बेंगलूरु। कर्नाटक में कांग्रेस के भीतर एक बार फिर जबरदस्त आंतरिक कलह और बगावत देखने को मिल रही है, जिसमें मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के करीबी माने जाने वाले मंत्री जमीर अहमद खान पर हाईकमान की नजर टेढ़ी हो गई है।
यह विवाद उन आरोपों के इर्द-गिर्द घूम रहा है कि जमीर ने टिकट वितरण और चुनाव प्रचार के तालमेल को लेकर असहमति जताई थी। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने पार्टी हाईकमान के सामने इस बात को उठाया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया ने यह संदेश दिया है कि इस मामले पर उच्चतम स्तर पर स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। पार्टी नेतृत्व ने दावणगेरे दक्षिण विधानसभा सीट उपचुनाव प्रचार के दौरान आंतरिक कलह से जुड़ी शिकायतों का संज्ञान लिया है।
जमीर ने हालांकि ‘बगावत’ की इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणियों का गलत अर्थ निकाला गया और वे पार्टी के उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के भीतर समुदाय के प्रतिनिधित्व पर एक खुली चर्चा का ही हिस्सा थें।
जमीर ने जोर देकर कहा कि उन्होंने केवल उन आंतरिक बैठकों में एक मुस्लिम उम्मीदवार की मांग उठाई थी, जिनमें अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित वरिष्ठ नेता मौजूद थे। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पार्टी के मंचों पर पूरी पारदर्शिता के साथ चर्चा की गई थी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी हाईकमान के निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया। हाईकमान ने ही उन्हें एक ‘स्टार प्रचारक’ के तौर पर चुनाव प्रचार की जिम्मेदारियां सौंपी थीं। उन्होंने कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ तालमेल का भी जिक्र किया। यह तालमेल मुख्यमंत्री द्वारा अपने चुनाव प्रचार कार्यक्रम की सार्वजनिक घोषणा के बाद कार्यक्रम में किए गए बदलावों को लेकर किया गया था।
जमीर ने कहा कि मैं कोई नेता नहीं हूं। मैं एक आम पार्टी कार्यकर्ता और पार्टी का सेवक हूं। मैंने केवल सौंपी गई जिम्मेदारियों को निभाया है। उन्होंने कहा कि उनका अनुरोध केवल इतना था कि उन्हें सौंपी गई भूमिकाओं को उचित मान्यता दी जाए।
इस आंतरिक तनाव को कुछ अन्य घटनाओं ने और भी बढ़ा दिया है। इनमें मुख्यमंत्री सिद्दारमैया के राजनीतिक सचिव नसीर अहमद को उनके पद से हटाए जाने की खबर भी शामिल है। नसीर अहमद पर उसी निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ काम करने का आरोप था। इस घटना ने राज्य इकाई के भीतर गुटबाजी को लेकर चल रही अटकलों को और भी तेज कर दिया है।



