सत्ता के बल पर परिवर्तन नहीं आ सकता : RSS क्षेत्र प्रचारक निंबाराम

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उदयपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के क्षेत्रीय प्रचारक निंबाराम ने कहा है कि सत्ता के बल पर परिवर्तन नहीं आ सकता, सत्ता अनुकूल रहनी चाहिए, प्रतिकुल नहीं होनी चाहिए।

निंबाराम सोमवार को यहां राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के 40वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि साधक हो बाधक न हो, परिवर्तन समाज बदलने से आयेगा। हर व्यक्ति को समाज में अपनी भूमिका अदा करनी होगी जिसकी शुरूआत अपने आप से एवं अपने घर से करनी होगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2027 में विकसित भारत में मेरी क्या भूमिका है इस पर विचार करना होगा।

मातृभूमि को सर्वाेपरि मानते हुए उन्होंने राष्ट्रप्रेम के साथ तकनीकी और वैज्ञानिक विकास को समावेशी रूप देने का संदेश दिया और एक उन्नत, सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना प्रस्तुत की। संस्कारों, भारतीय मूल्यों और धर्मयुक्त स्वदेशी विचारों से समृद्ध भारत के निर्माण का उनका यह स्वप्न अब भी अधूरा है, जिसे पूर्ण करने की जिम्मेदारी हम सभी की है।

निंबाराम ने कहा कि भारत युवाओं का देश है। उन्होंने नरेंद्र से विवेकानंद स्वामी बनने की यात्रा में राजस्थान की भूमिका को रेखांकित करते हुए विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद की ऐतिहासिक सहभागिता और भारत के गौरवपूर्ण प्रतिनिधित्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के आधार पर स्वावलंबन की दिशा में कार्य करना वर्तमान की प्रमुख आवश्यकता है।

बेरोजगारी की समस्या के समाधान श्रम के प्रति श्रद्धा विकसित करना आवश्यक है। युवाओं में स्वबोध और स्वावलंबन के विचारों का बीजारोपण करके, उन्हें कौशलयुक्त बनाकर ही विकसित और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव है। युवाओं को रोजगार लेने वाला नहीं, रोजगार देने वाला बनाना होगा।

आरंभ में अतिथियों का स्वागत करते हुए कुलपति प्रो. शिवसिंह सारंगदेवोत ने कहा कि स्थापना दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि विचार, मूल्यों, राष्ट्र चिंतन और राष्ट्र प्रेम के भाव पर मनन करने का महत्वपूर्ण दिवस है। यह जनुभाई के चार दशकों की यात्रा पूरी होने का उत्सव है।

उन्होंने कहा कि जनुभाई ने 21 अगस्त, 1937 को संस्थान की नींव रखी थी और 50 वर्ष बाद 12 जनवरी 1987 को विश्वविद्यालय के रूप में क्रमोनत हुआ। उनका ध्येय केवल शिक्षा या साक्षर करने का न रह कर, संस्कारित शिक्षा देने का रहा। जनुभाई का ध्येय वाक्य है सरस्वती देवयंतों हवन्तं, हम ऐसी शिक्षा दे जिससे युवाओं में देवत्व, मनुष्यत्व जागृत हो।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र का निर्माण नागरिकों के आचरण से होता है, जिसे ‘पंच परिवर्तन’ के माध्यम से दिशा और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। पंच परिवर्तन में स्वदेशी एवं आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, नागरिक कर्तव्य बोध और पारिवारिक संस्कार जैसे मूल तत्व शामिल हैं।

समारोह के विशिष्ट अतिथि सलाहकार राज्यपाल उच्च शिक्षा प्रो. कैलाश सोडाणी ने स्थापना दिवस पर विद्यापीठ की विकास यात्रा, परंपरा और नवाचार अपनाने के लिए सराहना की। उन्होंने कहा कि युवा दिवस के मौके पर स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कार, ज्ञान और संस्कृति को पूरे विश्व के सामने रख कर राष्ट्र गौरव का प्रभाव सभी को दिखाया।