
नेपाल पुलिस द्वारा जारी बुलेटिन में कहा गया है कि रसुवा में आई विनाशकारी बाढ़ के कारण स्थानीय समय के अनुसार अपराह्न 3.45 बजे तक 18 लोगों की मौत हो चुकी है। रसुवा में एक, नुवाकोट में सात, धादिंग में छह और गोरखा में चार शव बरामद हुए हैं।
घटना में कम से कम 384 पर्यटक और यात्रियों के लापता होने की सूचना है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार लापता यात्रियों में 105 भारतीय पर्यटक भी शामिल है। इसके अलावा नेपाल, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिक शामिल हैं।
बोर्ड ने बताया कि नेपाल में रह रहे 37 प्रवासी भारतीयों के बारे में भी अभी कोई सूचना नहीं है। कई अन्य लापता लोगों की राष्ट्रीयता की अभी पुष्टि नहीं हुई है। प्रभावित क्षेत्र में मौजूद या वहां से गुजर रहे लोगों की स्थिति का पता लगाने के लिए सीमा के दोनों ओर खोज एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है।
बाढ़ में पुलिस थाने, सीमा शुल्क केंद्र और निजी मकानों समेत कई ढांचे बह गए हैं। अधिकारियों ने मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है। नेपाल से सामने आ रहे वीडियो में स्थिति काफी भयावह दिख रही है। बड़ी-बड़ी इमारतें, मकान, पुल और गाड़ियां बाढ़ के पानी में बहती नजर आ रही हैं। नेपाल सरकार ने स्थिति की समीक्षा और आगे की रणनीति के लिए मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह के फोन पर बात कर बाढ़ में हुई जनहानि पर दुख जताया है। उन्होंने कहा कि भारत आपदा की इस घरी में अपने नेपाली भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़ा है और हरसंभव मानवीय सहायता देने के लिए तैयार है।
चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार तिब्बत में ग्यिरोंग बंदरगाह के पास भी बड़े पैमाने पर भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क, संचार और बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। वहां भी कई लोगों के लापता होने की आशंका है।
भारत की सीमा से सटे चितवन समेत निचले इलाकों के लोगों के लिए आपात चेतावनी जारी की गई है। बचाव दलों को तैनात किया गया है जिनमें हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं। सुरक्षा बलों और स्थानीय लोग भी राहत एवं बचाव अभियान में मदद कर रहे हैं।
नेपाल सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता शैलेंद्र थापा ने कहा कि भोटेकोशी नदी के ऊपरी क्षेत्र में ग्लेशियर झील के फटने (जीएलओएफ) की घटना बाढ़ और तबाही का संभावित कारण हो सकती है। आपदा में घायलों के इलाज के लिए काठमांडू के सरकारी अस्पतालों और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा संचालित चिकित्सा केंद्रों को तैयार रखा गया है।
बुलेटिन में कहा गया है कि नेपाल पुलिस अस्पताल के तकनीकी पुलिस वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. छन्द बुढाथोकी के नेतृत्व में नौ चिकित्सकों की टीम एंबुलेंस और आवश्यक चिकित्सा सामग्री के साथ रसुवा के लिए रवाना हो चुकी है। साथ ही, घायलों के उपचार के लिए नेपाल पुलिस अस्पताल को भी तैयार रखा गया है।
रसुवागढ़ी क्षेत्र लांगटांग क्षेत्र की ओर जाने वाले पर्यटकों और ट्रेकर्स के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। इसका इस्तेमाल चीन जाने वाले यात्रियों द्वारा भी किया जाता है, जिनमें कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की यात्रा करने वाले लोग शामिल हैं।



