पटना। बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की जीत के साथ राज्यसभा की सभी पांच सीटों पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने कब्जा जमा लिया है।
विधानसभा परिसर में आज सम्पन्न हुए मतदान और मतों की गिनती के बाद राजग के सभी पांच उम्मीदवार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन, शिवेश राम और उपेंद्र कुशवाहा विजयी घोषित किये गए। इस दौरान राजग के सभी 202 विधायकों ने मतदान में हिस्सा लिया, जबकि महागठबंधन के चार विधायक अनुपस्थित रहे, जिनमे कांग्रेस के तीन और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक विधायक का नाम शामिल है। कुल 239 विधायकों ने इस बार अपने मताधिकार का प्रयोग किया।
मतदान के लिए नहीं पहुंचने वाले कांग्रेस के तीन विधायकों में वाल्मीकि नगर के सुरेंद्र प्रसाद, फारबिसगंज से मनोज विश्वास और मनिहारी के मनोहर सिंह के नाम शामिल हैं। इसके अलावा राजद के विधायक फैसल रहमान ने भी मतदान में भाग नही लिया।
बिहार में आज सम्पन्न हुए राज्यसभा चुनाव में कुल छह उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के दो-दो, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एक-एक उम्मीदवार शामिल थे।
इस चुनाव में भाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और शिवेश राम, जदयू ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश और रामनाथ ठाकुर तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को मैदान में उतारा था। इन सभी उम्मीदवारों की जीत हुई। विपक्ष के प्रतिनिधि के रूप में महागठबंधन की तरफ से अमरेंद्र धारी सिंह मैदान में उतरे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें नौ अप्रैल को खाली हो रही हैं, जिनमें जदयू के रामनाथ ठाकुर और हरिवंश नारायण सिंह, राजद के अमरेंद्र धारी सिंह और प्रेमचंद गुप्ता तथा राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के नाम शामिल हैं।
चुनाव के बाद विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राजग पर राजनीतिक चालें चलने का आरोप लगाया, जबकि राजद उम्मीदवार और निवर्तमान राज्यसभा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह ने अपनी हार के बाद आरोप लगाया कि चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए राजग ने हॉर्स ट्रेडिंग का सहारा लिया है।
मतदान के दौरान अपने तीन विधायकों की अनुपस्थिति पर कांग्रेस ने कड़ा संज्ञान लेते हुए इसे पार्टी के लिए बड़ा झटका बताया और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत दिए।
इससे पहले महागठबंधन ने चुनाव से पहले अपने विधायकों को एक होटल में ठहराया था और मतदान से एक रात पहले तक उन्हें साथ रखा था। हालांकि मतदान से अनुपस्थित रहने वाले चार विधायकों के फोन बंद मिले और उनसे संपर्क नहीं हो सका।
राष्ट्रीय जनता दल ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच और बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक को अपने उम्मीदवार के पक्ष में मतदान के लिए राजी कर लिया था, लेकिन गठबंधन के चार विधायकों की अंतिम समय में गैरहाजिरी ने राजग के सभी पांच उम्मीदवारों की जीत का रास्ता साफ कर दिया।
उल्लेखनीय है कि राजग के सभी विजयी उम्मीदवार अनुभवी राजनेता हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समाजवादी धारा के वरिष्ठ नेता और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और लम्बे समय से बिहार की राजनीति के सबसे प्रमुख चेहरों में एक हैं। उनका राज्यसभा के लिए चुनाव पार्टी की संसद में उपस्थिति को मजबूत करने के रूप में देखा जा रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन बांकीपुर से कई बार विधायक और बिहार सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। उनके संगठनात्मक अनुभव और विधायी कार्य को देखते उनका चयन संसद के उच्च सदन के लिए किया गया है।
जदयू नेता रामनाथ ठाकुर बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी राज्यसभा की सीट बरकरार रखी है। वह लंबे समय से सामाजिक न्याय की राजनीति से जुड़े रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपने पिता की विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा एक प्रमुख ओबीसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं । वह पुनःराज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए हैं। उनके राज्यसभा पहुंचने से राजग के सामाजिक और राजनीतिक आधार को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। भाजपा नेता शिवेश राम अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं। राम के चुनाव से स्पष्ट है कि भाजपा संसद में व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व पर नजर बनाये हुए है।



