अजमेर। विश्व हिंदू आर्थिक मंच (WHEF) की ओर से सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के सभागार में आयोजित बैठक में उद्यमिता, आर्थिक सशक्तीकरण, ज्ञान-विनिमय और सामाजिक समृद्धि जैसे विषयों पर सार्थक विचार-विमर्श हुआ। कार्यक्रम में वक्ता विज्ञानानंद ने भारतीय आर्थिक चिंतन, उद्यमिता और सामाजिक उत्तरदायित्व के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे।
विज्ञानानंद ने ‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’ अर्थात ‘सम्पूर्ण विश्व को श्रेष्ठ एवं उदात्त बनाएं’ की भावना को केंद्र में रखते हुए कहा कि आर्थिक विकास का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत समृद्धि तक सीमित नहीं होना चाहिए। आर्थिक प्रगति समाज में रोजगार, अवसर, सहयोग और सामूहिक विकास का माध्यम बने, तभी उसका वास्तविक उद्देश्य पूरा होगा।
उन्होंने विश्व हिंदू आर्थिक मंच की मूल भावना ‘Making Society Prosperous’ यानी समाज को समृद्ध बनाने तथा ‘Creating and Sharing Surplus Wealth’ यानी अधिशेष संपदा का सृजन और उसका साझा करने की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘Dharmasya Moolam Arthah’ के विचार को भारतीय आर्थिक दृष्टिकोण से जोड़ते हुए उद्यमिता को राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण साधन बताया।
सफलता के तीन आयाम बताए
विज्ञानानंद ने उद्यमियों और प्रोफेशनल्स के लिए Visibility, Acceptability और Respectability यानी दृश्यता, स्वीकार्यता और सम्माननीयता को सफलता के तीन महत्वपूर्ण आयाम बताया। उन्होंने कहा कि Visibility से कार्य और योगदान की पहचान बनती है, Acceptability से विश्वास एवं जुड़ाव विकसित होता है, जबकि Respectability अच्छे कार्य, दक्षता, विश्वसनीयता और नैतिक मूल्यों से अर्जित होती है।
उन्होंने कहा कि Visibility creates awareness, Acceptability creates influence and Respectability creates legacy अर्थात दृश्यता पहचान बनाती है, स्वीकार्यता प्रभाव पैदा करती है और सम्माननीयता स्थायी विरासत का निर्माण करती है।
उन्होंने उद्यमियों से आह्वान किया कि वे केवल अपने व्यवसाय के विस्तार तक सीमित न रहें, बल्कि अपने ज्ञान, अनुभव और संसाधनों का उपयोग समाज में नए अवसर पैदा करने और अन्य लोगों को आगे बढ़ाने के लिए भी करें।
कार्यक्रम में कहा गया कि विश्व हिंदू आर्थिक मंच जैसे मंच उद्यमियों, उद्योगपतियों, व्यापारियों, बैंकर्स, निवेशकों और प्रोफेशनल्स को एक साथ लाकर ज्ञान, अनुभव, संसाधनों तथा व्यावसायिक अवसरों के आदान-प्रदान का प्रभावी माध्यम बनते हैं।
लघु उद्योग भारती अजमेर की ओर से भी ऐसे आयोजनों को छोटे एवं मध्यम उद्यमियों के बीच नेटवर्किंग, ज्ञान-विनिमय, सहयोग और नए व्यावसायिक अवसरों को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया गया।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि आर्थिक समृद्धि तभी सार्थक है, जब उसका लाभ समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचे और उद्यमिता राष्ट्र एवं समाज के उत्थान का माध्यम बने। ‘कृष्णन्तो विश्वमार्यम्’ की भावना के अनुरूप ज्ञान, उद्यम, संस्कार और सामर्थ्य के माध्यम से समाज एवं राष्ट्र को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प लिया गया।




