इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री एवं पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के नेता इमरान खान ने उपहार की कथित हेराफेरी से जुड़े मामले में सजा को निलंबित करने तथा मेडिकल और मानवीय आधार पर जमानत पर रिहा करने की मांग को लेकर शनिवार को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में अर्जी दी।
खान की याचिका उनकी दाहिनी आंख की लगभग 85 प्रतिशत रोशनी खोने और दृष्टिहीनता की रिपोर्टों के बीच आई है। पूर्व प्रधानमंत्री ने पार्टी कार्यकर्ता एवं बैरिस्टर सलमान सफदर और सलमान अकरम रजा के माध्यम से एक विविध आवेदन दायर किया है, जिसमें उनकी सजा को तत्काल निलंबित करने और उनकी जमानत की याचिका मंजूर करने की मांग की गई है।
द न्यूज़ इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी को तोशखाना-2 मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों में 17 साल जेल की सजा सुनायी गयी थी। इसमें कीमती सरकारी सामान की कम कीमत पर खरीद-फरोख्त का आरोप था। इसके अलावा, एक अलग एप्लीकेशन भी दी गई है जिसमें हाई-प्रोफाइल अल-कादिर ट्रस्ट केस या 19 करोड़ ब्रिटिश पाउंड (करीब 23 अरब 48 करोड़ रुपए) के घोटाले में सजा निलंबित करने की मांग वाली अर्जी पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया गया है।
विविध आवेदन में कहा गया है कि याचिकाकर्ता इमरान दाहिनी आंख की गंभीर बीमारी से पीड़ित है। इसमें यह भी जोड़ा गया है कि याचिकाकर्ता के पास मामले के गुण-दोष के आधार पर और साथ ही हाल ही में माननीय पाकिस्तान उच्चतम न्यायालय के समक्ष सुनवाई के दौरान जो चिकित्सीय आधार सामने आये हैं, उन आधारों पर सजा निलंबित करने के लिए यह असाधारण रूप से मजबूत मामला है।
वकील ने कहा कि पीटीआई संस्थापक की दाहिनी आंख में खून जमा हो जाने की वजह से स्थिति बहुत खराब हो गयी है, जिससे उनकी दाहिनी आंख में सिर्फ 15 प्रतिशत विजन बचा है। आवेदन में लिखा गया है कि चिकित्सा जटिलता इतनी ज्यादा गंभीर है कि उसका इलाज जेल में नहीं किया जा सकता।
आवेदन के मुताबिक तोशखाना-2 मामले में याचिकाकर्ता को दोषी ठहराना ‘राजनीतिक उत्पीड़न के चल रहे अभियान’ का हिस्सा है। अर्जी में आगे दावा किया गया कि जेल जाने के बाद से इमरान खान और उनकी पत्नी पर अलग-अलग जगहों पर कई मामले हैं, जो ‘सतत और लक्षित कानूनी कार्रवाई’ को दर्शाता है।
आवेदन में यह भी दावा किया गया है कि नेशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (एनएबी), फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एफआईए), पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) और अन्य जांच एजेंसियों को याचिकाकर्ता के राजनीतिक विरोधियों ने स्पष्ट रूप से एक राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया है और इन संसाधनों का बार-बार इस्तेमाल राजनीतिक हिसाब चुकता करने के लिए इस्तेमाल किया है।



