पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना की गोलीबारी, 16 की मौत

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नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओके) के रावलकोट शहर में बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हजारों निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना ने बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिसमें कम से कम 16 नागरिक मारे गए हैं और 37 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रावलकोट के ईदगाह मैदान में करीब 60,000 से 70,000 लोग शांतिपूर्ण ढंग से एकत्र हुए थे। ये लोग सस्ते आटे, चावल, बिजली की उचित दरों और अपने बुनियादी मानवाधिकारों की मांग कर रहे थे। इसी दौरान पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भीड़ पर एके-47 राइफलों से सीधे गोलियां बरसाना शुरू कर दिया। अचानक हुई इस गोलीबारी से मैदान में भगदड़ मच गई और अपनी आर्थिक बदहाली के खिलाफ आवाज उठाने आए पुरुष, महिलाएं और युवा अपनी जान बचाने के लिए भागते नजर आए।

इस दमन के बाद पूरे रावलकोट में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण और डरावनी बनी हुई है। सड़कों और मैदानों में चारों तरफ खून के निशान दिखाई दे रहे हैं, और पीड़ित परिवार अपने लापता प्रियजनों की तलाश में भटक रहे हैं।

स्थानीय निवासियों के मुताबिक, क्षेत्र में दमन का यह सिलसिला नया नहीं है। पिछले शुक्रवार से अब तक पीओके के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शनों पर की गई सैन्य कार्रवाई में कुल 55 से अधिक नागरिकों की जान जा चुकी है।

इस नरसंहार के बाद पूरे क्षेत्र में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ भारी आक्रोश फैल गया है। रावलकोट के नजदीकी गांव खाई गाला में स्थानीय निवासियों ने बाजार पूरी तरह बंद कर दिए और हिंसा के खिलाफ विरोध मार्च निकाला। इस प्रदर्शन में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और ‘ये जो दहशतगर्दी है, इसके पीछे वर्दी है’ के नारे लगाए, जो अब पूरे क्षेत्र में आंदोलन का मुख्य नारा बन चुका है।

भारी दमन और खून-खराबे के बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। आर्थिक राहत और राजनीतिक अधिकारों की मांग को लेकर हजारों लोग अब भी रावलकोट की सड़कों पर डटे हुए हैं।

गोलीबारी की इस घटना के बाद प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए आंदोलन के प्रमुख नेता सरदार अमन खान ने घोषणा की कि यह संघर्ष अब निर्णायक दौर में पहुंच चुका है। उन्होंने संकल्प जताया कि इतनी बड़ी संख्या में जानमाल के नुकसान के बाद भी यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक मांगें पूरी नहीं हो जातीं। उन्होंने कहा कि सड़कों पर उतरे लोग हथियारों से नहीं, बल्कि भोजन और बिजली जैसी बुनियादी मांगों के साथ शांतिपूर्ण संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उन्हें बदले में गोलियां दी जा रही हैं।