MDSU अजमेर में AI आधारित स्मार्ट सिस्टम लागू करने की पहल

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शिक्षा, प्रशासन और मूल्यांकन में आएगा व्यापक परिवर्तन
अजमेर। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू) अजमेर एक बड़े डिजिटल परिवर्तन की दिशा में निर्णायक कदम उठाने जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) आधारित एक अत्याधुनिक समग्र प्रबंधन सॉफ्टवेयर को लागू करने की पहल की है, जिससे न केवल शैक्षणिक प्रक्रियाएं, बल्कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली भी पूरी तरह से आधुनिक, पारदर्शी और कुशल बन सकेगी।

कुलगुरु प्रो सुरेश कुमार अग्रवाल ने बताया कि यह उन्नत सॉफ्टवेयर Times of India Group के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय को निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, इस सॉफ्टवेयर की बाजार कीमत लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष है, जिसे बिना किसी लाइसेंस शुल्क के उपलब्ध कराना अपने आप में एक महत्वपूर्ण पहल है।

एआई आधारित प्रणाली से बदलेगा कार्य करने का तरीका

प्रस्तावित सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी विशेषता इसका एआई आधारित चैटबॉट इंटरफेस है, जिसमें किसी जटिल मेन्यू या तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता नहीं होगी। उपयोगकर्ता सामान्य भाषा में आदेश देकर विभिन्न कार्यों को संपन्न कर सकेंगे। इस प्रणाली में जनरेटिव एआई, एजेंटिक एआई और डिटर्मिनिस्टिक एआई का संयोजन किया गया है, जिससे न केवल कार्यों का स्वचालन होगा, बल्कि उनकी सटीकता और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित होगी।

‘एआई शिक्षक’ की अवधारणा से शिक्षा में नवाचार

इस सॉफ्टवेयर की एक अनूठी विशेषता एआई टीचर है, जो कक्षा संचालन में सहायक भूमिका निभाएगा। यह प्रणाली विद्यार्थियों की उपस्थिति स्वतः दर्ज करने, विषयानुसार अध्ययन सामग्री तैयार करने, असाइनमेंट और क्विज बनाने तथा विद्यार्थियों के स्तर के अनुसार मूल्यांकन करने में सक्षम होगी। यह तकनीक कमजोर विद्यार्थियों की पहचान कर उन्हें सुधारात्मक मार्गदर्शन भी प्रदान करेगी, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।

परीक्षा, वित्त और प्रशासन में पूर्ण स्वचालन

इस सॉफ्टवेयर में 65 से अधिक मॉड्यूल शामिल हैं, जो विश्वविद्यालय की लगभग सभी गतिविधियों को कवर करते हैं। प्रवेश प्रक्रिया से लेकर परीक्षा, परिणाम, वित्तीय प्रबंधन, खरीद, मानव संसाधन, छात्रवृत्ति और अलुमनाई प्रबंधन तक सभी कार्य एकीकृत प्रणाली के माध्यम से संचालित होंगे। विशेष रूप से परीक्षा प्रणाली में ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन, डिजिटल कॉपी जांच और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया को अत्यंत तेज और पारदर्शी बनाया जा सकेगा।

संबद्ध महाविद्यालयों के लिए भी उपयोगी

एमडीएस विश्वविद्यालय से जुड़े लगभग 400 से अधिक महाविद्यालयों को भी इस प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा। इससे विश्वविद्यालय को सभी महाविद्यालयों की गतिविधियों पर रियल-टाइम निगरानी रखने में सहायता मिलेगी और प्रशासनिक नियंत्रण अधिक प्रभावी होगा।

डेटा सुरक्षा और स्वायत्तता सुनिश्चित

इस पहल में डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सॉफ्टवेयर का संचालन विश्वविद्यालय के अपने सर्वर पर ही होगा, जिससे किसी बाहरी संस्था को डेटा तक सीधी पहुंच नहीं मिलेगी। कोड और डेटा को अलग-अलग रखने की व्यवस्था से गोपनीयता और सुरक्षा और अधिक सुदृढ़ होगी।

निःशुल्क सॉफ्टवेयर, लचीला कार्यान्वयन मॉडल

इस परियोजना के अंतर्गत सॉफ्टवेयर पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। केवल आवश्यकतानुसार तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा सकती हैं, जिनका भुगतान मासिक आधार पर किया जाएगा। यह व्यवस्था पूरी तरह लचीली है और विश्वविद्यालय अपनी आवश्यकता के अनुसार निर्णय ले सकता है।

इस प्रस्तुति में वित्त नियंत्रक, कुलसचिव, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, विभिन्न विभागाध्यक्ष, परीक्षा नियंत्रक एवं कम्प्युटर केंद्र के अधिकारी उपस्थित थे | कुलसचिव ने बताया कि यह पहल उच्च शिक्षा में डिजिटल नवाचार का एक उत्कृष्ट उदाहरण बन सकती है, जो आने वाले समय में अन्य विश्वविद्यालयों के लिए भी प्रेरणा स्रोत सिद्ध होगी।