नई दिल्ली। मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के लिए अपना दूसरा दीर्घकालिक अनुमान शुक्रवार को जारी कर दिया। इसके अनुसार देश के प्रमुख कई हिस्सों में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से कम रहने का अनुमान है। देश में बारिश के मुख्य स्रोत दक्षिण-पश्चिम मानसून के लंबी अवधि के औसत (एलपीए) का 90 प्रतिशत होने की संभावना है और इसमें चार फीसदी घट-बढ़ हो सकती है।
मौसम विज्ञान विभाग ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। मौसम विभाग ने देश के चार प्रमुख हिस्सों में भी बारिश का अलग अलग अनुमान भी जारी किया है। विभाग के मुताबिक देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम मौसमी वर्षा होने की संभावना है। इससे कृषि, जल उपलब्धता, जलविद्युत उत्पादन और जैव परिस्थितिकी की स्थिरता के लिए चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, साथ ही सूखा, भीषण गर्मी और पेयजल संसाधनों पर दबाव बढ़ने का खतरा भी बढ़ सकता है।
मौसम विभाग के महानिदेशक डा. म़त्युजंय महापात्रा ने बताया कि दक्षिण-पश्चिम मानसूनी बारिश पूर्वोत्तर भारत में सामान्य रहेगी। यहां वर्षा के सामान्य या दीर्घावधि का 94-106 प्रतिशत तक रहने की सबसे अधिक संभावना है। मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में यह एलपीए के 94 प्रतिशत से कम और उत्तर-पश्चिम भारत में एलपीए के 92 फीसदी से कम बारिश हो सकती है। देश के अधिकांश वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों से युक्त मानसून कोर जोन (एमसीजेड) में दक्षिण-पश्चिम मानसून की मौसमी वर्षा सामान्य से कम (एलपीए के 94 प्रतिशत से कम) होने की सबसे अधिक संभावना है।
मौसम विभाग ने जून 2026 के दौरान पूरे देश में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की अधिक संभावना जतायी है। यह दीर्घावधि औसत की 92 प्रतिशत से कम रह सकती है। यानी जून में भी बारिश सामान्य से कम रह सकती है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों और मध्य भारत के कुछ अलग-थलग क्षेत्रों के, जून महीने में सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।
आगामी जून महीने में, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, सिवाय मध्य, उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों के, जहां अधिकतम तापमान सामान्य से कम रहने की प्रबल संभावना है। इसी प्रकार, देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है, सिवाय उत्तर-पश्चिम, मध्य और उससे सटे दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों के, जहाँ न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रहने की प्रबल संभावना है।
जून के दौरान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों और महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ अलग-थलग क्षेत्रों में सामान्य से अधिक लू चलने की संभावना है। हालांकि, राजस्थान और झारखंड में सामान्य से कम लू चलने की संभावना है।
मौसम विभाग ने बताया कि वर्तमान में, भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में तटस्थ अल नीनो-दक्षिणी दोलन (ईएनएसओ) की स्थिति अल नीनो की स्थिति में परिवर्तित हो रही है। नवीनतम जलवायु मॉडल पूर्वानुमानों से संकेत मिलता है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित होने की संभावना है।
गर्मी के इस मौसम में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात और आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक लू चलने की आशंका है। इसके अलावा महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ अलग-थलग क्षेत्रों में भी भीषण लू का प्रकोप देखा जा सकता है, जबकि राजस्थान और झारखंड में इस बार सामान्य से कम लू चलने का अनुमान है। मौसम विभाग ने गत 13 अप्रैल को दीर्घावधि का पहला अनुमान जारी किया था। उसमें भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया गया था।

