आबूरोड में बढती डाॅग बाईट्स, प्रशासक और ईओ की न्यायिक अवमानना!

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DEMO PIC stray Dogs

सबगुरु न्यूज-आबूरोड। आबूरोड में डाॅग बाईट्स के केस बढ रहे हैं। ऐसा कांग्रेस के नेताओं के द्वारा प्रशासन को दिए गए ज्ञापन के समाचारों से प्रतीत हो रहा है। लेकिन, आबूरोड में प्रशासक और अधिशासी अधिकारी के द्वारा इस ओर बरती जा रही लापरवाही सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान हाईकोर्ट के उन आदेशों की अवमानना की श्रेणी में आता है जिसमें उन्होंने आवारा कुत्तों को सार्वजनिक जगहों से हटाने और बध्याकरण के आदेश दिए थे। आबूरोड में यूआईटी और नगर पालिका दोनों ही जगहों पर कुत्तों पर नियंत्रण के लिए इस तरह का कोई काम नहीं किया गया। ऐसे में प्रशासक और अधिशासी अधिकारी न्यायिक अवमानना के दायरे में भी आ जा रहे हैं। जनवरी 2026 के आदेश में तो न्यायालय ने अधिकारियों की जिम्मेदारी और पीडितों को भारी मुआवजा देने जैसी सख्ती भी दिखाई थी।

– आकराभट्टा में बुजुर्ग पर हमला

आबूरोड में डाॅग लवर्स के कारण कुत्तों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आकराभट्टा जैसे इलाकों में तो इनकी संख्या इतनी ज्यादा हो चुकी है कि रिहायशी काॅलोनियों के हर चैराहे पर इनका जमावडा दिख जाता है। कांग्रेस नेता अजय बंजारा ने आबूरोड के प्रशासक को सौंपे ज्ञापन में बताया कि आकराभट्टा में हाल ही में दुकान खोल रहे एक बुजुर्ग पर कुत्तों ने हमला करके लहूलुहान कर दिया था। इस बुजुर्ग को मुआवजा देने और आवारा कुत्तों के बध्याकरण की मांग की गई। ये हालात गांधी नगर, मानपुर, सदर बाजार, रीको, तलहटी समेत सभी इलाकों में है।

-लापरवाही तो नहीं

आकराभट्टा में बुजुर्ग को कुत्ते के द्वारा काटने की घटना समाचारों पत्रों में प्रमुखता से आई। इसके बावजूद प्रशासक अंशु प्रिया और अधिशासी अधिकारी अनिल झिंगोनिया की नींद नहीं खुली। उन्होंने  मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए नगर पालिका कि तरफ से कोई पहल नहीं की। देखा जाए तो एक तरह से ये आवारा कुत्तों को लेकर सुप्रीम कोर्ट और राजस्थान उच्च न्यायालय की अवमानना और जनहित के मुद्दों पर इन दोनों अधिकारियों की घोर लापरवाही है। राजस्थान उच्च न्यायालय ने तो नगर निकायों के साथ-साथ यूआईटी को भी अपने क्षेत्र से आवारा कुत्तों के निवारण के आदेश दिए थे।

अंशु प्रिया लम्बे समय से आबूरोड यूआईटी की सचिव हैं जिला कलेक्टर यहां की अध्यक्ष। इसके बावजूद यूआईटी क्षेत्र में तो दोनों ने आवारा कुत्तों और अन्य चौ पाया जानवरों से सडकों को मुक्त करवाने के लिए कुछ प्रयास नहीं किए। राजनीतिक सरपरस्ती  बावजूद अनिल झिंगोनिया सिरोही नगर परिषद से एपीओ इसी कारण हुए थे कि उनके कार्यकाल में जिला चिकित्सालय से कुत्ते एक नवजात बच्चे को उठा ले गए थे और उसे मार दिया था।