अजमेर। अजमेर सेंट्रल जेल में तैनात एक मुख्य प्रहरी के पास से 294 संदिग्ध सफेद गोलियां मिलने का मामला सामने आया है। जेल प्रशासन ने सूचना के आधार पर तलाशी के दौरान गोलियां बरामद होने के बाद संबंधित प्रहरी को ड्यूटी से हटा दिया है। मामले में सिविल लाइंस थाना पुलिस ने कारागार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। बरामद गोलियां नशीली हैं या किसी अन्य श्रेणी की दवा, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
दो पार्सल में रखी थीं 294 गोलियां
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य प्रहरी करतार चौधरी के पास संदिग्ध गोलियां होने की सूचना मिलने पर 28 अक्टूबर को जेल प्रशासन ने उसके घर पर तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसकी पैंट की दाहिनी जेब में काले रंग की थैली के भीतर टेप से पैक किए गए दो पार्सल मिले।
रिपोर्ट के मुताबिक, पहले पार्सल में 98 सफेद गोलियां थीं, जिनका वजन करीब 11.98 ग्राम बताया गया। दूसरे पार्सल में 196 गोलियां मिलीं, जिनका वजन करीब 24.03 ग्राम था। इस तरह दोनों पार्सलों में कुल 294 गोलियां मिलीं, जिनका कुल वजन लगभग 39.68 ग्राम दर्ज किया गया।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई
जेल अधीक्षक आर अनंतेश्वर के अनुसार गोलियों के संबंध में मुख्य प्रहरी से पूछताछ की गई, लेकिन वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद जेल प्रशासन ने संदिग्ध सामग्री को सील कर पुलिस को रिपोर्ट सौंपी।
प्रारंभिक जांच के दौरान गोलियां जेल के चिकित्सक को भी दिखाई गईं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, केवल देखकर उनकी प्रकृति की पुष्टि नहीं हो सकी। यह स्पष्ट होने के लिए चिकित्सकीय परीक्षण और आवश्यक जांच रिपोर्ट का इंतजार है कि गोलियां प्रतिबंधित या नशीली हैं अथवा नहीं।
पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच जारी
जेल प्रशासन की शिकायत पर सिविल लाइंस थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जेल प्रशासन ने मुख्य प्रहरी को ड्यूटी से हटाने के साथ मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को भी भेजी है।
अब जांच में बरामद गोलियों की प्रकृति, उनके स्रोत और उन्हें रखने के उद्देश्य से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। फिलहाल गोलियों के नशीले होने या जेल के भीतर उनकी आपूर्ति से जुड़े किसी नेटवर्क की भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है।
अजमेर सेंट्रल जेल से पहले भी प्रतिबंधित सामग्री मिलने और कथित नशीली गोलियों की आपूर्ति से जुड़े मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में ताजा प्रकरण ने जेल की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, इस मामले में मुख्य प्रहरी की भूमिका और बरामद सामग्री से जुड़े सभी तथ्य पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।



