बेंगलूरु। कर्नाटक विधान परिषद चुनावों में क्रॉस-वोटिंग को लेकर मंगलवार को संकट और गहरा गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने खुद से जोड़े जा रहे एक वायरल ऑडियो क्लिप को फर्जी बताकर खारिज कर दिया। वहीं भाजपा विधायक एचके सुरेश ने बेलूर चेन्नाकेशव मंदिर में सार्वजनिक रूप से शपथ ली। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पार्टी को धोखा नहीं दिया है।
परिषद चुनावों में पार्टी के कुछ विधायकों पर आधिकारिक उम्मीदवार के खिलाफ वोट करने के आरोप लगे हैं। इसके बाद से कर्नाटक भाजपा में आंतरिक कलह तेज हो गई है। यह मुद्दा राज्य इकाई के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व घटनाक्रम पर पैनी नजर रख रहा है। वह जिम्मेदार लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रहा है।
इस ऑडियो क्लिप ने नई अटकलों को जन्म दे दिया है। सदानंद गौड़ा ने स्पष्ट रूप से इनकार किया है कि यह उनकी आवाज है। उन्होंने कहा कि वह नई दिल्ली में भाजपा केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपना स्पष्टीकरण पेश करेंगे। सूत्रों ने संकेत दिया है कि समय तय होने के बाद वह पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मिल सकते हैं।
अपनी ही पार्टी के भीतर क्रॉस-वोटिंग के आरोपों का सामना कर रहे बेलूर के विधायक एचके सुरेश ने नाटकीय अंदाज में विरोध जताया। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं की मौजूदगी में ऐतिहासिक चेन्नाकेशव मंदिर में गंभीर शपथ ली। उन्होंने घोषणा की कि वह चुनाव के दौरान भाजपा के प्रति वफादार रहे हैं।
सुरेश ने इन आरोपों को खुद को बदनाम करने की सुनियोजित साजिश बताते हुए इसे खारिज कर दिया। सुरेश ने कहा कि वह पार्टी को कभी धोखा नहीं दे सकते, खासकर तब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद उनके चुनाव क्षेत्र में प्रचार किया था। उन्होंने कहा कि मुझे कोई पैसे से नहीं खरीद सकता। भगवान ने मुझे बहुत कुछ दिया है। मेरे लिए सिर्फ मेरे निर्वाचन क्षेत्र के लोगों का स्नेह मायने रखता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि क्रॉस-वोटिंग नहीं की है। विधायक ने यह भी घोषणा की कि वह सैकड़ों समर्थकों के साथ क्षेत्र धर्मस्थल जाएंगे। वह भगवान मंजूनाथ के सामने एक और शपथ लेंगे। उन्होंने कहा कि वह जनता और भगवान दोनों के सामने अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए तैयार हैं।
गौरतलब है कि वायरल ऑडियो क्लिप में कथित तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा के साथ प्रदीप जी नामक किसी व्यक्ति की बातचीत है। इसमें कर्नाटक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र को पद से हटाने और राज्य नेतृत्व में बदलाव के समय को लेकर चर्चा की जा रही है। ये दोनों घटनाक्रम परिषद चुनावों के बाद कर्नाटक भाजपा के भीतर बढ़ती बेचैनी को बताते है। क्रॉस-वोटिंग के आरोपों से गुटीय मतभेद और गहराने का खतरा है। इससे राज्य नेतृत्व भी जांच के घेरे में आ गया है।



