बेंगलूरु। कर्नाटक में दक्षिण बेंगलुरु तालुका में गुरुवार को हुए एक भीषण खदान हादसे में आठ लोगों की मौत हो गई। कर्नाटक पुलिस ने शुरुआत में सात मजदूरों की मौत की पुष्टि की थी, लेकिन बाद में अस्पताल में भर्ती गंभीर रूप से घायल एक मजदूर ने भी दम तोड़ दिया।
पुलिस के मुताबिक यह हादसा प्राकृतिक रूप से चट्टान खिसकने की घटना नहीं थी, बल्कि इंसानी लापरवाही और सुरक्षा नियमों की अनदेखी का नतीजा थी। आरंभिक जांच में पता चला है कि पास में ही ऊंचाई पर स्थित एक खदान में खुदाई कर रही मशीन (एक्सकेवेटर) ने एक विशाल चट्टान को नीचे की तरफ धकेल दिया, जो सीधे नीचे की खदान में काम कर रहे मजदूरों पर जा गिरी। इससे सटी हुई खदानों के बीच तालमेल और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सेंट्रल ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) एस. गिरीश ने घटनास्थल का मुआयना करने के बाद बताया कि यहां दो अलग-अलग मालिकों की खदानें बिल्कुल पास-पास हैं। ऊपर वाली खदान में काम कर रही मशीन के कारण एक विशालकाय चट्टान खिसक कर नीचे की खदान में आ गिरी।
गिरीश ने कहा कि हादसे के वक्त नीचे की खदान में 16 मजदूर काम कर रहे थे। इनमें से सात की मौके पर ही मौत हो गई, पांच को अस्पताल ले जाया गया और चार मजदूर सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रहे। बाद में अस्पताल में एक और मजदूर की मौत हो गई।
मृतकों की पहचान रामू, राजपाल सिंह, सत्यनारायण सिंह, राम अवतार सिंह, राजेंद्र प्रसाद, नुहार और भुवनेश्वर सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार मृत मजदूरों में से एक कर्नाटक के यादगीर जिले का था, जबकि बाकी सभी मध्य प्रदेश के रहने वाले प्रवासी मजदूर थे। घायल मजदूरों में से एक छत्तीसगढ़ का है।
हादसे में बाल-बाल बचे तमिलनाडु के एक मजदूर गोपी ने आरोप लगाया कि ऊपर काम करने वालों ने उन्हें कोई चेतावनी नहीं दी थी। उन्होंने कहा कि ऊपर की खदान में काम करने वालों को नीचे वालों को सतर्क करना चाहिए था, लेकिन हमें किसी ने नहीं बताया। अगर हमें जरा सा भी इशारा मिल जाता तो हम हट जाते। हम चार लोग बहुत मुश्किल से जान बचाकर भागे हैं।
गिरती हुई चट्टान का प्रभाव इतना जोरदार था कि मजदूर मलबे के नीचे दब गए और वहां खड़े ट्रैक्टर और टिपर जैसे भारी वाहन भी पूरी तरह पिचक गए। पुलिस ने बताया कि टक्कर के कारण कुछ शवों की हालत बेहद खराब हो गई थी।
इस दर्दनाक घटना पर मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार ने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक वहां कोई ब्लास्टिंग (विस्फोट) नहीं की जा रही थी। उन्होंने मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या दोनों खदानें कानूनी रूप से चल रही थीं और वहां सुरक्षा नियमों का पालन हो रहा था या नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। पूरी जानकारी मिलने के बाद मुआवजे की घोषणा की जाएगी। सबसे अहम बात यह है कि ऐसी लापरवाही दोबारा नहीं होनी चाहिए। पुलिस ने खदान मालिकों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही का मामला दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है। इसे हाल के वर्षों में कर्नाटक का सबसे भीषण खदान हादसा माना जा रहा है।



